Posts

न्यूटन

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 न्यूटन Image by Ralph from Pixabay न्यूटन एक महान प्रतिभाशाली वैज्ञानिक थे। उन्होंने केवल 22 वर्ष की अवस्था में ही बीजगणित के द्विपद सिद्धांत का आविष्कार किया था और बाद में सूर्य की किरणों में सात रंग क्यों हैं, समुद्र में ज्वार-भाटा क्यों आता है, सूर्य और चन्द्र क्षीण कैसे हो जाते हैं तथा फिर पूर्ण कैसे होते हैं, इन सब प्रश्नों का गंभीरतापूर्वक अध्ययन करके गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का आविष्कार किया था। उनके चिंतन एवं विद्वत्ता पर आज भी समस्त यूरोप को गर्व है। उन्हीं महान् वैज्ञानिक के पास एक बार एक महिला आई और आंतरिक सत्यता पूर्वक उनकी प्रतिभा और ज्ञान की प्रशंसा करने लगी। महिला द्वारा की गई प्रशंसा को सुनकर न्यूटन ने चकित होकर कहा - बहिन! तुम क्या कह रही हो? मैं तो उस बालक के समान हूँ जो कि सत्य के विशाल समुद्र के किनारे पर बैठा हुआ केवल कंकर ही बीनता रहता है। ज्ञान के असीम सागर में तो मैंने अभी तक प्रवेश ही नहीं किया है। आगंतुक महिला महा-विद्वान न्यूटन की विनम्रता देखकर बहुत चकित हुई और स्वयं भी उनके साथ खोजकार्य में लग गई। -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्या...

ईमानदारी

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 ईमानदारी Image by Tran Thao An from Pixabay इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा में प्रवेश पा गया। क्लास में हमेशा से अव्वल आता रहा है। पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया। बेटे ने जूते लेने से यह कह कर मना कर दिया कि पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है। वे अभी इस साल काम दे सकते हैं। अपने जूतों की बजाये उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा। मैंने सोचा, बेटा अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रहा है। खैर! मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुँचा। दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली। डाल कर देखने पर शर्ट एकदम फिट थी। फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा। मैंने बेटे से कहा - बेटा! ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है, तो फिर और लम्बी क्यों? बेटे ने कहा - पिता जी! मुझे शर्ट निक्कर के अंदर ही डालनी होती है, इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यही शर्ट मुझे...

मोदक भोग

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मोदक भोग Image by Mary Basket from Pixabay जब ठाकुर जी ने मोदक भोग लगायो। एक थे गवारिया बाबा। वृन्दावन में ही रहते थे। बिहारी जी को अपना यार कहते थे। सिर्फ कहते नहीं, मानते भी थे। नियम था बिहारी जी को नित्य सांय शयन करवाने जाते थे। एक बार शयन आरती करवाने जा रहे थे। बिहारी जी की गली में बढ़िया मोदक बन रहे थे। अच्छी खुशबू आ रही थी। चार मोदक मांग लिए बिहारी जी के लिए। वृन्दावन के लोग बिहारी जी के भक्तों का बहुत आदर करते हैं। उन्होंने मना नहीं किया। एक दोने में बांध दिये साथ में। बाबा भीतर गए तो बिहारी जी के भोग के पट बंद हो चुके थे। गवारिया बाबा जी ने वहीं बैठकर अपना कम्बल बिछाया और उस पर बैठकर अपने मन के भाव में खो गए। वहाँ बिहारी जी की आरती का समय हुआ तो श्री गौसाई जी बहुत प्रयास कर रहे हैं लेकिन ठाकुर जी के मंदिर का पट नहीं खुल रहा। बड़े हैरान इधर-उधर देखते रहे। एक संत कोने में बैठे सब दृश्य आरंभ से देख रहे थे। पुजारी जी ने लाचारी से देखा तो संत बोले - उधर गवारिया बाबा बैठे हैं। उनसे पूछो, वह बता देंगे। गौसाई जी ने बाबा से कहा - रे बाबा! तेरे यार तो दरवाजा ही न खोल ...

सरप्राइज

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सरप्राइज Image by free stock photos from www.picjumbo.com from Pixabay मोहन बाबू ने कमरे में घुसते ही कहा - सरप्राइज....सरप्राइज....। ‘क्या सरप्राइज है पापा?’, सुमित उत्सुकता से बोला। ‘सुमित और तान्या, ये लो बगल वाली सोसायटी में 2 बी.एच.के. फ्लैट तुम्हारे लिये।’ ‘व्हाट....? ये आप क्या कह रहे हैं पापा? हमारे लिए अलग से फ्लैट....? हम यहाँ खुश हैं, पापा! क्यों तान्या?’ ‘हां पापा....सुमित सही कह रहा है, मुझे यहाँ कोई दिक्कत नहीं है’, तान्या बोली। इससे पहले मोहनबाबू कुछ बोलें, सुमित बीच में बोल पड़ा, ‘और पापा! हर माँ-बाप चाहते हैं कि उनकी औलाद उनके पास रहे, तो आपकी ये अलग फ्लैट वाली बात....? और इतने पैसे कहां से आए आपके पास?’ ‘बेटा! बात ऐसी है, तुम्हारी शादी के लिए बहुत कुछ जोड़कर रखा था, तुम हमारे इकलौते बेटे जो ठहरे। बड़े अरमान थे - यह करूँगा, वह करूँगा। सब धरे के धरे रह गए, क्योंकि तुमने लव मैरिज जो कर ली। तो शादी के तामझाम में होने वाला मेरा खर्चा बच गया, तो उसी से तुम दोनों के लिए एक फ्लैट....। तुम दोनों कमाते हो, दोनों सुबह ऑफिस निकल जाते हो, ई.एम.आई. है कुछ सालों ...

