पावन प्रेरणा

 पावन प्रेरणा 


मानव के जीवन में खुशियों का अभाव होता जा रहा है। आज के भौतिकवादी युग में हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के तनाव से ग्रस्त है, फिर चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, धन-प्राप्ति के बाद भी धन की लालसा बढ़ती ही जा रही है। मानव भौतिक वस्तुओं में सुख व शांति की खोज करते-करते अपनी तन-मन की शांति व सुख को खंडित कर बैठता है। अशांति को दूर न कर पाने के कारण वह अवसाद ;डि।ैशनद्ध का शिकार हो जाता है और कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है।

इस डिप्रैशन से बाहर निकलने का एक ही मार्ग है- स्वयं खुश रहना व दूसरों को खुशियाँ बाँटना। यदि व्यक्ति हर विषम परिस्थिति में सकारात्मक सोचने की आदत बना ले तो मन की उदासी एक पल में गायब हो सकती है।

अच्छी पुस्तके पढ़ कर या संगीत की मधुर ध्वनि सुन कर मन के सभी नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते हैं और मन-मस्तिष्क में नवीन ऊर्जा का संचार होने लगता है।

आज का मनुष्य ज़िंदगी की भागमभाग में स्वयं के लिए समय ही नहीं निकाल पाता। उसे यह भान ही नहीं रहता कि एक बार समय हाथ से निकल गया तो वह वापिस लौट कर नहीं आ सकता।

अतः समय रहते समय की कीमत को पहचानो और अपने जीवन का उत्थान करो।

आज हर व्यक्ति उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है और अपने विषय में दक्षता प्राप्त कर रहा है। कम्पीटीशन की दौड़ में सब बेतहाशा दौड़ लगा रहे हैं पर उसके दुष्परिणाम से अनभिज्ञ हैं कि यह दौड़ हमें किस ओर ले जा रही है। कहीं हम ढलान की ओर तो नहीं जा रहे? कई बार सफलता के स्थान पर हताशा और निराशा हाथ लगती है।

लौकिक शिक्षा पुस्तकीय ज्ञान तो दे सकती है पर व्यावहारिक ज्ञान केवल अनुभव से ही प्राप्त किया जा सकता है। आज के शिक्षण केन्द्र अक्षर ज्ञान दे सकते हैं, लेकिन संस्कार देने में असमर्थ हैं। ऐसी शिक्षा, शिक्षा के नाम पर केवल मज़ाक है, जो मनुष्य में मनुष्यता के संस्कारों का रोपण न कर सके और उसे हर परिस्थिति का सामना करने योग्य न बना सके।

मेरी ओर से आपके सुखद भविष्य की कामना करते हुए आप सब को यही सलाह दी जाती है कि हर विषम परिस्थिति का सामना साहस के साथ करो। यदि एक बार व्यक्ति साहस का आश्रय छोड़ देता है, तो उसे फिर से बटोरने में बहुत परिश्रम करना पड़ता है।

सफल व्यक्तियों के जीवन से प्रेरणा लो कि वे किस प्रकार संघर्षों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाए हैं। संघर्ष को जीवन की कसौटी मान कर उस पर खरा उतरने का साहस जागृत करो। गुरु व भगवान में पूर्ण आस्था रखो और यह सूत्र सदा याद रखो- ‘जिनदेवाः वचन औषधि’। भगवान द्वारा कहे गए वचन हर बीमारी में औषधि का कार्य करते हैं। 

ये लेख हर वर्ग के लोगों का तथा विशेषकर युवा पीढ़ी का बहुत सरल व रुचिकर ढंग से मार्ग-दर्शन करने में सक्षम है।

सभी अपने कीमती जीवन का हर पल प्रसन्नता से व्यतीत करें, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखें और आज के तनाव ग्रस्त परिवेश में अपना मानसिक व शारीरिक संतुलन सुदृढ़ करने के लिए इस लेख-श्रृंखला का पठन-पाठन करें ताकि आपके जीवन में सदा खुशियों की बरसात होती रहे और धर्म में वृद्धि हो।

इसीलिए जीवन में खुशियाँ लाने वाले इन निर्देशों का संकलन किया गया है।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद। 


Comments

Popular posts from this blog

मां का पत्र बेटी के नाम

Y for Yourself

Success किसे कहते हैं? (प्रेरणात्मक लेख)

Opportunity को पहचानो (प्रेरणात्मक लेख)

Z For Zeal

माता-पिता का अपने बच्चों पर अंकुशः क्यों, कब तक और कितना?

Negativity: कितनी हानिकारक (प्रेरणात्मक लेख)

Useful या Useless

सुख की Key अपने हाथ

संस्कारों का प्रभाव - वैज्ञानिक दृष्टिकोण