Develop tolerance

 सहनशीलता बढ़ाओ। 
 Develop tolerance.

सहनशीलता एक सबसे बड़ा गुण है। अपने लिए दृढ़ बनो, लेकिन ओरों के दोषों और गलतियों के लिए सहनशील बनो। दूसरों के द्वारा सख्त शब्दों के द्वारा अपमान और मानसिक आघातों से पहुँचाई गई हानियों के लिए सहनशीलता विकसित करो। तुम्हें दूसरों के ग़लत कामों को भुला देने और माफ कर देने की सामर्थ्य अपनानी चाहिए। तुम्हें विश्वास होना चाहिए कि भगवान ने सारा विधान मेरे भले के लिए बनाया है और भगवान की सहायता से तथा अपने मन की मज़बूती से मैं अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं पर विजय प्राप्त कर लूँगा, चाहे वह कैसी भी हो।

सच्ची सहनशीलता (लघुकथा)

एक बार प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के शिष्यों ने उनसे पूछा, “गुरुजी, हम सहनशीलता का गुण कैसे विकसित करें?”

सुकरात ने कहा, “कल सुबह मेरे घर आना।”

अगले दिन सुबह जब शिष्य सुकरात के घर पहुंचे, तो घर के बाहर बड़ा कोहराम मचा था। सुकरात की पत्नी बहुत गुस्से में चिल्ला रही थी और बिना किसी बात के सुकरात पर बुरा-भला कह रही थी। सुकरात चुपचाप अपना सिर झुकाए खड़े थे और उनकी हर बात सहन कर रहे थे। जब पत्नी चिल्लाते-चिल्लाते थक गई, तो उसने गुस्से में घर का गंदा कूड़ा भी सुकरात के सिर पर डाल दिया।

शिष्य यह सब देखकर स्तब्ध रह गए। उन्हें लगा कि सुकरात अब गुस्सा करेंगे। लेकिन सुकरात ने सिर्फ हल्का सा मुस्कुराकर कहा, “मैंने सोचा था कि जो बादल गरजते हैं, वे बरसते भी हैं, और आज तुम सच में बरस गईं।”

यह सुनकर उनकी पत्नी शर्मिंदा हो गई और शांत होकर अंदर चली गई।

शिष्यों ने हैरान होकर पूछा, “गुरुजी, आप इतने अपमान के बाद भी शांत कैसे रहे?”

सुकरात ने मुस्कुराकर कहा, “सहनशीलता का अर्थ केवल दुःखों को सहना नहीं है, बल्कि उस समय भी मन में शांति बनाए रखना है जब आप पर अनुचित आरोप लग रहे हों। यह मेरे लिए एक परीक्षा थी, जो मुझे सिखाती है कि मैं कितना सहन कर सकता हूँ।”

कहानी की सीखः सहनशीलता (patience) की शक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य खोने से रोकती है। सहनशीलता जीवन में सहजता लाती है।

सहनशीलता तुम्हारे मन व चेतन शक्ति को मज़बूती देगी और इसे पवित्र करेगी। धीरे-धीरे तुम्हारे विरुद्ध होने वाले हानिकारक प्रभावों के संक्रमण से तुम्हारा मन छुटकारा पा जाएगा। एक सहनशील व्यक्ति सभी बाधाओं को पार कर किसी भी ऊँचाई को प्राप्त कर सकता है। लेकिन

साथ ही तुम्हें अन्याय को भी सहन नहीं करना चाहिए और उसके विरुद्ध आवाज़ उठानी चाहिए। सहनशीलता और कायरता दो अलग-अलग बातें हैं। सहनशील बनो, कायर नहीं।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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