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मेरे पति मेरे देवता (भाग - 18)

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मेरे पति मेरे देवता (भाग - 18 ) श्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं श्रीमती ललिता शास्त्री की ज़ुबानी प्रस्तुतकर्ता - श्री उमाशंकर (जून, 1967 ) शास्त्री जी की पड़ोसिन 6-7 महीने बाद शास्त्री जी जेल से छूट कर आए थे। कुछ दिनों तक रामनगर में रहने के बाद इलाहाबाद के बहादुरगंज मोहल्ले में मकान लिया गया और हम लोग वहाँ आ गए। एक दिन रामनगर में दोपहर के समय तौलिया सिर पर रखे शास्त्री जी नहाने जा रहे थे। वहीं पास में चारपाई पर लेटी हुई कुसुम हाथ-पैर चला रही थी। शास्त्री जी चारपाई पर बैठ गए और उसे प्यार करने लगे। अम्मा जी किसी काम से पड़ोस में गई थी। इसलिए उन्हें वह अवसर मिल गया था। वरना उनके सामने प्यार करना तो दूर, उसकी ओर वे देखते भी नहीं थे। संयोग की बात, इसी बीच अम्माजी आ गई। शास्त्री जी बड़ी दुविधा में पड़ गए और कुछ लजाए भी। फिर भी सफ़ाई तो देनी ही थी। बोले - ‘क्या बताएं अम्मा! छोटे-छोटे बच्चों को देख कर खिलाने की तबियत होने लगती है।’ ‘तो खिलाते क्यों नहीं बचवा! लड़कों को अपने बच्चों को खिलाना ही चाहिए।’ उनके कहने से उस दिन के बाद से शास्त्री जी सब...

मेरे पति मेरे देवता (भाग - 17)

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मेरे पति मेरे देवता (भाग - 17 ) श्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं श्रीमती ललिता शास्त्री की ज़ुबानी प्रस्तुतकर्ता - श्री उमाशंकर (जून, 1967 ) सत्याग्रह में भाग लेना शास्त्री जी बहुत चाहते थे कि हम सत्याग्रहों में भी भाग लिया करें, पर अम्माजी के कारण ऐसा नहीं हो पाता था। उन्हें यह सब पसन्द नहीं था। उन्हीं दिनों गांधी जी ने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार का आन्दोलन चलाया और शहर में जगह-जगह दुकानों पर पिकेटिंग होने लगी। एक दिन कमला जी (श्रीमती कमला नेहरू) ने शास्त्री जी से पूछा - ‘आप अपनी श्रीमती जी को क्यों नहीं निकालते ? ’ ‘उन्हें तो आप निकालेंगी, तभी वे निकल पाएंगी। हम से मुश्किल है।’ शास्त्री जी ने जानबूझकर ऐसा उत्तर दिया था क्योंकि वे समझते थे कि कमला जी के आने पर अम्माजी हमें भेजने से इंकार नहीं कर सकती थी और यही हुआ भी। एक दिन एक्का पर बैठ कर कमला जी आई। बड़ी सरल और सीधी थी वे। हम से बातचीत के बाद अम्माजी से हमें पिकेटिंग में भेजने के लिए कहा। अम्माजी उनकी बातों का ‘नाही’ न कर सकी। दूसरे दिन हमारी तैयारी हो गई। जाने से पहले हमने शास्त्री जी स...

मेरे पति मेरे देवता (भाग - 16)

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मेरे पति मेरे देवता (भाग - 16 ) श्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं श्रीमती ललिता शास्त्री की ज़ुबानी प्रस्तुतकर्ता - श्री उमाशंकर (जून, 1967 ) फालसे कहाँ गए फलों में आम और फालसे शास्त्री जी को बहुत पसंद थे। जब तक फालसे का मौसम रहता, वे रोज़ पैसे-दो पैसे के फालसे ले आते। कुछ तो यों ही खाते और कुछ का रस पीते। एक दिन दोपहर में कुछ अधिक फालसे ले आए। उन दिनों घर में हम अकेली थी। अम्माजी रामनगर चली गई थी। तब कुसुम पेट में थी। फालसे वाला दोना हम चटाई के पास रख कर हम सो गई। शास्त्री जी दूसरे कमरे में सो रहे थे। जागने पर जब हमारी नज़र फालसे की तरफ़ गई तो वहाँ दोने में 2-4 दानों के सिवा और कुछ नहीं था। हम धक से रह गई। क्योंकि हमारे और शास्त्री जी के सिवाय घर में तीसरा था ही नहीं, फिर फालसे गए कहाँ ? कहीं शास्त्री जी कुछ और न समझ बैठें। यह चिन्ता हमारी इतनी बढ़ी कि हमारी रुलाई छूट पड़ी। हम सिसकते हुए शास्त्री जी के कमरे में गई और बार-बार यही कहती रही कि ‘हम कसम से कहती हैं, हमने फालसे नहीं खाए हैं।’ पहले तो शास्त्री जी कुछ समझ न सके, लेकिन बाद में जब ...

