Let power come to you

 काम को पूरा करने की शक्ति को अपने आप तुम्हारे पास
आने दो। 
 Let power come to you on its own.

बहुत से लोग, यद्यपि उनमें पर्याप्त शक्ति होती है, फिर भी अपने जीवन में उचित रूप से कोई कार्य आरम्भ नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें शिकायत रहती है कि उन्हें ऐसे कामों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक शक्ति, अवसर, संसाधन और सुविधाएं प्राप्त नहीं हैं।

इस संबंध में कृपया याद रखें कि महानता प्राप्त करने के लिए, कोई भी यह कहता हुआ अपने हाथ जोड़ कर तुम्हारे पास नहीं आएगा कि श्रीमान् जी, महान बनने के लिए जिन चीज़ों की तुम्हें आवश्यकता है, वे ये रहीं। इसलिए कृपया इन्हें स्वीकार करो।

वास्तव में विधि इससे विपरीत है। जैसे ही तुम अपनी महानता दिखाते हो या सिद्ध करते हो, एक जादुई दैविक विधि से सभी आवष्यक वस्तुएं अपने आप ही तुम्हारी ओर आने लगती हैं और तुम अपने ज्ञान के बल पर अपना लक्ष्य सिद्ध कर लेते हो। इसलिए कहा गया है ‘तुम काम प्रारम्भ करो, तुम्हें शक्ति स्वयमेव प्राप्त हो जाएगी।’

स्वयं का विश्वास (लघुकथा)

एक शहर में आर्यन नाम का एक युवा कलाकार रहता था। वह चित्रकारी में बहुत निपुण था, लेकिन उसे हमेशा लगता था कि उसका काम अधूरा है। एक दिन उसे एक बहुत बड़ी प्रदर्शनी (मÛीपइपजपवद) के लिए अपनी सबसे बेहतरीन पेंटिंग बनानी थी।

आर्यन ने पेंटिंग शुरू की, लेकिन उसे लगा कि पर्याप्त शक्ति और प्रेरणा उसके पास नहीं है। वह परेशान होकर ब्रश छोड़कर बैठ गया। उसने अपने गुरु से मदद मांगी, “गुरुजी, मैं इतनी बड़ी पेंटिंग कैसे पूरी करूँगा? मेरे पास वह ’जादुई शक्ति’ या प्रेरणा नहीं आ रही है, जो काम पूरा करने के लिए ज़रूरी है।”

गुरुजी मुस्कुराए और बोले, “आर्यन, काम करने की शक्ति बाहर से नहीं, तुम्हारे अंदर से आती है। तुम उसे पकड़ने की कोशिश मत करो। बस काम शुरू करो, और काम को पूरा करने की शक्ति अपने आप तुम्हारे पास आने दो (स्मज जीम चवूमत जव बवउचसमजम जीम ूवता बवउम जव लवन दंजनतंससल).” 

गुरुजी ने आगे समझाया, “जैसे नदी को यह नहीं सोचना पड़ता कि समुद्र तक कैसे पहुँचना है, वह बस बहती रहती है, वैसे ही तुम बस चित्रकारी के प्रवाह में खो जाओ।”

आर्यन ने गुरुजी की बात मानी। उसने सोचना बंद कर दिया कि परिणाम क्या होगा। उसने बस ब्रश उठा लिया। पहले दिन कुछ खास नहीं बना, दूसरे दिन भी नहीं। लेकिन तीसरे दिन, जैसे ही उसने रंगों के साथ बहना शुरू किया, उसे लगा कि उसके हाथों में एक अलग ही ऊर्जा आ गई है। काम पूरा करने का दबाव हटते ही, रचनात्मकता अपने आप आ गई।

उसने पेंटिंग पूरी की और प्रदर्शनी में उसकी पेंटिंग सबसे अव्वल रही।

सीखः

जब हम किसी काम को करने के लिए अत्यधिक दबाव लेते हैं, तो हम अपनी ही क्षमता को रोक देते हैं। काम को पूर्णता की ओर ले जाने की शक्ति (जीम चवूमत जव बवउचसमजम) तभी आती है, जब हम काम का आनंद लेने लगते हैं और उसे सहज प्रवाह में होने देते हैं। काम शुरू करना ही, उसे पूरा करने की आधी शक्ति है।

इसलिए आसान विधि यह है कि यदि तुम वास्तव में कोई महान काम करना चाहते हो तो अपने सीमित साधनों, शि७ व ज्ञान के बल पर, जो भी तुम्हारे पास है, कार्य आरम्भ कर दो। तुम पाओगे कि जैसे ही तुम आगे बढ़ते हो, तो जिन चीज़ों की तुम्हें आवश्यकता है, वे आवश्यक चीज़ें अपने आप ही धीरे-धीरे तुम्हारी ओर आने लगेंगी। ठीक ही कहा गया है कि महानता हमेशा अपने प्रयत्नों से प्राप्त की जाती है। यह शायद ही किसी अन्य के द्वारा उपहार में दी जाती है।

यह एक दैवीय नियम भी है कि तुम ताकत, नाम, यश, पदवी की ओर जितना दौड़ोगे, उतना ही वे तुमसे दूर भागेंगी। जितना तुम उन से दूर भागोगे, उतना ही वे तुम्हारी ओर प्रार्थना करती हुई दौड़ेंगी, ताकि तुम उन्हें स्वीकार कर लो।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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