There is nothing urgent in the world.

 दुनिया में कुछ भी ‘अति आवश्यक’ नहीं है। 
There is nothing urgent or indispensable in the world.

कुछ लोग हमेशा विभिन्न कार्यों को पूरा करने के तनाव में रहते हैं। वे हमेशा समय की कमी या समय पर काम को पूरा करने के दबाव में रहते हैं। उनके विचार में यदि कोई काम सीमित समय अवधि में समाप्त नहीं होगा, तो या तो ज़मीन गिर पड़ेगी या विश्व लड़खड़ा जायगा। कई प्रबंधक अपने मातहतों को प्रत्येक कार्य पर ‘अति आवश्यक’ का लेबल लगा कर काम के साथ-साथ अपने तनाव को भी आगे बढ़ा देते हैं और अपनी उत्तेजनाएं और बेचैनियां भी उन तक पहुंचा देते हैं जब कि कुछ कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध होता है ।

“दफ़्तर की दौड़”

सुरेश एक मध्यमवर्गीय दफ़्तर में काम करता था, जहाँ हमेशा काम का अंबार लगा रहता। उसे अक्सर यह तनाव रहता कि समय पर काम कैसे पूरा होगा। हर सुबह वह नई ऊर्जा से आता, पर जल्द ही काम के बोझ तले दब जाता।

एक दिन, उसकी दस साल की बेटी ने उससे पूछा, “पापा! आप हमेशा इतने परेशान क्यों रहते हो?”

सुरेश ने कहा, “बेटी! काम बहुत है और समय कम। जल्दी ख़त्म करने का तनाव रहता है।”

बेटी ने मासूमियत से जवाब दिया, “पर पापा! अगर आप हर काम को आराम से और ध्यान से करेंगे, तो वह जल्दी और सही तरीक़े से ख़त्म होगा। जब आप तनाव में होते हैं, तो ग़लतियाँ करते हैं और फिर उन्हें सुधारने में और ज़्यादा समय लगता है।”

बेटी के इन शब्दों ने सुरेश को अंदर तक छू लिया। अगले दिन उसने अपनी सोच बदली। उसने तनाव लेने के बजाय, एक समय-सारिणी (ेबीमकनसम) बनाई, छोटे लक्ष्य निर्धारित किए, और एक-एक करके काम पूरे करने लगा।

धीरे-धीरे उसका तनाव कम हो गया, काम भी समय पर पूरे होने लगे, और उसकी उत्पादकता (चतवकनबजपअपजल) भी बढ़ गई। उसने महसूस किया कि जल्दी काम ख़त्म करने का तनाव वास्तव में काम को धीमा कर देता है, जबकि शांत मन और व्यवस्थित तरीक़ा ही सफ़लता की कुंजी है

वे कुछ तो महसूस करें कि इस दुनिया में कुछ भी अति आवश्यक

नहीं है। संसार के कामों को प्रभावित किए बिना भी कुछ समय

तक प्रतीक्षा की जा सकती है। वास्तव में हम दुनिया पर निर्भर हैं, न कि दुनिया हम पर। इस काम के बिना भी दुनिया ख़ुशी से चल रही थी और लगातार चलती रहेगी, चाहे यह काम देर से हो या तुरन्त हो।

अतः तुम अपने सुधार और प्रशिक्षण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कार्य करो, पर विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए कोई दहशत

या बेचैनी की भावना नहीं होनी चाहिए। याद रखो कि हमारी दहशत, योजनाओं, प्रबंधों, संसाधनों, प्रवीणताओं और सावधानियों के बाद भी इस के लिए हम पूर्णतया आश्वस्त नहीं हैं कि हम अपने इच्छित समय में अपना कार्य पूरा कर सकते हैं, जो हम करना चाहते हैं। संसार की प्रकृति में कई अनिश्चितताएं व बाधाएं भी काम में देरी का कारण हो सकती हैं। अतः तुम अपने वास्तविक प्रयत्न करो और बाकी सब कुछ भगवान पर छोड़ दो।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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