हमसे आगे हम

👼👼💧💧👼💧💧👼👼

हमसे आगे हम

Image by Albrecht Fietz from Pixabay

टीचर ने सीटी बजाई और स्कूल के मैदान पर 50 छोटे-छोटे बालक-बालिकाएँ दौड़ पड़े।

सबका एक लक्ष्य - मैदान के छोर पर पहुँचकर पुनः वापस लौट आना।

प्रथम तीन को पुरस्कार। इन तीन में से कम से कम एक स्थान प्राप्त करने की सारी भागदौड़।

सभी बच्चों के मम्मी-पापा भी उपस्थित थे, तो उत्साह ज़रा ज्यादा ही था।

मैदान के छोर पर पहुँचकर बच्चे जब वापसी के लिए दौड़े तो पालकों में “और तेज...और तेज…” का तेज स्वर उठा। प्रथम तीन बच्चों ने आनंद से अपने अपने माता-पिता की ओर हाथ लहराए।

चौथे और पाँचवे स्थान पर रहने वाले अधिक परेशान थे। कुछ के तो माता-पिता भी नाराज़ दिख रहे थे।

उनके भी बाद वाले बच्चे, ईनाम तो मिलना नहीं, यह सोचकर दौड़ना छोड़कर चलने भी लग गए थे।

शीघ्र ही दौड़ खत्म हुई और 5वें नंबर पर आई वह छोटी-सी बच्ची नाराज़ चेहरा लिए अपने पापा की ओर दौड़ गयी।

पापा ने आगे बढ़कर अपनी बेटी को गोद में उठा लिया और बोले, “वेल डन, बच्चा! वेल डन!! चलो चलकर कहीं आइसक्रीम खाते हैं। कौन-सी आइसक्रीम खाएगी हमारी बिटिया रानी?”

“लेकिन पापा! मेरा नंबर कहाँ आया?”, बच्ची ने आश्चर्य से पूछा।

“आया है बेटा। पहला नंबर आया है तुम्हारा।”

“ऐसे कैसे, पापा! मेरा तो 5वाँ नंबर आया है न!”, बच्ची बोली।

“अरे बेटा! तुम्हारे पीछे कितने बच्चे थे?”

थोड़ा जोड़-घटाकर वह बोली, “45 बच्चे।”

“इसका मतलब उन 45 बच्चों से आगे तुम पहले नंबर पर थी। इसीलिए तुम्हें आइसक्रीम का ईनाम।”

“और मेरे आगे आए 4 बच्चे?”, परेशान सी बच्ची बोली।

“इस बार उनसे हमारा कॉम्पिटिशन नहीं था।”

“क्यों?”

“क्योंकि उन्होंने अधिक तैयारी की हुई थी। अब हम भी फिर से बढ़िया प्रेक्टिस करेंगे। अगली बार तुम 49 बच्चों में फर्स्ट आओगी और फिर उसके बाद 50 में प्रथम रहोगी।”

“ऐसा हो सकता है, पापा?”

“हाँ बेटा! ऐसा ही होता है।”

“तब तो अगली बार मैं खूब तेज़ दौड़कर पहले स्थान पर आ जाऊँगी”, बच्ची बहुत उत्साह से बोली।

“इतनी जल्दी क्यों, बेटा? पैरों को मजबूत होने दो और हमें तो खुद से आगे निकलना है, दूसरों से नहीं।”

पापा का कहा बेटी को बहुत अच्छे से तो समझ नहीं आया लेकिन फिर भी वह बहुत विश्वास से बोली, “जैसा आप कहें, पापा!”

“अरे! अब आइसक्रीम तो बताओ, कौन-सी खानी है?”, पापा मुस्कुराते हुए बोले।

तब एक नए आनंद से भरी, 45 बच्चों में प्रथम के आत्मविश्वास से जगमग, पापा की गोद में शान से हँसती बेटी बोली, “मुझे बटरस्कॉच आइसक्रीम चाहिए।”

क्या अपने बच्चों के रिजल्ट के समय हम सभी माता-पिता का व्यवहार कुछ ऐसा ही नहीं होना चाहिए। विचार ज़रूर करें और सभी माता-पिता तक ज़रुर पहुँचायें।

--

 सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद।

Comments

Popular posts from this blog

बेटे व बेटी में अन्तर

बेटियां एक अहसास हैं

मित्र की परिभाषा

ज़िन्दगी का अर्थ

मुझे राम दे दो

माता-पिता

गीता सार

पतन से बचें

inferiority complex

क्षणिकाएँ