Habits व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं
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दुःख को सुख में बदलने की कला
Habits व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं
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हम जीवन में दिनभर जो प्रवृत्तियाँ करते हैं, वे ही धीरे-धीरे हमारी Habits बन जाती हैं। आदतें अच्छी हों या बुरी, उनका हमारे भविष्य के निर्माण में बहुत बड़ा हाथ है। कुछ Habits परिस्थितिवश हमारी दिनचर्या में शामिल हो जाती हैं और कुछ चाहे-अनचाहे हमारे चरित्र का अंग बन जाती हैं।
अच्छी आदतें हमें आसमान की ऊँचाइयों तक पहुँचा सकती हैं और बुरी आदतें पड़ जाएं तो हमें रसातल में धकेल देती हैं। अपना अन्तः विश्लेषण करो और अपनी आदतों की पड़ताल करो। दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसमें कोई न कोई अच्छी या बुरी आदतें न हों। अच्छी आदतें हैं तो उनकी सुरक्षा करो और बुरी आदतें दिखाई दें तो उन्हें अपने जीवन से बाहर निकालो। एक बार उसने तुम्हारे मन में जड़ जमा ली तो तुम चाह कर भी उनसे छुटकारा नहीं पा सकोगे।
प्रायः जीवन में चार प्रकार की आदतें होती हैं, जिनमें से हमें अच्छी या बुरी आदतों की पहचान करनी है।
1. Physical Habits
2. Mental Habits
3. Emotional Habits
4. Spiritual Habits
स्वयं का विश्लेषण करो और देखो कि मेरा स्थान कहाँ है?
1. Physical Habits:
जिस व्यक्ति में अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की आदत है, उनका काम है सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना, प्राणायाम करना, घूमने जाना आदि। रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठकर अपनी दिनचर्या आरम्भ कर देना एक अच्छी आदत है। आप महापुरुषों के जीवन में देखोगे तो पाओगे कि इसी प्रकार ही अच्छी आदतें उनके सफल जीवन का आधार हैं।
आज की पीढ़ी Late सोने और Late उठने को Fashion मानने लगी है। उठते ही Bed Tea चाहिए, Fast Food ने स्वास्थ्य का और भी बुरा हाल कर दिया। Late उठने से हर काम Late हो जाता है और व्यायाम आदि की ओर से ध्यान हट जाता है। Immunity कमज़ोर हो जाती है और वे अनेक बीमारियों का शिकार बन जाते हैं।
2. Mental Habits:
कुछ लोगों की आदत होती है हर काम में आलस करना। आज का काम कल पर टालना और फिर बहाने बनाना कि याद नहीं रहा, भूल गए। ऐसे लोग अपने जीवन में अस्त-व्यस्त ही बने रहते हैं। उनकी मानसिकता ही ऐसी बन जाती है। ऐसी आदतों को बदलो, Commitment का पालन करो। किसी के कहने से नहीं, स्वप्रेरणा से हर काम करने की तत्परता दिखाओ।
एक व्यक्ति Chain Smoker था। वह संत के पास आया कि महाराज! मुझे इस आदत को छोड़ने का नियम दिला दो। उसके साथ आए मित्र ने कहा कि महाराज! इसे नियम लेकर तोड़ने की आदत है। न जाने कितनी बार Smoking छोड़ने का नियम ले चुका है, पर छोड़ी आज तक नहीं। संत ने पूछा कि फिर ऐसे नियम लेने का क्या लाभ?
