Success किसे कहते हैं? (प्रेरणात्मक लेख)
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Success किसे कहते हैं? (प्रेरणात्मक लेख)
Image by Ralf Kunze from Pixabay
आज हरेक की ज़बान पर Success शब्द चढ़ा हुआ है। हर कोई अपने जीवन में सफल होना चाहता है। वास्तव में Success क्या है? क्या अच्छे स्कूल में Admission होना, अच्छे Marks लाना, अच्छी Job पाना, परिवार बसा लेना, व्यापार में वांछित परिणाम पा लेना ही Success है। खिलाड़ी खेल में जीत जाए, अभिनेता अपने क्षेत्र में पहचान बना ले या एक साधु भी कोई विशेष उपलब्धि को प्राप्त कर ले तो अपने जीवन को सफल मानता है।
स्वयं द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर लेना सफलता है पर सफलता की पूर्णता नहीं है। एक लक्ष्य को प्राप्त करके वह कुछ समय के लिए खुश होता है, पर तुरन्त दूसरे लक्ष्य की ओर दौड़ने लगता है। नाम, यश, पद पाने में जीवन की सफलता नहीं; सुख, शांति और प्रसन्नता ही जीवन की वास्तविक सफलता है।
एक व्यक्ति व्यापार में एक लाख के मुनाफे का लक्ष्य बनाता है। लखपति बनते ही उसका लक्ष्य करोड़पति बनने का हो जाता है। वह एक लाख का आनन्द नहीं, 99 लाख का दुःख भोगने में लग जाता है।
होड़ में दौड़ा, प्रसन्नता को छोड़ा।
Name, Fame, Position, Prestige पाना सफल जीवन की पहचान नहीं है। सफल जीवन की असली पहचान है - परिपक्वता। ऐसी समझ, जो कठिनाइयों में मन को स्थिरता प्रदान करे, मानसिक रूप से परेशान न करे।
एक आम जब तक कच्चा होता है, उसमें कठोरता और खटास रहती है। पकने के बाद वह स्वादिष्ट, मीठा और कोमल हो जाता है जो ओरों को भी मिठास बांटता है। इसी में उसके जीवन की सार्थकता और सफलता है। हम स्वयं को इतना परिपक्व बना लें कि हम हर कठिन परिस्थिति का मुस्कुरा कर सामना कर सकें।
हम अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं तो अपनी आकाक्षाओं को नियंत्रित रखें और आवश्यकताओं को सीमित करें। जीवन में प्रसन्नता संतुष्टि से आती है, समृद्धि से नहीं।
हम सफल कैसे बनें?
1. लक्ष्य में दृढ़ता
अर्जुन को अपने लक्ष्य-बेध के लिए मन की दृढ़ता से ही सफलता प्राप्त हुई। अन्य सभी भाइयों को वृक्ष, डालियां, पत्ते, चिड़िया आदि दिखाई दे रहे थे लेकिन अर्जुन को केवल उसका लक्ष्य दिखाई दे रहा था। सचिन तेंदुलकर से उसकी सफलता का राज पूछा गया, तो उसने कहा कि मैंने 25 वर्ष तक केवल क्रिकेट को जीया, खाया, सोया और सपने भी क्रिकेट के देखे। हमारा चित्त केवल अपने लक्ष्य पर ही केन्द्रित रहे। सही लक्ष्य और उसके प्रति समर्पण की भावना ही हमें सफल बना सकती है।
2. आत्म-विश्वास
एक माँ अपने बच्चे को उसके पिता के जाने के बाद घरों में काम करके स्कूल में पढ़ा रही थी। बच्चा पढ़ने में होशियार नहीं था। एक दिन स्कूल से माँ के नाम एक पत्र आया। स्कूल से उसका नाम काट दिया गया था। बच्चे ने पूछा कि इसमें क्या लिखा है? माँ ने बताया कि इसमें लिखा है - आपका बच्चा सबसे अलग है। हमारे स्कूल के अध्यापक इसे पढ़ाने में असमर्थ हैं। आप इसे किसी अन्य स्कूल में दाखिल कर दें।
बच्चे के मन में यह बात बैठ गई कि मैं सबसे अलग हूँ और मुझे कुछ अलग करके दिखाना है। वही बच्चा बड़ा होकर अलबर्ट आइंस्टीन के नाम से दुनिया में विख्यात हुआ, केवल अपने आत्म-विश्वास के बल पर।
3. सतत परिश्रम
सफलता Instant नहीं मिल सकती। 1-1 कदम चल कर ही मंज़िल को पाया जा सकता है। 1-1 ईंट लगाकर ही बड़े महल का निर्माण होता है। रातों-रात कोई सफलता का स्वाद नहीं चख सकता। इसलिए चलते रहो, चलते रहो।
4. Patience
धैर्य ही जीवन में सफलता ला सकता है। अधीरता से सफलता दूर चली जाती है।
सफलता में बाधक तत्व हैं - ठोस लक्ष्य का न होना, समय की पाबंदी का अभाव, लक्ष्य-प्राप्ति में शंका रखना और अहं की भावना।
जब तक हम अपने Ego को नियंत्रित नहीं करेंगे, तब तक अपने व्यवहार में विनम्रता नहीं ला सकेंगे। जो व्यक्ति हमें सफलता की ऊँचाइयों के मार्ग पर मिलते हैं, वे ही हमें नीचे भी गिरा सकते हैं। छोटी-छोटी बातों में उलझना ठीक नहीं है।
मन को शांत रखो और जीवन को सफल बनाओ।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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धन्यवाद।
Very nice
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