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Showing posts from February, 2026

Enjoy your work

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  काम का आनन्द लो, फल की चिन्ता न करो। Enjoy your work, don't worry about the fruits. जो काम तुम कर रहे हो उसमें आनन्द लेना सीखो, क्यांकि फल तुम्हारे हाथ में नहीं है और वह केवल भगवान के हाथ में है। तुम्हें अपनी ख़ुशी के लिए फल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। मान लो तुम कहते हो कि तुमने कठिन परिश्रम किया था, लेकिन फिर भी तुम्हें अब तक फल नहीं मिला। तुम अपना दिमाग़ इस विश्लेषण में क्यों लगाना चाहते हो? इसका विश्लेषण करना भगवान का काम है।  एक शहर में एक गरीब रिक्शा चालक था, रामू। उसका जीवन हर रोज़ कमाने और खाने में बीतता था। उसके पास न धन था, न सुविधाएँ, लेकिन उसका मन शांत रहता था। वह अपने काम को बोझ नहीं, बल्कि अपनी ज़िम्मेदारी समझता था। एक दिन, बहुत मेहनत के बाद, रामू ने पाँच रुपये बचाए। यह उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। उसने घर जाकर अपनी पत्नी को वे पैसे दिए और कहा, “यह हमारी मेहनत के बचे हुए पैसे हैं, इन्हें संभाल कर रखना, यह कभी काम आएँगे।“ उस दिन रामू के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह किसी अमीर के चेहरे पर भी मुश्किल से मिलती थी। उसी शहर में एक और व्यक्ति था, मोहन; जो एक बड़े दफ्तर में काम ...

मित्र की परिभाषा

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  मित्र की परिभाषा वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से                                                                                               जिसके साथ खून का रिश्ता नहीं,  फिर भी वह प्रिय लगे, वह है मित्र। जिस से दुनिया भर की बातें करके भी थकें नहीं, वह है मित्र। जिसके साथ छोटी-सी बात पर भी  खुल कर हंस लें, वह है मित्र। जिस के कंधे पर माथा रख कर खुल कर रो सकें, वह है मित्र। जिस के साथ ठण्डी चाय भी एकदम गर्म लगे, वह है मित्र। जिस के साथ खिचड़ी खाने में भी दावत जैसी महक आए, वह है मित्र। जिस को आधी रात को भी उठा कर दिल की बात कर सकें, वह है मित्र। जिस के साथ भूमिका बनाए बिना खुल कर बात कर सकें, वह है मित्र। एक अरसे के बाद भी जिस को मिलते ही दिल झूम उठे, वह है मित्र। मित्र वह है, जो हर मुसीबत में हर स...

nothing free of cost

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 दुनिया में कुछ भी मुफ़्त में नहीं मिलता। There is nothing free of cost  in this world. तुम्हें जो कुछ भी दुनिया में मिलता है उस प्रत्येक वस्तु के लिए कीमत चुकानी पड़ती है। दैवीय कानून के अर्न्तगत कुछ भी मुफ़्त नहीं कहा जा सकता। वे वस्तुएं जो स्पष्ट रूप से तुम्हें मुफ्त में मिली हुई दिखाई देती हैं, जैसे तुम्हारे पूर्वजों की जायदाद, लाटरी, यहां तक कि घूस से प्राप्त धन भी, तुम्हें इसके लिए किसी न किसी रूप में कीमत चुकानी पड़ेगी, यद्यपि तुम इसे सीधे तौर पर नहीं देख सकते। मुफ़्त का भार एक छोटे, शांत गाँव में रामू नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह ईमानदार था और अपनी सरल जीवन शैली से संतुष्ट था, लेकिन हमेशा एक बेहतर, आसान जीवन की कामना करता था। वह अक्सर सोचता, “काश, मुझे कुछ भी मुफ़्त में मिल जाए, तो जीवन कितना अच्छा हो!“  एक दिन, गाँव के बाहर जंगल से गुजरते हुए, उसे एक प्राचीन, चमचमाती बोतल मिली। उत्सुकतावश, उसने उसे खोला और एक पल में, एक शक्तिशाली जिन्न बाहर निकला। जिन्न ने कहा, “हे मानव! मैं तुम्हारी ईमानदारी से प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें एक विशेष वरदान देता हूँ। आज से तुम्हें...

There is nothing urgent in the world.

