जीवन संगिनी की मधुर स्मृति में स्मरणांजलि
स्वर्गीय श्रीमती सावित्री देवी की मधुर स्मृति में स्मरणांजलि
जीवन संगिनी की मधुर स्मृति मेरे जीवन में
जन्म - 10 मार्च 1948
मेरे जीवन में आगमन - 14 जून 1970, निर्गमन - 19 अगस्त 2022
सावित्री देवी :- शत शत नमन व श्रद्धांजलि अर्पण
स- सत्य, सनातन, सात्विक, सादगी की मूरत थी।
आ- आत्मिक, आध्यात्मिक, अर्धागिंनी, अनुकरणीय थी।
व- विश्वास, विवेकी, वैचारिक, व्यावहारिक थी।
इ- इष्ट, ईशान, इमत्याहन, इलाज, ईमान थी।
त- त्यागी, तपस्वी, त्रिगुणी, तरुणाईरूप थी।
र- ऋद्धि, सिद्धि, ऋचा, रूह, रिहान थी।
ई- इष्ट, निष्ठ, ईमानदार, जीवन का ईनाम थी।
द- दयालु, दुआ, दर्द की दवा, दानशील थी।
ए- एकान्त, एकाग्र, ऐश्वर्य, इन्सान एक ही थी।
व- वीणा वादिनी, वर्ण, वास्तविक पहचान थी।
ई- ईश्वरीय पथगामिनी, ईश्वरीय इशारा, ईमानदार थी।
14 जून 1970 से पहले ज़िन्दगी ख्वाब थी,
अगस्त 1922 तक ज़िन्दगी गुले गुलज़ार थी,
52 वर्षों में ख़ुशियां भी थी, गम भी थे,
पतझड़ भी थी, वसन्त भी थे,
संघर्ष भी था, उत्कर्ष भी था,
रोए भी थे, हंसे भी थे,
रूठे भी थे, मने भी थे,
जीवन कमाल, बेमिसाल था,
परिवार के उत्थान में सेवा, सहयोग बेमिसाल था,
मैं तो फिर भी अहंकारी था, पर तेरा दिल विशाल था,
इच्छाओं, उम्मीदों पर ज़रूरत से ज़्यादा नियन्त्रण था,
राग-द्वेष, मान-सम्मान, तेरी-मेरी पर संयम था,
प्यार-दुलार, गमखार, वफादार, दुआ, दवा थी,
सच कहूँ तो मेरी ज़िन्दगी की संजीवनी थी।
अब अकेला पड़ गया हूँ.........
लगता है जीवन अज़ाब है,
फिर भी उड़ रहा हूँ ...........
क्योंकि मेरी मीठी यादों का तू एक जहाज़ है।
ऐसी पुण्य-पुनीत दिव्यात्मा को शत् शत् नमन!!
मेरी शब्दांजलि अर्पण है।
💗💗💗
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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