Nothing happens by chance

  प्रत्येक कार्य के लिए कोई कारण होता है। अचानक या घटनावश कुछ नहीं होता।

There is a reason for everything. Nothing happens by chance or by accident. 

याद रखो कि हर घटना के पीछे कोई कारण होता है, कुछ भी अचानक या दुर्घटनावश नहीं होता। संसार का एक विशेष क्रम है। प्रत्येक कार्य ‘कारण और प्रभाव’ के सम्बन्ध से बंधा हुआ है। तुम्हारे साथ जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसका कारण यह है कि तुमने पूर्व में अपनी क्रियाओं से कोई कारण उपस्थित किये हैं और जब तक वे सभी कारण धीरे-धीरे परिणामों में नहीं बदल जाते और नए कारण तुम्हारे द्वारा उपस्थित नहीं किए जाते, तब तक तुम हमेशा के लिए ख़ुश और आज़ाद नहीं होंगे।

एक बार की बात है। एक जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। वह दिखने में बहुत ही सुंदर था, जिस कारण से उसको अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत ही गर्व था और वह जब भी तालाब में पानी पीते हुए अपनी परछाई देखता था, तो सोचता कि मेरे सींग कितने खूबसूरत हैं, लेकिन मेरी टांगें कितनी पतली और भद्दी हैं! वह सोचता कि ‘काश! उसकी टांगें भी उसके सींगों की तरह खूबसूरत होती, तो वह और भी ज्यादा खूबसूरत दिखता!’ इस प्रकार वह अपनी टांगों के बारे में सोच-सोच कर बहुत हीन भावना से घिरा रहता था। 

एक दिन की बात है, उस जंगल में कुछ शिकारी शिकार पर आए। फिर उन शिकारियों ने जब खूबसूरत सींगों वाले बारहसिंगा को देखा, तो वे उसका शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़े। इतने में बारहसिंगा अपनी पतली और भद्दी टांगों से बहुत तेजी से दौड़ा और शिकारियों से काफी दूर निकल गया। वह हिरण भागने में इतना मस्त था कि उसे सामने ध्यान ही नहीं दिया।  

वह भागते हुए वहां पेड़ों के नीचे से गुजर रहा था। तभी अचानक बारहसिंगा के सींग एक पेड़ की शाखा में अटक गए। बारहसिंगा अपने सींग छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रहा था, लेकिन सींग नहीं निकल पा रहे थे। इधर शिकारी लगातार निकट आते जा रहे थे। खूब कोशिश करने के बाद बड़ी मुश्किल से उसने अपने सींग छुड़ाए और वहां से जान बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा। 

अब बारहसिंगा सोचने लगा कि मैं भी कितना बड़ा मूर्ख हूं। जिन सींगों की खूबसूरती पर मैं इतना इतराता था, आज उन्हीं की वजह से मैं भारी संकट में फंस गया था और जिन टांगों को मैं भद्दी कहकर कोसा करता था, आज उन्हीं टांगों ने मेरी जान बचाई है। इस तरह अब बारहसिंगा खुद की हीन की भावना से दूर हो चुका था। 

इस दुनिया में कोई भी इंसान या प्राणी अपने आप में खास है। ईश्वर ने सभी को अपने आप में Perfect बनाया हुआ है, लेकिन यदि हम दूसरे से तुलना करने लगते हैं, तो हर किसी को अपने आप में कुछ न कुछ कमी जरूर दिखने लगती है। हम सभी को खुद की दूसरे से तुलना करके खुद को हीन भावना का शिकार नहीं होने देना चाहिए। हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि हम जैसे भी हैं, सर्वश्रेष्ठ हैं। खुद से प्यार करें तो फिर दूसरे से तुलना करने के बजाय खुद पर विश्वास करने की भावना आपकी ‘मजबूती’ बन जाएगी और अपने आप को हमेशा दूसरों से बेहतर साबित कर सकते हैं। 

उपर्युक्त ज्ञान के आधार पर तुम्हें जीवन की विभिन्न घटनाओं और समस्याओं का सामना करने की मानसिक प्रक्रिया को बदलना होगा।

उन्हें कहीं बाहर से आए हुए बोझ के समान न समझो। सभी समस्याओं को पहले किए गए कर्मों के फल की तरह मानो और उनसे मिली सफलता/असफलता, लाभ/हानि, यश/अपयश को अपने पूर्वकर्मों का फल ही समझो ताकि कर्मों का वर्तमान में बंध न हो। कुछ घटित होना इतना महत्त्वपूर्ण नहीं है, जितनी उनके प्रति हमारी मानसिक स्थिति या प्रतिक्रिया महत्त्वपूर्ण है। इसलिए यह उचित ही कहा गया है कि यह संसार अच्छा या बुरा नहीं है। यह इस बात पर निर्भर है कि हम इसे कैसे देखते हैं। जैसा हमारे अन्दर है, वैसा ही हमें बाहर दिखाई देता है।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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