Don’t advertise your problems

 अपनी कठिनाइयों या समस्याओं का दूसरों के सामने विज्ञापन न करें। 
Don’t  advertise your problems or difficulties to others.

कुछ लोगों की आदत होती है, अपनी कठिनाइयों या समस्याओं को यहां वहां और हर किसी को बताने की, जिससे वे मिलते हैं। जब तुम्हें वास्तव में किसी की मदद की आवश्यकता हो, तब उसके सिवाय अपनी कठिनाइयों या समस्याओं का दूसरों के सामने विज्ञापन न करो। इनको अपने तक ही रखो तथा साथ-साथ उनके निराकरण के लिए प्रयत्न करते रहो। एक साधारण मानवीय मनोविज्ञान के स्वभाव के अनुसार किसी को तुम्हारी समस्याओं में रुचि नहीं होती। उसे केवल अपनी समस्याओं में ही रुचि होती है।

यहाँ एक लघु कथा है, जो इस विषय पर आधारित है कि हमें दूसरों को अपनी समस्याएँ क्यों नहीं बतानी चाहिएः

लघु कथाः अपना बोझ स्वयं उठाएं 

एक गाँव में मोहन नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही मेहनती था, लेकिन अपनी आर्थिक परेशानियों को लेकर हमेशा चिंतित रहता था। वह अक्सर गाँव के लोगों और अपने दोस्तों से अपनी समस्याओं का जिक्र करता रहता था। कोई उसे ‘हौसला’ देता, तो कोई ‘सलाह’, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। 

एक दिन, गाँव में एक ज्ञानी साधु आए। मोहन ने जाकर साधु से अपनी गरीबी का रोना रोया। साधु ने शांत मन से मोहन की पूरी बात सुनी और मुस्कुराए।

साधु ने मोहन से कहा, “तुम जो अपना यह समस्या रूपी बोझ दूसरों को बताते हो, वे इसे हल नहीं करते। 20% लोगों को तुम्हारी समस्याओं में कोई रुचि नहीं है, और 80% लोग यह जानकर खुश होते हैं कि तुम परेशान हो। तुम्हारी असली मदद केवल तुम खुद कर सकते हो।” 

साधु ने उसे सलाह दी, “अपनी समस्याओं को अपने तक ही रखो और उसे हल करने की ऊर्जा में बदलो। दूसरों को अपनी कमजोरी का पता न चलने दो, क्योंकि जो लोग आज सांत्वना दे रहे हैं, वे ही कल इसका मजाक बना सकते हैं।” 

मोहन को बात समझ आ गई। उसने दूसरों के सामने रोना बंद कर दिया और अपनी पूरी मेहनत अपने काम में लगा दी। कुछ ही समय में, अपनी कड़ी मेहनत के दम पर, उसने अपनी आर्थिक समस्याएं हल कर लीं। 

सीखः

अपनी समस्याओं का बखान दूसरों के सामने न करें, क्योंकि लोग आपकी परेशानी कम नहीं करते, बल्कि आपकी कमजोरी जानकर आपका फायदा उठा सकते हैं या मजाक उड़ा सकते हैं। अपनी समस्या का समाधान खुद ढूँढें।

तुम्हारी समस्याओं के भाषण से या तो वह ऊब जाएगा या तुम्हारी समस्याओं को देखकर सन्तुष्टि या क्षणिक आनन्द का अनुभव करेगा।

इससे केवल हमारी संकुचित मानसिकता और अपरिपक्वता ही दिखाई देगी। हम दूसरों पर अपनी समस्याओं का जाल फैलाते रहते हैं, जब कि इससे पता चलता है कि हम सांसारिक समस्याओं को बहुत गंभीरता से लेते हैं जो वास्तव में बेहद सामान्य और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का प्रत्यक्ष दर्शन है। निश्चय ही यदि तुम समस्या का समामान चाहते हो तो अपनी समस्या को सुलझाने के लिए एक व्यक्ति से सलाह ले सकते हो जिसे तुम सोचते हो कि वह अधिक परिपक्व है, ज्ञानी है और इस क्षेत्र में तुम से अधिक अनुभवी है।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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