Negativity: कितनी हानिकारक (प्रेरणात्मक लेख)

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दुःख को सुख में बदलने की कला

Negativity: कितनी हानिकारक (प्रेरणात्मक लेख)

Image by CANDICE CANDICE from Pixabay

दुनिया में दो तरह की मानसिकता वाले लोग होते हैं - Positive सोच रखने वाले और Negative सोच रखने वाले। एक स्थान पर MBA के Sales और Marketing की Post के लिए Interview चल रहा था। एक Candidate से पूछा गया कि MBA की Full Form बताओ तो उसने उत्तर दिया - मुझे बनाना आता है और जब दूसरे Candidate से पूछा गया कि MBA की Full Form बताओ तो उसने उत्तर दिया - मुझे बिगाड़ना आता है। पहला व्यक्ति बिगड़े हुए काम को बनाने की योग्यता रखता है और दूसरा व्यक्ति बने बनाए काम को बिगाड़ने की। अब आप ही बताइए कि किसे Seiect किया गया होगा?

ज़ाहिर सी बात है कि सभी काम बनाने वाले को पसंद करते हैं और बिगाड़ने वाले से स्वयं को दूर रखना चाहते हैं। नकारात्मक और सकारात्मक - इन दो दृष्टिकोणों से ही सम्पूर्ण जीवन-मूल्यों का निर्धारण होता है। जिसकी सोच अच्छी, उसका जीवन अच्छा और जिसकी सोच बुरी, उसका जीवन बुरा बन जाता है।

आज समाज में Negativity बहुत तेज़ी से फैल रही है जो अपने आप में ही बहुत बड़ी बीमारी है। आगे बढ़ना है तो स्वयं को सदा Positive Mode में रखो। ऐसा तभी हो सकता है, जब हम मन से Negativity के Virus को बाहर निकाल फेंकेगे।

आज हम चार विषयों पर चर्चा करेंगे कि Negativity को कैसे पहचानें?

1. Negativity क्या है?

2. Negativity क्यों आती है?

3. Negativity के क्या परिणाम हैं?

4. Negativity से कैसे बचा जाए?

1. Negativity क्या है?

इसका पहला लक्षण है - आवेग, दूसरा लक्षण है - अविश्वास, तीसरा लक्षण है - आलोचना और चौथा लक्षण है - चिन्ता।

जब हम बात-बात पर गुस्सा करना, डरना, चीखना, चिड़चिड़ाना, रोना आदि शुरू कर दें तो समझो कि हम अपने आवेग पर Control नहीं कर पा रहे हैं और Negativity के शिकार हैं। 

हर व्यक्ति या काम के प्रति मन में अविश्वास उत्पन्न होने लगे, तो समझो कि हम Negativity के शिकार हैं। यदि कोई काम सामने आ गया और हम यह सोचें कि यह कैसे होगा या I can't do.; तो समझो कि हमें खुद पर विश्वास नहीं है और उसी काम के लिए हम यह कहें कि बताओ! कैसे करना है या I can do., मुझे यह काम करना है और करना ही है; तो समझो कि हमारे अंदर पूर्ण आत्म-विश्वास व क्षमता है।

कुछ लोगों का काम केवल दूसरे के काम में कमियां निकालने और उनकी बुराई करने का होता है। वे आलोचना के सिवा कुछ नहीं कर सकते। उनका काम विचारों में गंदगी फैलाना और काम को बिगाड़ना होता है।

कुछ लोग भविष्य के प्रति अनिश्चितता की चिंता से ग्रस्त रहते हैं। यह भावना हमारी चेतना को उलझा देती है। आप स्वयं को देखें कि कहीं मेरा स्थान इन लक्षणों में तो नहीं है?

2. Negativity क्यों आती है?

हम Negativity लाना नहीं चाहते पर हमारे दिमाग़ में संचित पूर्व सूचनाओं की प्रतिक्रिया के रूप में हम नकारात्मक रूप में सोचने लगते हैं। यदि हमारे दो बच्चों में से एक अधिक होशियार है तो हम हर स्थान पर उसकी तारीफ़ करते हैं। सब उसे प्यार और आशीर्वाद देते हैं। दूसरा बच्चा जो अपेक्षाकृत कम Marks लाता है, वह पास खड़ा हुआ ये सब देखता रहता है। उसके मन में हीन भावनाएं संचित हो जाती हैं कि मैं पढ़ाई में अच्छा हो ही नहीं सकता। यही भावना जीवन में इस रूप में प्रगट होने लगती है कि मैं तो कुछ कर ही नहीं सकता। उससे कोई बात न करे तो उसे यही लगता है कि मुझे सब Avoid करते हैं, मैं इस लायक ही नहीं हूँ और धीरे-धीरे वह Frustration और Inferiority Complex का शिकार हो जाता है।