समर्पित भक्त

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 समर्पित भक्त Image by Ian Lindsay from Pixabay एक ब्राह्मण था। वह भगवान का महान भक्त था। वह मंदिर की पूजा में बहुत शानदार सेवा पेश करना चाहता था, लेकिन उसके पास धन नहीं था। एक दिन की बात है। वह एक भागवत पाठ में बैठा हुआ था और उसने सुना कि नारायण मन में भी पूजे जा सकते हैं। उसने इस अवसर का लाभ उठाया क्योंकि वह एक लंबे समय से सोच रहा था कि कैसे बहुत शान से नारायण की पूजा करूँ, लेकिन धन के अभाव की वजह से वह ऐसा नहीं कर पा रहा था। जब वह यह समझ गया कि मन के भीतर नारायण की पूजा कर सकते हैं, तो गोदावरी नदी में स्नान करने के बाद, वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया। अपने मन के भीतर वह बहुत खूबसूरत सिंहासन का निर्माण कर रहा था, सिंहासन पर गहनों के साथ लदी भगवान की मूर्ति को रखते हुए वह मन ही मन में भगवान का गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी नदी के जल के साथ अभिषेक कर रहा था। फिर बहुत अच्छी तरह से भगवान का शृंगार कर रहा था और फूल, माला के साथ पूजा कर रहा था। वह बहुत अच्छी तरह से भोजन पका रहा था और प्रसाद के लिए वह मीठे चावल पका रहा था। वह परखना चाहता था कि क्या वह बहुत गरम थे, क्य...

अहंकार से बचें

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अहंकार से बचें Image by toodlingstudio from Pixabay जो लोग घमंड करते हैं, उनका सारा ज्ञान व्यर्थ है, इस बुराई की वजह से सब कुछ खत्म हो सकता है। रामकृष्ण परमहंस से जुड़ी एक प्रेरक कथा प्रचलित है। एक दिन रामकृष्ण परमहंस किसी संत के साथ बैठे हुए थे। ठंड के दिन थे। शाम हो गई थी। तब संत ने ठंड से बचने के लिए कुछ लकड़ियां एकत्रित की और धूनी जला दी। दोनों संत धर्म और अध्यात्म पर चर्चा कर रहे थे। इनसे कुछ दूर एक गरीब व्यक्ति भी बैठा हुआ था। उसे भी ठंड लगी तो उसने भी कुछ लकड़ियां एकत्रित कर ली। अब लकड़ी जलाने के लिए उसे आग की जरूरत थी। वह तुरंत ही दोनों संतों के पास पहुँचा और धूनी से जलती हुई लकड़ी का एक टुकड़ा उठा लिया। एक व्यक्ति ने संत द्वारा जलाई गई धूनी को छू लिया, तो संत गुस्सा हो गए। वे उसे मारने लगे। संत ने कहा कि तू पूजा-पाठ नहीं करता है, भगवान का ध्यान नहीं करता है, तेरी हिम्मत कैसे हुई, तूने मेरे द्वारा जलाई गई धूनी को छू लिया। रामकृष्ण परमहंस ये सब देखकर मुस्कुराने लगे। जब संत ने परमहंस जी को प्रसन्न देखा तो उन्हें और गुस्सा आ गया। उन्होंने परमहंस जी से कहा, ‘आप इतना...

डॉ. विश्वेश्वरैया

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 डॉ. विश्वेश्वरैया Image by myungho lee from Pixabay ब्रिटेन में एक ट्रेन द्रुत गति से दौड़ रही थी। ट्रेन अंग्रेजों से भरी हुई थी। उसी ट्रेन के एक डिब्बे में अंग्रेजों के साथ एक भारतीय भी बैठा हुआ था। डिब्बा अंग्रेजों से खचाखच भरा हुआ था। वे सभी उस भारतीय का मजाक उड़ाते जा रहे थे। कोई कह रहा था - देखो कौन नमूना ट्रेन में बैठ गया, तो कोई उनकी वेशभूषा देखकर उन्हें गंवार कहकर हँस रहा था। कोई तो इतने गुस्से में था कि ट्रेन को कोसकर चिल्ला रहा था - एक भारतीय को ट्रेन मे चढ़ने क्यों दिया? इसे डिब्बे से उतारो। किंतु उस धोती-कुर्ता, काला कोट एवं सिर पर पगड़ी पहने शख्स पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह शांत, गम्भीर भाव से बैठा था, मानो किसी उधेड़बुन में लगा हो। ट्रेन द्रुत गति से दौड़े जा रही थी औऱ अंग्रेजों का उस भारतीय का उपहास, अपमान भी उसी गति से जारी था। किन्तु यकायक वह शख्स सीट से उठा और जोर से चिल्लाया - “ट्रेन रोको...., तुरंत रोको ट्रेन....।” कोई कुछ समझ पाता उससे पूर्व ही उसने ट्रेन की जंजीर खींच दी। ट्रेन रुक गई। अब तो जैसे अंग्रेजों का गुस्सा फूट पड़ा। सभी उसको गालियां दे...