मां का पत्र बेटी के नाम

मां का पत्र बेटी के नाम 

14 Feb. 2004 वैलेंटाइन डे



Sung by Bindu Jain, Delhi

तेरी ज़िन्दगानी की कहानी भी अजीब है ये, कभी ये हंसाती और कभी ये रुलाती है। 

कभी ये बिखेरती है खुशियों के फूल और, कभी अपने ही अंसुवन में नहाती है ॥

जो भी हम चाहते है पाया नहीं जाता, जो भी हम पाते हैं,  भाया नहीं जाता, 

जो भी हमें भाता है वो रहता नहीं कभी, खट्टी मीठी यादों को तू भूल क्यों न जाती है॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....

ममता के फूलों से किया है शृंगार तेरा, विद्या रूपी धन से भरा है भंडार तेरा,

 इस धन को तू रखना संभाल के, जीवन के कोष में यही तेरी थाती है॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....

 जीवन की बगिया से फूल-फूल चुनना, कांटों को निकाल के तू दूर-दूर करना, 

मान देना सबको और प्यार देना सबको, तेरी कोयल सी कूक सारे चमन को महकाती है ॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....

 तेरे अंगना में जब गूंजी किलकारी है, 'मैया मैया' बोल के ये दुनिया संवारी है। 

सोने के सिंहासन पे सजते हैं छोटे राजा, उनकी अदाओं पे तू बलिहारी जाती है ॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....

उसको गुणों के भंडार सौंप देना, लाड़, प्यार, ममता, दुलार सौंप देना, 

रोशन करेगा वो नाम को तुम्हारे, यही मेरी तेरे नाम अनमोल पाती है ॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....

 शब्दार्थ: थाती - धरोहर, पाती - पत्र

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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