माँ - एक छोटी सी

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माँ - एक छोटी सी

Image by PixelAnarchy from Pixabay

एक दीन-हीन आठ-दस वर्ष की लड़की से दुकान वाला बोला - “छुटकी! जा देख, तेरा छोटा भाई रो रहा है। तुमने दूध नहीं पिलाया क्या?”

“नहीं, सेठ! मैंने तो सुबह ही दूध पिला दिया था।”

“अच्छा! तू जा। जाकर देख। मैं ग्राहक संभालता हूँ।”

एक ग्राहक सेठ से - “अरे भाई! ये कौन लड़की है, जिसे तुमने इतनी छूट दे रखी है? परसों सारे गिलास तोड़ दिये। कल एक आदमी पर चाय गिरा दी और तुमने इसे कुछ नहीं कहा!!”

सेठ - “भाई साहब! ये वह लड़की है, जो शायद तुम्हें आज के कलयुग में देखने को न मिले।”

ग्राहक - “मैं समझा नहीं!”

सेठ - “चलो! तुम्हें शुरू से बताता हूँ। एक दिन दुकान पर बहुत भीड़ थी और कोई नौकर भी नहीं था। ये लड़की अपने छोटे भाई को गोद में लिए, काम माँगने आयी और इसकी शर्त सुनेगा? इसने शर्त रखी कि मुझे काम के पैसे नहीं चाहिए। बस काम के बीच में मेरा भाई रोया तो मैं भाई को पहले देखूंगी। सुबह, दोपहर, शाम और रात को चार टाइम दूध चाहिए बस! रहने के लिए मैं इसी होटल के किचन में रहूँगी। खाने के लिए जो बचेगा, उसे ही खा लूंगी। मेरे भाई के रोने पर आप चिल्लाओगे नहीं। अगर कुछ काम बच गया तो मेरे भाई के सोने के बाद मैं रात को होटल के सारे काम कर दूंगी। अगर मंजूर हो तो बताओ।”

ग्राहक - “फिर तुमने क्या कहा?”

सेठ - “मैं तो हंस पड़ा और कहा - और कुछ। मेरा मतलब कि कोई पैसों की खास डिमांड वगैरह....। तो इसने कहा कि बस इतना ही कि मुझे काम मिल जाए। मैं सड़कों पर भीख नहीं माँगना चाहती। न ही अपने भाई को भिखारी बनाना चाहती हूँ। दिल लगाकर काम करूँगी, उसे पढ़ाऊँगी और बड़ा आदमी बनाऊंगी।”

इतने में छुटकी आ गई।

“सेठ जी! इसने चड्डी में सुसु कर दिया था, इसलिए रो रहा था। अब सो गया है। अब नहीं रोयेगा। मैं अब काम पर लगती हूँ....।”

ग्राहक - “तुमने उसे फिर क्यों कुछ नहीं बोला?”

सेठ मुस्कुराते हुए - “अरे जनाब! आप बस किताबों में ही पढ़ते हो क्या? अच्छी चीजें, अच्छी बातें....? जरा इसको देखो तो! चुटकी भर नन्ही-सी जान…., छोटी-सी उमर....। काम करना चाहती है, हाथ फैलाना नहीं। कोई तो होना चाहिए न उसे अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए! शायद बंसीवाले ने ये काम मुझे सौंपा है कि मैं उसे एक रास्ता दिखाऊँ और आपको फिक्र इस बात की है न कि वह गिलास ही तोड़ती है, पर विश्वास तो नहीं तोड़ेगी और ज़रा ये भी तो सोचो कि यह छोटी-सी बच्ची कहाँ जाती है? यहीं पड़ी है दोस्त! जब तक प्रभु की मर्जी है, वरना मैं कौन होता हूँ इसका भविष्य बनाने वाला या उसकी किस्मत में लिखा हुआ बदलने वाला।”

छुटकी फिर दौड़ते हुए उस ग्राहक की चाय गिराते हुए बोली - “सेठ! भाई रो रहा है। आप इसका ऑर्डर ले लो।”

इस बार ग्राहक भी हंस पड़ा और कहने लगा - “जाइये, सेठ जी! महारानी ने आदेश दिया है, लग जाइए काम पर....।”

दोनों मुस्कुराने लगे। वहीं छुटकी छोटे भाई को संभालने में लग गयी।

दोस्तों! ऐसे लोग हमें बहुत ही कम देखने को मिलते हैं, जो दूसरों की मदद करते हैं। विभिन्न त्रासदियों में कई बच्चे बिना माँ-बाप के रह जाते हैं। दोस्तों! अगर आपको भी ऐसी ही मदद के लायक कोई दिखे तो उसकी मदद जरूर करें।

धन्यवाद, दोस्तों!

--

 सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


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