ईश्वर पर विश्वास

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ईश्वर पर विश्वास

Image by RÜŞTÜ BOZKUŞ from Pixabay

8 साल के एक बच्चे ने 1 रुपए का सिक्का मुट्ठी में लेकर एक दुकान पर जाकर कहा - क्या आपके दुकान में ईश्वर मिलेंगे?

दुकानदार ने यह बात सुनकर सिक्का नीचे फेंक दिया और बच्चे को निकाल दिया।

बच्चा पास की दुकान में जाकर 1 रूपये का सिक्का लेकर चुपचाप खड़ा रहा।

ए लड़के! 1 रूपये में तुम क्या चाहते हो?

मुझे ईश्वर चाहिए। आपकी दुकान में हैं क्या?

दूसरे दुकानदार ने भी भगा दिया।

लेकिन उस अबोध बालक ने हार नहीं मानी। एक दुकान से दूसरी दुकान, दूसरी से तीसरी, ऐसा करते-करते कुल चालीस दुकानों के चक्कर काटने के बाद एक बूढ़े दुकानदार के पास पहुंचा। उस बूढ़े दुकानदार ने पूछा - तुम ईश्वर को क्यों खरीदना चाहते हो? क्या करोगे ईश्वर लेकर?

पहली बार एक दुकानदार के मुंह से यह प्रश्न सुनकर बच्चे के चेहरे पर आशा की किरणें लहराई৷ लगता है इसी दुकान पर ही ईश्वर मिलेंगे!

बच्चे ने बड़े उत्साह से उत्तर दिया - इस दुनिया में मां के अलावा मेरा और कोई नहीं है। मेरी मां दिन भर काम करके मेरे लिए खाना लाती थी। मेरी मां अब अस्पताल में है। अगर मेरी मां मर गई तो मुझे कौन खिलाएगा? डाक्टर ने कहा है कि अब सिर्फ ईश्वर ही तुम्हारी मां को बचा सकते हैं। क्या आपके दुकान में ईश्वर मिलेंगे?

हां, मिलेंगे...! कितने पैसे हैं तुम्हारे पास?

सिर्फ एक रुपया।

उसने अपनी हथेली खोल कर वह रुपया दिखाया।

कोई दिक्कत नहीं है। बच्चों को एक रुपए में ही ईश्वर मिल सकते हैं।

दुकानदार ने बच्चे के हाथ से एक रुपया लेकर सोचा कि एक रुपए में एक गिलास पानी के अलावा बेचने के लिए और कुछ भी नहीं है। इसलिए उसने बच्चे को फिल्टर से एक गिलास पानी भरकर दिया और कहा - यह पानी पिलाने से ही तुम्हारी मां ठीक हो जाएगी।

अगले दिन कुछ मैडिकल स्पेशलिस्ट उस अस्पताल में गए। बच्चे की मां का ऑपरेशन हुआ और बहुत जल्द ही वह स्वस्थ हो उठीं।

Discharge के कागज़ पर अस्पताल का बिल देखकर उस महिला के होश उड़ गए। डॉक्टर ने उन्हें आश्वासन देकर कहा, “Tension की कोई बात नहीं है। एक वृद्ध सज्जन ने आपके सारे बिल चुका दिए हैं। साथ में एक चिट्ठी भी दी है।“

महिला चिट्ठी खोलकर पढ़ने लगी, उसमें लिखा था -

“मुझे धन्यवाद देने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपको तो स्वयं ईश्वर ने ही बचाया है। मैं तो सिर्फ एक ज़रिया हूं। यदि आप धन्यवाद देना ही चाहती हैं तो अपने अबोध बच्चे को दीजिए जो सिर्फ एक रुपया लेकर नासमझों की तरह ईश्वर को ढूंढने निकल पड़ा। उसके मन में यह दृढ़ विश्वास था कि एकमात्र ईश्वर ही आपको बचा सकते है। विश्वास इसी को ही कहते हैं। ईश्वर को ढूंढने के लिए करोड़ों रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं होती, यदि मन में अटूट विश्वास हो तो वे एक रुपए में भी मिल सकते हैं।“

सदैव प्रसन्न रहिए।

जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।


--

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

Comments

  1. Ishwar par viswas, swayam par barosaa,aur mehanat important in order to get success.

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