3. Negativity के क्या परिणाम हैं?

एक Negative विचार अपने साथ दो Negativie विचारों को और बुला लेता है और परिणामस्वरूप दिमाग़ में Chemical Changes होने लगते हैं। प्रगति बाधक हो जाती है। घर-परिवार टूट जाते हैं। इसका एक ही इलाज है - वातावरण में परिवर्तन और चिकित्सक से परामर्श।

4. Negativity से कैसे बचा जाए?

Mind के Negative विचारों को Poitive में बदलने के लिए सबसे पहला उपाय है - प्राणायाम। यह 12 Seconds की Exercise है। 4 Seconds तक सांस भीतर लें, 4 Sconds तक रोक कर रखें और 4 Seconds में धीरे-धीरे बाहर निकालें। पहली बार में इतना न कर सकें तो धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। इससे दिमाग़ को ऊर्जा मिलती है और सही दिशा में सोचने की शक्ति मिलती है। 

दूसरा उपाय है - दिमाग़ में गंदे विचारों का कचरा भरना बंद करें।

एक व्यक्ति ने अपना नया मकान बनाया। उसका मित्र एक बोरा लेकर आया और खोलकर उसके मकान में फैला दिया। जानते हो उसमें क्या भरा था? उसमें था कचरा। जैसे-तैसे मकान को साफ़ किया और उस मित्र से कहा कि भाई! आगे से इस प्रकार कचरा लेकर नहीं आना। उसने भी कह दिया कि ठीक है! अगली बार मैं कचरा लेकर नहीं आऊँगा। 

दूसरी बार फिर वही! इस बार भी उसे कहा गया तो उसने कहा कि ठीक है! अगली बार मैं कचरा लेकर नहीं आऊँगा। लेकिन उसे तो आदत थी। एक का कचरा दूसरे के घर और दूसरे का कचरा तीसरे के घर। जब तीसरी बार भी वह बोरा लेकर आ गया तो उस व्यक्ति ने दरवाज़ा ही नहीं खोला।

ये समाचार-वाचक भी यही करते हैं। दुनिया भर का कचरा सुबह से शाम तक दूसरों को सुनाते रहते हैं और खुद इससे निर्लिप्त रहते हैं। सामने विचारों का कचरा दिखाई दे रहा है तो मन का गेट क्यों खोलते हो? वह तुम्हारे दिमाग़ में जाकर बैठ जाएगा और तुम्हें Negativity का शिकार बना देगा।

तीसरा उपाय है - मन से नकारात्मक विचारों को बाहर निकालना।

एक गंदे पानी की बालटी में से गंदगी निकालना आसान नहीं है। हम कहें कि उसे बिना हिलाए कुछ समय के लिए रख दें तो गंदगी नीचे बैठ जाएगी लेकिन रहेगी तो उसी में न! समय मिलते ही फिर ऊपर आ सकती है। इसका एक ही इलाज है कि ऊपर से साफ़ पानी डालते रहो और तब तक डालते रहो, जब तक सारा गंदा पानी बाहर न बह जाए और उसमें केवल साफ़ पानी दिखाई न देने लगे।

बुरे विचारों को बाहर निकालने के लिए दिमाग़ को अच्छे विचारों, अच्छे साहित्य व अच्छी संगति से भरते रहो। एक दिन वे सब बुरे विचार बाहर हो जाएंगे। तन को अच्छा भोजन न मिले तो तन सुस्त हो जाता है और मन को अच्छे विचार न मिलें तो मन भ्रष्ट हो जाता है।

एक शराबी व्यक्ति संत के पास गया तो संत ने समझाया कि ‘शराब पीने वाला आदमी नरक में जाएगा। अच्छा यही है कि इसे छोड़ दो।’

उसने कहा कि ‘फिर तो शराब बनाने वाला भी नरक में जाएगा।’

‘हाँ! वह भी नरक में जाएगा।’ 

‘और बेचने वाला?

‘हाँ! वह भी।’

‘शराब की दुकान के बाहर बैठ कर नमकीन बेचने वाला।’

‘हाँ! और क्या? सब नरक के भागी बनेंगे।’

‘जब सारे वहीं मिलेंगे, तो स्वर्ग से तो नरक भी अच्छा ही है।’

अब ऐसे व्यक्ति को क्या कहें जो सदा बुरे विचारों में सुख मान रहा है।  

नहीं! यह नारकीय प्रवृत्ति है।

जीवन को सुरक्षित रखना है और अपना उत्थान करना है तो आज से ही अपनी Negativity को बाहर निकालने का प्रयत्न आरम्भ कर दो।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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