असली अमीरी (एक प्रेरणादायक कहानी)

 असली अमीरी 
(एक प्रेरणादायक कहानी)

गोपाल एक बड़े और व्यस्त शहर में अपने माता-पिता के साथ रहता था। उसके पिता एक प्रतिष्ठित व्यवसायी थे और उनके पास धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। गोपाल के पास महंगे खिलौने, अच्छे कपड़े, एक बड़ा घर और सुविधाओं से भरपूर जीवन था। लेकिन वह इन सबका आदी हो चुका था और उसे कभी यह अहसास ही नहीं हुआ कि जीवन के असली मायने क्या होते हैं।

एक बार गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हुईं। गोपाल के पिता ने सोचा कि इस बार उसे सिर्फ मॉल और वीडियो गेम्स में समय नहीं बिताना चाहिए, बल्कि असली जीवन का अनुभव कराना चाहिए। उन्होंने गोपाल से कहा, “बेटा, चलो इस बार गर्मी की छुट्टियों में गाँव चलते हैं। तुम्हें बाहर की दुनिया दिखाते हैं।” 

गोपाल थोड़ा चौंका, लेकिन पिता की बात मान गया।

अगले दिन वे लोग अपने पैतृक गाँव के लिए रवाना हुए। कुछ ही घंटों की यात्रा के बाद वे गाँव पहुँच गए। वहाँ का वातावरण एकदम शांत था। चारों ओर हरियाली, खुले मैदान, साफ-सुथरी हवा और चहचहाते पक्षी। गोपाल को यह सब देखकर पहले थोड़ी हैरानी हुई, क्योंकि वह तो सिर्फ कंक्रीट के जंगलों और ट्रैफिक की आवाज़ों का आदी था।

गाँव में गोपाल के पिता उसे खेतों में ले गए, जहाँ किसान अपने परिवार के साथ कड़ी मेहनत कर रहे थे। पास में मिट्टी के बने छोटे-छोटे घर थे, जिनमें यही किसान अपने बच्चों के साथ रहते थे। गोपाल को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि इतने कम संसाधनों में भी ये लोग कितने खुश हैं।

गाँव के बच्चों ने गोपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया। वह उनके साथ खेला, तालाब में नहाया, पेड़ों पर चढ़ा, आम और जामुन खाए, भेड़ों और गायों के साथ खेला। उसे पहली बार जिंदगी की सादगी और खुशबू का अनुभव हुआ। वहाँ किसी के पास महंगे फोन नहीं थे, लेकिन फिर भी सब हँसते-गाते और खुश रहते थे।

एक सप्ताह कब बीत गया, पता ही नहीं चला। जब वापसी का समय आया, तो गोपाल थोड़ा उदास था। वापसी के रास्ते में उसके पिता ने मुस्कराकर पूछा, “बेटा, अब बताओ गाँव में क्या देखा? क्या महसूस किया? देखा! कैसे गरीब लोग कितनी कठिन जिंदगी जीते हैं?”

गोपाल कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, “पापा, मैं तो आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपने मुझे दिखाया कि अमीर असल में कौन होते हैं।”

पिता हैरान रह गए। 

गोपाल आगे बोला, “हमारे पास तो सिर्फ एक कुत्ता है, लेकिन गाँव के बच्चों के पास तो कई कुत्ते हैं। हमारे पास एक गाय है, उनके पास बहुत सारी गायें और भेड़ें हैं। हम एक छोटे से घर में रहते हैं, लेकिन उनके पास खुले मैदान, खेत, और प्रकृति की गोद में बना घर है। हमारे यहाँ तो तारों से भरा आकाश भी नहीं दिखता, पर वहाँ रोज रात को मैं खुले आसमान के नीचे लेट कर तारे गिनता था। हमारे पास तो एक छोटा-सा स्विमिंग पूल है, वहाँ तो नहाने के लिए बहुत बड़ा तालाब था। पापा! हमसे अधिक अमीर तो वे हुए न! मैं जान गया हूँ कि असली अमीरी पैसे में नहीं, दिल की खुशी और संतोष में है।”

गोपाल की बात सुनकर पिता की आँखें नम हो गईं। उन्होंने महसूस किया कि आज बेटे ने जीवन का असली पाठ पढ़ लिया है।

नैतिक शिक्षाः

सच्ची अमीरी संसाधनों में नहीं, सोच में होती है। आप चाहे जहाँ हों, अगर संतोष और आत्मविश्वास के साथ मेहनत करें, तो वहीं से सफलता की शुरूआत हो सकती है। हमें दूसरों की ज़िंदगी से तुलना करने के बजाय अपनी जिंदगी को सही दृष्टिकोण से देखने की ज़रूरत है। वही व्यक्ति असली अमीर होता है, जो कम में भी खुश रहना जानता है।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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