माँ की ममता
माँ की ममता (24.8.2013)
सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा
धुन- चांदी की दीवार न तोड़ी............
माँ ने पीड़ा बहुत सही, तब तूने जीवन पाया है,
पर तूने इस जीवन में, माँ को क्या सुख पहुँचाया है।
माँ ने....
जब तू घुटनों के बल रेंगा, माँ ने तुझको खड़ा किया,
और पिता ने प्यार से तुझको, पाल-पोस कर बड़ा किया।
लोरी सुना-सुना कर तुझको, मीठी नीद सुलाया है।
माँ ने.......
तेरी एक कराह को सुनकर, माँ ने अश्रु बहाए हैं,
तेरी इक मुस्कान पे माँ ने, लाखों मोती लुटाए हैं।
तूने मीठी बातों से, माँ बाप का मन बहलाया है।
माँ ने.......
जब तू पढ़ने जाता था तब, माँ ही तुझे जगाती थी,
‘राजा बेटा’ कह कर तुझको, सारे पाठ पढ़ाती थी।
सिखा-सिखा अच्छी बातें, जीवन का मार्ग दिखाया है।
माँ ने..
जब तक तू पढ़कर न आता, राह देखती रहती थी,
मेरा बेटा रहे सलामत, यही दुआएं करती थी।
घड़ी-घड़ी वह घड़ी को देखे, ज्यों-त्यों समय बिताया है।
माँ ने.......
जीवन में तू सफल बने, बस यही कामना करती थी,
दुःख तो तेरे पास न फटके, सारे गम खुद सहती थी।
‘मेरा नाम करेगा रोशन’, गीत उसी ने गाया है।
माँ ने.......
सीधी, सच्ची, भोली माँ, जिसके दिल में भगवान बसा,
तुझे देखना हो ‘रब’ को, वह तो माँ के मन में झलका।
मातृ-चरण में शीश झुका, समझो भगवान को पाया है।
माँ ने.......
अब.... अब माँ की नज़र हुई बूढ़ी, ड्योढ़ी में बैठी रहती है,
कब आएगा मेरा बेटा, बस यही ताकती रहती है।
पर.... बेटे ने माँ को भार समझ, इक ठोकर से ठुकराया है। माँ ने.......
तू ‘अच्छा बेटा’ बन जाए, तभी नेक इंसान बनेगा,
तेरा ‘बेटा’ नाम सार्थक, तेरे लिए वरदान बनेगा।
हर पल याद करो माँ को, जिसने जीना सिखलाया है।
माँ ने.......
मीठे बोल न बोल सको तो, कड़वी बातें मत बोलो,
मौन रहो और मन ही मन में, माँ की बातों को तोलो।
चला-चली की बेला है, क्यों समय को व्यर्थ गंवाया है।
माँ ने पीड़ा बहुत सही, तब तूने जीवन पाया है,
अब तूने सेवा करके, माँ को कुछ सुख पहुँचाया है।
माँ ने........
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद।

Comments
Post a Comment