मेरे पति मेरे देवता (भाग - 15)

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मेरे पति मेरे देवता (भाग - 15 ) श्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं श्रीमती ललिता शास्त्री की ज़ुबानी प्रस्तुतकर्ता - श्री उमाशंकर (जून, 1967 ) कान पकड़ कर वायदा शास्त्री जी के जेल जाने से पहले की दो-तीन घटनाएं हम बताना भूल गई। लीडर रोड के मकान में आने के कुछ ही दिनों बाद हमारे सामने एक बड़ी विचित्र समस्या आ खड़ी हुई। शोलापुर में कांग्रेस से सम्बन्धित कोई काण्ड हो गया। क्या हो गया था, यह मुझे याद नहीं है। उस काण्ड के कारण मार्शल-ला लग गया था, लेकिन फिर भी देश के कोने-कोने से कांग्रेस के वालेंटियर वहाँ जा रहे थे और गोलियों का शिकार हो रहे थे। शास्त्री जी ने भी अपना नाम वहाँ भेज दिया था। जब टंडन जी (राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन) को यह बात मालूम हुई, तब उन्होंने शास्त्री जी को हर तरह से समझाते हुए न जाने की सलाह दी, पर शास्त्री जी अपनी बात पर अडिग रहे। टंडन जी को बड़ी चिन्ता हुई। और कोई उपाय न देखकर उन्होंने हमारे पास कहला भेजा कि हम अम्माजी से कह कर उन्हें रोकने का यत्न करें। हमारी आधी जान तो वहाँ जाने की ख़बर सुनकर ही सूख गई। हमने तुरन्त अम्माजी ...

मेरे पति मेरे देवता (भाग - 14)

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मेरे पति मेरे देवता (भाग - 14 ) श्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं श्रीमती ललिता शास्त्री की ज़ुबानी प्रस्तुतकर्ता - श्री उमाशंकर (जून, 1967 ) हंसते-हंसते जेल-यात्रा कोतवाली के बाद शास्त्री जी मिलाका जेल भेज दिए गए। कुछ दिनों के बाद मिलाई (मिलने की) की दरख़्वास्त दी गई। दरख़्वास्त मंजूर हो गई। मिलाई के दिन दोनों बीबी, अम्माजी और हम मिलने गई। फाटक के अन्दर जेलर साहब वाले कमरे में शास्त्री जी आए। अम्माजी के कारण न वे हमसे कुछ कह सकते थे और न हम उनसे कुछ कह सकती थी। बस! देखने का सुख था। वह भी बहुत आज़ादी के साथ नहीं। अम्माजी और बहिनों के साथ उनकी बातचीत होती रही। 20 मिनट मिलाई का समय होता था। वह पूरा हो जाने पर एक सिपाही उन्हें अन्दर ले जाने के लिए आया और साथ ही हम लोगों को बाहर निकलने का भी संकेत दिया। सब लोग उठने लगे तो शास्त्री जी हमारी ओर इशारा करके सिपाही से बोले - हम एक सैकिंड के लिए उन्हें रोक रहे हैं। हम रुक गई। सब कमरे के बाहर चले गए। शास्त्री जी ने हमारी पीठ थपथपा कर कहा - ‘अलग रहने से मुहब्बत बढ़ती है। मुझे यहाँ कोई कष्ट नहीं है। तुम...

मेरे पति मेरे देवता (भाग - 13)

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मेरे पति मेरे देवता (भाग - 13 ) श्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं श्रीमती ललिता शास्त्री की ज़ुबानी प्रस्तुतकर्ता - श्री उमाशंकर (जून, 1967 ) हंसते-हंसते जेल-यात्रा रात के लगभग 9 बजे अम्माजी आई। हमने शास्त्री जी की गिरफ्तारी का हाल बताया। अम्माजी को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने पूछा - ‘तुमने बचवा को ठीक से पहचाना था ? ’ ‘हाँ, वे टोपी लगाए लॉरी के बिल्कुल किनारे बैठे थे और इधर मकान की तरफ़ देख रहे थे।’ हमने शास्त्री जी के हाथ हिलाने वाली बात छिपा ली। वह कुछ छिपाने जैसी ही बात थी। ‘टोपी तो सभी लगाते हैं। वह बचवा नहीं, कोई और होगा। तुम पहचान नहीं पाई हो। चला! सब लोग खाना-वाना खाओ।’ एक तो तबियत ख़राब, दूसरे दिल में हौल, खाना कहाँ खाया जा सकता था ? फिर भी अम्माजी को दिखाने के लिए हम 2-4 कौर खा कर उठ पड़ी। अम्माजी सोते समय रामायण सुनती थी, इसलिए रामायण लेकर उनकी खटिया के पास बैठ गई और सुन्दर-काण्ड सुनाने लगी। थोड़ी देर बाद अम्माजी सो गई। हम रामायण पढ़ती रही। चूल्हे की आग को अभी बुझाया नहीं था। हो सकता था, शास्त्री जी रात में आ जाते। ऐसा विश्वास अ...