उस व्यक्ति ने कहा कि नहीं महाराज! बात ऐसी है कि अब तक मैं पत्नी के कहने से नियम लेता रहा, पर आपके उपदेश सुन कर अब मेरा मन उद्वेलित हो गया है। अब मैं नियम तोड़ने के लिए नहीं निभाने के लिए ले रहा हूँ।
यह था स्व-प्रेरणा का परिणाम कि आज 6 वर्ष हो गए, उसने नशे की किसी चीज़ को हाथ तक नहीं लगाया।
3. Emotional Habits:
कई लोग अपने भावनात्मक आवेश पर Control नहीं कर पाते। उन्हें छोटी-छोटी बातों पर चीख-चिल्ला कर सारा घर सिर पर उठा लेने की आदत होती है। बात-बात पर गाली देने की आदत जैसे उनका तकिया कलाम ही बन जाता है। उससे तो बनती हुई बात भी बिगड़ जाती है। अपनी बात को शांति से कहने की आदत डालो।
व्यसन छोड़ने की आदत तो सुधार लोगे, हर बात में चिंता करना, शक करना, दूसरे की हर बात को काटने की आदत, हर समय रोने की आदत, जिद करने की आदत; इन पर भी ध्यान दो कि ये अच्छी हैं या बुरी।
आजकल एक नई Habit का अविष्कार हुआ है - हर समय Social Media पर बने रहने की आदत। दिन का अधिकतर समय इस में व्यर्थ हो जाता है और इससे Creativity समाप्त हो गई है। घरों में Communication Gap आ गया है। एक सोफे पर बाप-बेटा बैठे हैं और अपने-अपने मोबाइल में लगे हैं, Facebook के पन्ने तो पढ़े जा रहे हैं, एक-दूसरे का Face उन्हें दिखाई नहीं दे रहा।
4. Spiritual Habits:
हर समय सकारात्मक रहना, सबको बराबरी से Deal करना, सबसे प्रेमपूर्ण व्यवहार करना, आत्म-विश्वास रखना आदि ऐसी आदतें हैं जो हमारे जीवन को ऊँचाइयों पर पहुँचा सकती हैं।
आदतें एक दिन में नहीं बनती। जैसे घास वाले एक ही रास्ते पर चलते-चलते वहाँ घास उगनी बंद हो जाती है और वह रास्ता पगडण्डी बन जाता है; उसी प्रकार आदत अच्छी हो या बुरी एक बार पड़ जाए तो जल्दी से छोड़ी नहीं जा सकती।
एक वकील साहब थे जिन्होंने अपने जीवन में एक भी मुकद्दमा नहीं हारा था। एक बार जज के सामने बहस चल रही थी और सामने वाले वकील के पास कोई दलील नहीं बची थी, उसका हारना तय था। अगली पेशी पर फैसला होना था। सामने वाले वकील ने Notice किया कि मुख्य बिंदु पर बहस करते समय ये अपने कोट के बटन को घुमाने लगते हैं। उसने उनके धोबी से Setting कर के वह बटन तोड़ने को कहा।
अगली पेशी पर मुख्य बहस शुरू होते ही उनका हाथ अपने कोट के बटन पर गया और बटन हाथ में न आने पर उनका ध्यान बहस से हट कर बटन पर चला गया और दिमाग का बटन बंद हो गया। यह पहला मौका था कि वे वह Case हार गए। आदत पकने से पहले उसको जान लो।
ग़लत आदतों के कारण ही हम ज़िन्दगी की बाज़ी हार रहे हैं। Good Habit को बनाए रखने के लिए और Bad Habit को छोड़ने के लिए हमें इच्छा-शक्ति, संकल्प-शक्ति, विश्वास-शक्ति और समर्पण-शक्ति को जागृत करना होगा।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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धन्यवाद।
जय जिनेन्द्र, मोसी जी
ReplyDeleteये प्रसंग पढ़ कर मेरे जीवन में बहुत बदलाव आता है, सारी परेशानियों का हल मिल जाता है।
आपका बहुत बहुत शुक्रिया आप हमें सफल जीवन जीने की प्रेरणा देते हो।
धन्यवाद सीमा, बस इसी तरह प्रेरित करते रहो स्वयं को। 🙏🙏🙏
DeleteNice topic and tips for illuminating bad habits and keep good habits only. This practice will one day lead you to a successful life.
ReplyDeleteNamaste Aunti Ji
ReplyDeleteVery well phrased. The way it is written is truly impressive.
Thanks 🙏