Always remain near to God.

 हमेशा भगवान के समीप रहो
Always remain near to God.

जब तुम बात करते हो, खाते हो, चलते हो, सोते हो, यात्रा करते हो, तब भी भगवान की उपस्थिति को अपने निकट महसूस करो। भगवान को अपने हर काम में सम्मिलित करो। जब तक तुम अपना हाथ भगवान के हाथ में पकड़ाए रखोगे, तुम दुनिया में सभी कठिनाइयों से सुरक्षित रहोगे, जैसे ही तुम्हारा हाथ छूटेगा, तुम हर प्रकार के डर, चिन्ताओं, उत्सुकताओं, उत्तेजनाओं, अनिश्चितताओं, दुःखों, बेचैनियों, असफलताओं व निराशाओं से घिर जाओगे।

एक चिड़िया जंगल में एक पेड़ पर रहती थी। जंगल बिलकुल सूखा हुआ था। न घास, न पेड़, न फूल, न फल। जिस वृक्ष पर चिड़िया रहती थी, उस पर भी सिर्फ सूखी टहनियाँ थीं। पत्ते भी नहीं थे। चिड़िया वहीं रह कर हर समय शंकर भगवान का जाप और गुणगान करती रहती थी।

एक बार नारद जी जंगल में हो कर जा रहे थे। चिड़िया ने देख लिया। तुरंत आकर बोली - नारद जी! आप कहाँ जा रहे हैं? नारद ने कहा - शंकरजी के पास जा रहा हूँ। 

चिड़िया ने कहा - भगवान शंकर मेरा बड़ा ध्यान रखते हैं। मेरे सूखे जंगल के बारे में उन्हें पता नहीं है शायद। कृपया उनसे कह दीजिएगा मेरे जंगल को हरा भरा कर दें।

नारद जी ने शंकर जी के पास जाकर चिड़िया के जंगल की बात की, नारद के कई बार कहने पर शंकर जी ने कहा - मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता हूँ, नारद। चिड़िया के भाग्य में सात जन्म, ऐसे ही सूखे जंगल में रहना लिखा है। नारद कुछ नहीं बोले।

कुछ समय बाद नारद जी फिर वहाँ से निकले, तो देखा कि जंगल बिल्कुल बदला हुआ था। जंगल हरा-भरा, हरी घास, पेड़ों पर फूल, फल लदे हुये थे। चिड़िया का पेड़ भी फूलों और फलों से लदा था। चिड़िया प्रेममग्न होकर पेड़ पर नाच रही थी। नारद जी ने सोचा कि शंकर जी ने मुझ से झूठ क्यों बोला?

नारद जी ने शंकर जी से जंगल के हरे-भरे तथा चिड़िया के बारे में पूछा तो शंकरजी ने कहा कि मैंने चिड़िया को कभी कुछ नहीं दिया, फिर भी वह मेरा गुणगान करती रहती है। उसकी भक्ति, विश्वास और प्रेम की वजह से मुझे सातों जन्म काट कर सब चिड़िया को देना पड़ा। ऐसे दयालु हैं हमारे भोलेनाथ।

सीख

भक्ति में शक्ति होती है। अगर आप अपने आराध्य के प्रति समर्पित हैं, तो आपका कोई काम नहीं रुक सकता है। यहां तक कि भाग्य में ख़राब लिखा है, तो वह भी अच्छा हो जाएगा।

प्रस्तुतिः डॉ. आरके दीक्षित, सोरों

अपना हाथ भगवान के हाथ में देने का अर्थ है कि तुम हर समय मानसिक रूप से भगवान से संबंध बनाए रखो। धीरे-धीरे जब इन भावनाओं को तुम अधिक से अधिक पुष्ट करते जाओगे, एक अवस्था ऐसी आएगी, जब तुम भगवान के साथ इतनी गहराई से जुड़ जाओगे कि तुम भगवान को जानने लगोगे, तब तुम भगवान की तरह सोचने, बोलने और करने लगोगे। यह अकल्पनीय आनन्द और आशीर्वाद की अवस्था है। तुम्हें भगवान के सहयोग के बिना कोई भी काम करना असम्भव लगेगा। हर स्थान पर भगवान को ही पाओगे, अन्य किसी को नहीं। 

यदि किसी की सहायता की आवष्यकता हो, तो अन्तर्मन से भगवान पर ही निर्भर रहो, वही केवल वास्तविक और शाश्वत मदद कर सकता है। अपने आप को इस मदद के योग्य बनाने के लिए केवल इतना ही आवश्यक है कि तुम्हारे अन्दर भगवान से जुड़ने की मानसिक दृढ़ता होनी चाहिए और उसकी कृपा और सुरक्षा में पूर्ण विश्वास होना चाहिए। भगवान तुम्हारी सहायता के लिए कोई भी भौतिक माध्यम चुन सकते हैं। तुम्हें अपने रिश्तेदारों, पड़ोसी या मित्र के द्वारा दी गई मदद में केवल भगवान की प्रेरणा ही देखनी चाहिए। तुम्हें इस संसार में कभी अपने आप को अकेला महसूस नहीं करना चाहिए। तुम्हारी अपनी आत्मा की और तुम्हारे परमपिता भगवान की असीमित शक्ति तुम्हारे पास है।

 द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

Comments

  1. अंतिम सहारा तो भगवान ही है अति उतम

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