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Showing posts from October, 2023

मौत का भय

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मौत का भय Image by kkw0812 from Pixabay दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे थे। एक ने अपने मुंह में सांप को दबोच रखा था। दूसरा उल्लू एक चूहा पकड़ लाया था। दोनों वृक्ष पर पास-पास बैठे थे। सांप ने चूहे को देखा तो वह यह भूल ही गया कि वह उल्लू के मुंह में है और मौत के करीब है। चूहे को देख कर उसके मुँह में लार बहने लगी। चूहे ने जैसे ही सांप को देखा तो वह कांपने लगा, जबकि दोनों ही मौत के मुँह में बैठे हैं। दोनों उल्लू बहुत हैरान हुए। एक उल्लू ने दूसरे उल्लू से पूछा कि भाई! इसका कुछ राज समझे? दूसरे ने कहा - बिल्कुल समझ में आया। पहली बात तो यह है कि जिह्वा की इच्छा इतनी प्रबल है कि सामने मृत्यु खड़ी हो तो भी दिखाई नहीं पड़ती। दूसरी बात यह समझ में आयी कि मौत का भय मौत से भी बड़ा है। मौत सामने खड़ी है। उससे यह चूहा भयभीत नहीं है; लेकिन इस भय से भयभीत है कि कहीं सांप हमला न कर दे। शिक्षा - हम भी मौत से भयभीत नहीं हैं, जितना उसके भय से भयभीत हैं। ऐसे ही जिह्वा का स्वाद इतना प्रगाढ़ है कि मौत चौबीस घंटे सामने खड़ी है, फिर भी हमें दिखाई नहीं पड़ती है और हम अंधे होकर कुछ भी डकारते (खाते) रहत...

राजा और अतिथि की पगड़ी

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 राजा और अतिथि की पगड़ी Image by 👀 Mabel Amber, who will one day from Pixabay एक राजा ने दरबार में सुबह-सुबह दरबारियों को बुलाया। उसका दरबार भरता ही जा रहा था कि एक अजनबी यात्री वहाँ आया। वह किसी दूर देश का रहने वाला होगा। उसके वस्त्र पहचाने हुए से नहीं मालूम पड़ते थे। उसकी शक्ल भी अपरिचित थी, लेकिन वह बहुत गरिमाशाली और गौरवशाली व्यक्तित्व का धनी मालूम होता था। सारे दरबार के लोग उसकी तरफ़ देखते ही रह गए। उसने एक बहुत शानदार पगड़ी पहन रखी थी। वैसी पगड़ी उस देश में कभी नहीं देखी गयी थी। वह बहुत रंग-बिरंगी छापेदार थी। ऊपर चमकदार चीजें लगी थी। राजा ने पूछा - अतिथि! क्या मैं पूछ सकता हूँ कि यह पगड़ी कितनी मंहगी है और कहाँ से खरीदी गयी है? उस आदमी ने कहा - यह बहुत मंहगी पगड़ी है। इसके लिए मुझे एक हजार स्वर्ण मुद्रा खर्च करनी पड़ी हैं। वज़ीर राजा की बगल में बैठा था और वजीर स्वभावतः चतुर व चालाक होते हैं, नहीं तो उन्हें कौन वजीर बनाएगा? उसने राजा के कान में कहा - सावधान! यह पगड़ी बीस-पच्चीस रुपये से ज्यादा की नहीं मालूम पड़ती। यह इसका मूल्य हज़ार स्वर्ण मुद्रा बता रहा है। इसका आपको ल...

ये तेरा यार है और वह मेरा यार है

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 ये तेरा यार है और वह मेरा यार है Image by Karsten Paulick from Pixabay कॉलेज में पढ़ने वाला, आजकल के मस्ती के माहौल में चलने वाला एक प्रेमी-प्रेमिका का जवान जोड़ा अपनी बाइक पर बैठ मौज-मस्ती भरे अंदाज़ में जा रहा था। रास्ते में एक पान की दुकान में उन्होंने बाइक रोकी और दोनों सिगरेट लेकर लगे फूंकने। उस पान की दुकान के बगल में नीचे एक फ़क़ीर अपने में मस्त बैठा था। तभी मस्ती-मस्ती में कॉलेज की युवती ने सिगरेट के धुएँ को उस फ़क़ीर की तरफ फेंकना शुरू किया। फ़क़ीर युवती की तरफ देखकर हल्के से मुस्कुरा कर अपने में मस्त हो गया। युवती ने अपने आशिक से कहा कि देखो! ये मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था और तुम चुपचाप देख रहे हो। युवक ने कहा - छोड़ो! फ़क़ीर है। ऐसे ही मुस्कुरा दिया होगा। सिगरेट खत्म होने के बाद उन दोनों ने पान चबाना शुरू किया और इस बार पान चबाते-चबाते युवती ने पान की पीक को फकीर के सिर पर थूकना शुरू किया। इस बार भी फ़क़ीर मुस्कुरा कर अपने में मस्त हो गया। इस युवती से रहा नहीं गया और अपने यार से बोली - तुम कैसे यार हो? ये फ़क़ीर बार-बार अपनी बुरी नज़रों से मुझे देखकर मुस्कुरा रहा है और त...

ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेत

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेत Image by Andreas Lischka from Pixabay फिलोसोफी के एक प्रोफ़ेसर ने कुछ चीजों के साथ बस में प्रवेश किया। जब बस चलनी शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़ा-सा खाली शीशे का जार लिया और उसमें पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े भरने लगे। फिर उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने कहा, “हाँ।” तब प्रोफ़ेसर ने छोटे-छोटे कंकड़ों से भरा एक बर्तन लिया और उन्हें जार में भरने लगे। जार को थोड़ा हिलाने पर ये कंकड़ पत्थरों के बीच सैट हो गए। एक बार फिर उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने ‘हाँ’ में उत्तर दिया। तभी प्रोफ़ेसर ने एक सैंड बॉउल निकाला और उसमें भरी रेत को जार में डालने लगे। रेत ने बची-खुची जगह भी भर दी। और एक बार फिर उन्होंने पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने एक साथ उत्तर दिया, “हाँ”। फिर प्रोफ़ेसर ने समझाना शुरू किया, ”मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें कि ये जार आपके जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। बड़े-बड़े पत्थर आपके जीवन की ज़रूरी चीजें हैं - आपकी फैमिली, आपका लाइफ पार्टनर, आपकी हैल्थ, आपके बच्चे - ऐसी चीजें हैं कि अगर आ...

आज्ञा पालन

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 आज्ञा पालन Image by Susanne Jutzeler, Schweiz 🇨🇭 suju-foto from Pixabay रेगिस्तान के किनारे स्थित एक गाँव में एक व्यापारी रहता था। वह ऊँटों का व्यापार करता था। वह ऊँटों के बच्चों को खरीदकर उन्हें शक्तिशाली बनाकर बेचा करता था। इससे वह ढेर सारा लाभ कमाता था। व्यापारी ऊँटों को पास के जंगल में घास चरने के लिए भेज देता था, जिससे उनके चारे का खर्च बचता था। उनमें से एक ऊँट का बच्चा बहुत शैतान था। उसकी हरकतें पूरे समूह की चिंता का विषय थी। वह प्रायः समूह से दूर चलता था और इस कारण पीछे रह जाता था। बड़े ऊँट हरदम उसे समझाते थे पर वह नहीं सुनता था, इसलिए उन सब ने उसकी परवाह करना छोड़ दिया था। व्यापारी को उस छोटे ऊँट से बहुत प्रेम था। इसलिए उसने उसके गले में घंटी बाँध रखी थी। जब भी वह सिर हिलाता तो उसकी घंटी बजती थी जिससे उसकी चाल एवं स्थिति का पता चल जाता था। एक बार उस स्थान से एक शेर गुज़रा, जहाँ ऊँट चर रहे थे। उसे ऊँट की घंटी के द्वारा उनके होने का पता चल गया था। उसने फसल में से झांककर देखा तो उसे ज्ञात हुआ कि ऊँट का एक बड़ा समूह है लेकिन वह ऊँटों पर हमला नहीं कर सकता था क्यो...

परछाई

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 परछाई (एक बोध कथा) Image by Marco from Pixabay एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में एक हीरों का हार था। जिसे उतार कर रानी ने वहीं आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी। इतने में एक कौवा आया। उसने देखा कि कोई चमकीली चीज़ है, तो उसे लेकर वह उड़ गया। एक पेड़ पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश की, पर खा न सका। कठोर हीरों पर मारते-मारते उसकी चोंच दुखने लगी। अंततः हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ कर वह उड़ गया। जब रानी के बाल सूख गए तो उसका ध्यान अपने हार पर गया, पर वह तो वहाँ था ही नहीं। इधर-उधर ढूंढा, परन्तु हार गायब। रोती-धोती वह राजा के पास पहुंची और बोली कि मेरे हार की चोरी हो गई है। उसका पता लगाइए। राजा ने कहा - चिंता क्यों करती हो, दूसरा बनवा देंगे। लेकिन रानी मानी नहीं। उसे उसी हार की रट थी। कहने लगी - नहीं, मुझे तो वही हार चाहिए। अब सब ढूंढने लगे, पर किसी को हार मिला ही नहीं। राजा ने कोतवाल को कहा - मुझ को वह गायब हुआ हार लाकर दो। कोतवाल बहुत परेशान हुआ। कहाँ मिलेगा? सिपाही, प्रजा, कोतवाल - सब हार खोजने में लग गए। राजा ने ऐलान किया - जो कोई रानी का हा...

हमसे आगे हम

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 हमसे आगे हम Image by Albrecht Fietz from Pixabay टीचर ने सीटी बजाई और स्कूल के मैदान पर 50 छोटे-छोटे बालक-बालिकाएँ दौड़ पड़े। सबका एक लक्ष्य - मैदान के छोर पर पहुँचकर पुनः वापस लौट आना। प्रथम तीन को पुरस्कार। इन तीन में से कम से कम एक स्थान प्राप्त करने की सारी भागदौड़। सभी बच्चों के मम्मी-पापा भी उपस्थित थे, तो उत्साह ज़रा ज्यादा ही था। मैदान के छोर पर पहुँचकर बच्चे जब वापसी के लिए दौड़े तो पालकों में “और तेज...और तेज…” का तेज स्वर उठा। प्रथम तीन बच्चों ने आनंद से अपने अपने माता-पिता की ओर हाथ लहराए। चौथे और पाँचवे स्थान पर रहने वाले अधिक परेशान थे। कुछ के तो माता-पिता भी नाराज़ दिख रहे थे। उनके भी बाद वाले बच्चे, ईनाम तो मिलना नहीं, यह सोचकर दौड़ना छोड़कर चलने भी लग गए थे। शीघ्र ही दौड़ खत्म हुई और 5वें नंबर पर आई वह छोटी-सी बच्ची नाराज़ चेहरा लिए अपने पापा की ओर दौड़ गयी। पापा ने आगे बढ़कर अपनी बेटी को गोद में उठा लिया और बोले, “वेल डन, बच्चा! वेल डन!! चलो चलकर कहीं आइसक्रीम खाते हैं। कौन-सी आइसक्रीम खाएगी हमारी बिटिया रानी?” “लेकिन पापा! मेरा नंबर कहाँ आया?”, बच्ची ने आश्...