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  दुनिया में कुछ भी ‘अति आवश्यक’ नहीं है।  There is nothing urgent or indispensable in the world. कुछ लोग हमेशा विभिन्न कार्यों को पूरा करने के तनाव में रहते  हैं। वे हमेशा समय की कमी या समय पर काम को पूरा करने के दबाव में रहते हैं। उनके विचार में यदि कोई काम सीमित समय अवधि में समाप्त नहीं होगा, तो या तो ज़मीन गिर पड़ेगी या विश्व लड़खड़ा जायगा। कई प्रबंधक अपने मातहतों को प्रत्येक कार्य पर ‘अति आवश्यक’ का लेबल लगा कर काम के साथ-साथ अपने तनाव को भी आगे बढ़ा देते हैं और अपनी उत्तेजनाएं और बेचैनियां भी उन तक पहुंचा देते हैं जब कि कुछ कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध होता है । “दफ़्तर की दौड़” सुरेश एक मध्यमवर्गीय दफ़्तर में काम करता था, जहाँ हमेशा काम का अंबार लगा रहता। उसे अक्सर यह तनाव रहता कि समय पर काम कैसे पूरा होगा। हर सुबह वह नई ऊर्जा से आता, पर जल्द ही काम के बोझ तले दब जाता। एक दिन, उसकी दस साल की बेटी ने उससे पूछा, “पापा! आप हमेशा इतने परेशान क्यों रहते हो?” सुरेश ने कहा, “बेटी! काम बहुत है और समय कम। जल्दी ख़त्म करने का तनाव रहता है।” बेटी ने मासूमियत से जवा...

Always remain near to God.

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  हमेशा भगवान के समीप रहो Always remain near to God. जब तुम बात करते हो, खाते हो, चलते हो, सोते हो, यात्रा करते हो, तब भी भगवान की उपस्थिति को अपने निकट महसूस करो। भगवान को अपने हर काम में सम्मिलित करो। जब तक तुम अपना हाथ भगवान के हाथ में पकड़ाए रखोगे, तुम दुनिया में सभी कठिनाइयों से सुरक्षित रहोगे, जैसे ही तुम्हारा हाथ छूटेगा, तुम हर प्रकार के डर, चिन्ताओं, उत्सुकताओं, उत्तेजनाओं, अनिश्चितताओं, दुःखों, बेचैनियों, असफलताओं व निराशाओं से घिर जाओगे। एक चिड़िया जंगल में एक पेड़ पर रहती थी। जंगल बिलकुल सूखा हुआ था। न घास, न पेड़, न फूल, न फल। जिस वृक्ष पर चिड़िया रहती थी, उस पर भी सिर्फ सूखी टहनियाँ थीं। पत्ते भी नहीं थे। चिड़िया वहीं रह कर हर समय शंकर भगवान का जाप और गुणगान करती रहती थी। एक बार नारद जी जंगल में हो कर जा रहे थे। चिड़िया ने देख लिया। तुरंत आकर बोली - नारद जी! आप कहाँ जा रहे हैं? नारद ने कहा - शंकरजी के पास जा रहा हूँ।  चिड़िया ने कहा - भगवान शंकर मेरा बड़ा ध्यान रखते हैं। मेरे सूखे जंगल के बारे में उन्हें पता नहीं है शायद। कृपया उनसे कह दीजिएगा मेरे जंगल को हरा भरा कर दें। ...

Don’t linger things.

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   काम को टालने से बचो Don’t linger things.   काम को कल के लिए या भविष्य के लिए टाल देने की आदत से बचो। सफल व्यक्ति वे होते हैं, जो अपने स्थान से उठते हैं और उसी समय उचित कार्यवाही करते हैं।  एक गाँव में टालू राम नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसका नाम उसके स्वभाव पर बिल्कुल सटीक बैठता था। उसे कोई भी काम दिया जाता, वह उसे तुरंत करने की बजाय टाल देता। “अभी तो बहुत समय है,” “इसे कल कर लेंग,” या “थोड़ी देर आराम कर लूँ, फिर करूँगा” - ये उसके पसंदीदा बहाने थे। एक बार गाँव के मुखिया ने सभी निवासियों को आदेश दिया कि वे अपने घरों के सामने की नालियों की सफाई करें, क्योंकि बारिश का मौसम आने वाला था और पानी जमा होने से बीमारियाँ फैलने का खतरा था। मुखिया ने सभी को तीन दिन का समय दिया। गाँव के बाकी लोग तुरंत काम पर लग गए। उन्होंने पहले ही दिन अपनी-अपनी नालियाँ साफ कर लीं। लेकिन टालू राम ने सोचा, “अभी तीन दिन हैं, मैं आराम से कर लूँगा।” पहला दिन बीता। दूसरे दिन भी वह बैठा रहा। तीसरे दिन सुबह उसने सोचा कि दोपहर तक काम पूरा कर लेगा। लेकिन दोपहर होते-होते आसमान में काले बादल छा गए और मूसल...