कर्मों की दौलत

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कर्मों की दौलत

Image by Heike Frohnhoff from Pixabay

एक राजा था। जिसने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत इकट्ठी करके शाही खजाना बनाया हुआ था और आबादी से बाहर जंगल में एक सुनसान जगह पर बनाए तहखाने में सारे खजाने को खुफिया तौर पर छिपा दिया था। खजाने की सिर्फ दो चाबियां थी। एक चाबी राजा के पास और एक उसके खास मंत्री के पास थी। इन दोनों के अलावा किसी को भी उस खुफिया खजाने का राज मालूम नहीं था। एक रोज़ किसी को बताए बगैर राजा अकेले अपने खजाने को देखने निकला। तहख़ाने का दरवाज़ा खोल कर अंदर दाखिल हो गया। वह अपने खजाने को देख-देख कर खुश हो रहा था और खजाने की चमक से सुकून पा रहा था।

उसी वक्त मंत्री भी उस इलाके से निकला और उसने देखा कि खजाने का दरवाज़ा खुला है। वह हैरान हो गया और उसे ख्याल आया कि कहीं कल रात जब मैं खजाना देखने आया था, तब शायद खजाने का दरवाज़ा खुला रह गया होगा। उसने जल्दी-जल्दी खजाने का दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया और वहां से चला गया। उधर खजाने को निहारने के बाद राजा जब संतुष्ट हुआ और दरवाजे के पास आया तो यह क्या? दरवाज़ा तो बाहर से बंद हो गया था। उसने ज़ोर-ज़ोर से दरवाज़ा पीटना शुरू किया पर वहां उसकी आवाज सुनने वाला उस जंगल में कोई न था।

राजा चिल्लाता रहा। पर अफ़सोस कोई न आया। वह थक-हार कर खजाने को ही देखता रहा। अब राजा भूख और पानी की प्यास से बेहाल हो रहा था। वह पागलों-सा हो गया। वह रेंगता-रेंगता हीरों के संदूक के पास गया और बोला - ए दुनिया के नायाब हीरों! मुझे एक गिलास पानी दे दो। फिर मोती, सोने-चांदी के पास गया और बोला - ए मोती! चांदी! सोने के खजाने! मुझे एक वक़्त का खाना दे दो। राजा को ऐसा लगा कि हीरे मोती उसे बोल रहे हों, तेरी सारी ज़िन्दगी की कमाई तुझे एक गिलास पानी और एक समय का खाना नही दे सकती। राजा भूख से बेहोश हो कर गिर गया।

जब राजा को होश आया तो उसने सारे मोती, हीरे बिखरा कर दीवार के पास अपना बिस्तर बनाया और उस पर लेट गया। वह दुनिया को एक पैगाम देना चाहता था लेकिन उसके पास कागज़ और कलम नहीं था।

राजा ने पत्थर से अपनी उंगली फोड़ी और बहते हुए खून से दीवार पर कुछ लिख दिया। उधर मंत्री और पूरी सेना लापता राजा को ढूंढते रहे पर बहुत दिनों तक राजा नहीं मिला तो मंत्री राजा के खजाने को देखने आया। उसने देखा कि राजा हीरे-जवाहरात के बिस्तर पर मरा पड़ा है और उसकी लाश को कीड़े-मकोड़े खा रहे थे। राजा ने दीवार पर खून से लिखा हुआ था - ये सारी दौलत एक घूंट पानी और एक निवाला नहीं दे सकी।

यही अंतिम सच है। आख़िरी समय आपके साथ आपके कर्मो की दौलत जाएगी। चाहे आप कितनी बेईमानी से हीरे, पैसा, सोना, चांदी इकट्ठा कर लो, सब यहीं रह जाएगा। इसीलिए जो जीवन आपको प्रभु ने उपहार स्वरूप दिया है, उसमें अच्छे कर्म से लोगों की भलाई के काम कीजिए। बिना किसी स्वार्थ के अर्जित कीजिए अच्छे कर्मो की अनमोल दौलत! जो आपके इस लोक में भी सदैव काम आएगी और परलोक में भी।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

Comments

  1. बहुत ही सुन्दर व आज के युग में प्रेरणादायक लेख।

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