ताकत की बुनियाद

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ताकत की बुनियाद

Image by Ralph from Pixabay

बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी, जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था।

चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए, लेकिन पेड़ उस छोटी-सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था!

पेड़ दाना देवे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वह उसका दाना नहीं दे रहा।

भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था।

पेड़ दाना देवे ना, बढ़ई पेड़ काटे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा।

राजा ने उस नन्ही चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वह उस तक पहुंच गई है?

पेड़ दाना देवे ना, बढ़ई पेड़ काटे ना, राजा बढ़ई दंडे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी।

वह महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा, तो तुम उसे गिरा देना, क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता। बढ़ई पेड़ नहीं काटता। पेड़ उसका दाना नहीं देता।

महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया।

पेड़ दाना देवे ना, बढ़ई पेड़ काटे ना, राजा बढ़ई दंडे ना, महावत राजा गिरावे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वह राजा को गिराने को तैयार नहीं। राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं। बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं। पेड़ दाना देने को राजी नहीं।

पेड़ दाना देवे ना, बढ़ई पेड़ काटे ना, राजा बढ़ई दंडे ना, महावत राजा गिरावे ना, हाथी महावत को सबक सिखावे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

हाथी बिगड़ गया।

उसने कहा, ‘ऐ छोटी चिड़िया! तू इतनी सी बात के लिए मेरे द्वारा महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?’ पर चिड़िया रटती रही -

पेड़ दाना देवे ना, बढ़ई पेड़ काटे ना, राजा बढ़ई दंडे ना, महावत राजा गिरावे ना, हाथी महावत को सबक सिखावे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

चिड़िया आख़िर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंड में घुस जाओ।

चींटी ने चिड़िया से कहा, ‘चल भाग यहाँ से। बड़ी आई हाथी की सूंड में घुसने को बोलने वाली।’

पेड़ दाना देवे ना, बढ़ई पेड़ काटे ना, राजा बढ़ई दंडे ना, महावत राजा गिरावे ना, हाथी महावत को सबक सिखावे ना, चींटी हाथी की सूंड में घुसे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

अब तक तो चिड़िया अनुरोध की मुद्रा में रही, पर अब उस ने रौद्र रूप धारण कर लिया। उसने कहा कि मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं, पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ।

पेड़ दाना देवे ना, बढ़ई पेड़ काटे ना, राजा बढ़ई दंडे ना, महावत राजा गिरावे ना, हाथी महावत को सबक सिखावे ना, चींटी हाथी की सूंड में घुसे ना, मैं अपना दाना लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

छोटी-सी चिड़िया यही गाती हुई डाल-डाल पर उड़ने लगी (मीडिया की तरह)।

चींटी उसकी इस हरकत से डर गई कि अब तो सारे पक्षी मिलकर मुझे मार ही देंगे।

वह भाग कर हाथी के पास गई।

हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुँचा।

महावत राजा के पास गया कि हुजूर! चिड़िया का काम कर दीजिए, नहीं तो मुझे धमकी मिली है। मैं आपको हाथी से गिरा दूंगा।

राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया। उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा।

बढ़ई पेड़ के पास पहुँचा।

बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो....मुझे मत काटो....। मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा।

निष्कर्ष -

आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा। आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुज़रती होंगी। हर सेर को सवा सेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं।

आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वह काम होकर रहेगा। यकीन कीजिए। हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप ही सिद्ध होते हैं।

हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है। बड़े सपनों को पाने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से गुज़रना पड़ता है। पहले लोग मजाक उड़ाएंगे, फिर लोग साथ छोड़ेंगे, फिर विरोध करेंगे। फिर वही लोग कहेंगे कि हम तो पहले से ही जानते थे, एक न एक दिन तुम कुछ बड़ा करोगे।

रख हौसला वह मंजर भी आयेगा,

प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा।

थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफिर,

मंजिल भी मिलेगी और जीने का मज़ा भी आएगा।।

--

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


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धन्यवाद।

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