मौत का भय
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मौत का भय Image by kkw0812 from Pixabay दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे थे। एक ने अपने मुंह में सांप को दबोच रखा था। दूसरा उल्लू एक चूहा पकड़ लाया था। दोनों वृक्ष पर पास-पास बैठे थे। सांप ने चूहे को देखा तो वह यह भूल ही गया कि वह उल्लू के मुंह में है और मौत के करीब है। चूहे को देख कर उसके मुँह में लार बहने लगी। चूहे ने जैसे ही सांप को देखा तो वह कांपने लगा, जबकि दोनों ही मौत के मुँह में बैठे हैं। दोनों उल्लू बहुत हैरान हुए। एक उल्लू ने दूसरे उल्लू से पूछा कि भाई! इसका कुछ राज समझे? दूसरे ने कहा - बिल्कुल समझ में आया। पहली बात तो यह है कि जिह्वा की इच्छा इतनी प्रबल है कि सामने मृत्यु खड़ी हो तो भी दिखाई नहीं पड़ती। दूसरी बात यह समझ में आयी कि मौत का भय मौत से भी बड़ा है। मौत सामने खड़ी है। उससे यह चूहा भयभीत नहीं है; लेकिन इस भय से भयभीत है कि कहीं सांप हमला न कर दे। शिक्षा - हम भी मौत से भयभीत नहीं हैं, जितना उसके भय से भयभीत हैं। ऐसे ही जिह्वा का स्वाद इतना प्रगाढ़ है कि मौत चौबीस घंटे सामने खड़ी है, फिर भी हमें दिखाई नहीं पड़ती है और हम अंधे होकर कुछ भी डकारते (खाते) रहत...