nothing free of cost
दुनिया में कुछ भी मुफ़्त में नहीं मिलता।There is nothing free of cost in this world.
तुम्हें जो कुछ भी दुनिया में मिलता है उस प्रत्येक वस्तु के लिए कीमत चुकानी पड़ती है। दैवीय कानून के अर्न्तगत कुछ भी मुफ़्त नहीं कहा जा सकता। वे वस्तुएं जो स्पष्ट रूप से तुम्हें मुफ्त में मिली हुई दिखाई देती हैं, जैसे तुम्हारे पूर्वजों की जायदाद, लाटरी, यहां तक कि घूस से प्राप्त धन भी, तुम्हें इसके लिए किसी न किसी रूप में कीमत चुकानी पड़ेगी, यद्यपि तुम इसे सीधे तौर पर नहीं देख सकते।
मुफ़्त का भार
एक छोटे, शांत गाँव में रामू नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह ईमानदार था और अपनी सरल जीवन शैली से संतुष्ट था, लेकिन हमेशा एक बेहतर, आसान जीवन की कामना करता था। वह अक्सर सोचता, “काश, मुझे कुछ भी मुफ़्त में मिल जाए, तो जीवन कितना अच्छा हो!“
एक दिन, गाँव के बाहर जंगल से गुजरते हुए, उसे एक प्राचीन, चमचमाती बोतल मिली। उत्सुकतावश, उसने उसे खोला और एक पल में, एक शक्तिशाली जिन्न बाहर निकला। जिन्न ने कहा, “हे मानव! मैं तुम्हारी ईमानदारी से प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें एक विशेष वरदान देता हूँ। आज से तुम्हें जो भी चाहिए, वह मुफ़्त में तुम्हारे पास आ जाएगा, लेकिन एक शर्त हैः हर मुफ़्त चीज़ के साथ एक अदृश्य कीमत जुड़ी होगी, जिसका भुगतान तुम्हें बाद में करना होगा।“
रामू बहुत खुश हुआ। उसने तुरंत एक आलीशान घर मांगा। अगले ही पल, घर उसके सामने खड़ा था। वह अंदर गया, लेकिन जल्द ही उसे पता चला कि उस घर के रखरखाव और भारी संपत्ति कर (property tax) का बोझ असहनीय था। वह हमेशा चिंतित रहने लगा।
उसने फिर बहुत सारा सोना मांगा। सोना आ गया, लेकिन उसके पुराने दोस्त और पड़ोसी उससे ईर्ष्या करने लगे। लोग उससे दूर हो गए, और वह अकेला पड़ गया। उसे अपने सोने की रक्षा के लिए हर समय पहरेदार रखने पड़े, जिससे उसकी शांति छिन गई।
हताश होकर, उसने स्वास्थ्य मांगा ताकि वह अपनी परेशानियों को भूल सके। उसका स्वास्थ्य अच्छा हो गया, लेकिन अब उसके पास इतना समय और ऊर्जा थी कि वह अपने जीवन के खालीपन और अकेलेपन पर और भी ज्यादा सोचने लगा।
आखिरकार, रामू ने महसूस किया कि हर "मुफ़्त" चीज़ ने वास्तव में उससे कुछ और छीन लिया थाः उसका सुकून, उसके दोस्त और उसकी मानसिक शांति। उसे एहसास हुआ कि दुनिया में सचमुच कुछ भी मुफ़्त नहीं मिलता। हर प्राप्ति के लिए किसी न किसी रूप में मूल्य चुकाना पड़ता है, चाहे वह पैसा हो, समय हो, प्रयास हो, या मानसिक शांति हो।
उसने जिन्न से विनती की कि वह अपना वरदान वापस ले ले और उसे उसका पुराना, सरल जीवन लौटा दे। जिन्न मान गया। वरदान खत्म होते ही, रामू ने एक लंबी साँस ली और राहत महसूस की। उसने अपनी बाकी जिंदगी मेहनत और संतोष के साथ बिताई और कभी भी मुफ़्त के लालच में नहीं पड़ा।
इसका निष्कर्ष यह निकला कि किसी जायदाद या धन को अनुचित साधनों से पाने या छीनने की सोचना भी मत। वह तुम्हारे पास टिक नहीं पाएगा और किसी न किसी रूप में चला ही जाएगा। आख़िर में वही तुम्हारे साथ रहेगा जो तुम्हारी समर्थता और विशेषता के नैतिक गुणों के कारण तुम्हें मिला है। इसलिए लालच को पूरी तरह छोड़ दो।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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