नव वर्ष का स्वागत
नव वर्ष 2026 का स्वागत जय श्री राम!! भारतमाता की जय!! हिन्दू पंचांग के अनुसार नववर्ष चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन अर्थात् नववर्ष प्रतिपदा एवं गुड़ी पड़वा पर प्रत्येक वर्ष विक्रम संवत के अनुसार ‘चैत्र शुक्ल प्रतिपदा’ से आरम्भ होता है। यह ईसवी संवत के नववर्ष का आगमन सनातन नववर्ष का आगमन नहीं है। परन्तु जैसा व्यावहारिक रूप से अधिकतर प्रचलन है, उसका निर्वहन करते हुए हम सभी सन् 2025 को अंतिम भावभीनी विदाई देते हुए वर्ष 2026 का सुस्वागत कर अभिनन्दन, अभिवादन, अभिवन्दन करें। आओ! हम सब वर्तमान के आलोक में अतीत का आत्मावलोकन कर सुंदर, समृद्ध, सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं सुंदर भविष्य की नवीनतम पगडंडियों का सृजन करें और जीवन को सहज व सरल बनाएं। गत वर्ष मेरे द्वारा मन, वचन, कर्म से आप किसी को कोई ठेस पहुंची हो, तो मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूं। आप सब के पावन सहयोग का कोटि-कोटि आभार व धन्यवाद व्यक्त करता हूं। इन्हीं शुभ-कामनाओं के साथ - वेद गावड़ी हिसार (हरियाणा) की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती अनिता जैन जी के हृदयस्पर्शी शब्दों में - गाएं ऐसा तराना नए साल में, दर्द भागे पुराना नए साल में...