हरियाणा यशोगान
हरियाणा यशोगान
धुन- क्या मिलिए ऐसे लोगों से, जिनकी फितरत छिपी रही,
नकली चेहरा सामने आया, असली सूरत छिपी रही
देशी भाषा, स्वदेशी लिबासा, दूध दही का है खाना,
साहस का यह बिगुल बजाता, मेरा देश है हरियाणा।
गीता का बहता ज्ञान जहाँ, शिक्षा में कृषि विज्ञान जहाँ,
मैं पूजूँ उस माटी को, है दूध दही की खान जहाँ,
धर्मक्षेत्र या कर्मक्षेत्र हो, हरियाणा सबसे आगे,
है नहीं असम्भव काम कोई, जब दृढ़ निश्चय इनका जागे,
योग करें व निरोग रहें, सारी दुनिया को सिखलाना,
साहस ......................।
देश प्रेम जिनके दिल में, हैं ऐसे वीर जवान यहाँ,
आतंकवाद या मैदाने जंग, छोड़े अमिट निशान यहाँ,
करगिल या सैक्टर लाहौर हो, अद्भुत नाम कमाया है,
जान गई पर आन गई न, ये परचम लहराया है,
ले कदम ताल, चले वीर लाल, झुकता है सारा ज़माना,
साहस ............................।
खेलों में नाम है जग जाहिर, है छोटा सा पर बड़े काम,
कुश्ती, क्रिकेट और कबड्डी, मुक्केबाजों से बढ़ी शान,
नहरों में बहता शीतल जल, खेतों में सुरभित हरियाली,
गाँव-गाँव बिजली पानी है, सड़कों की तो बात निराली,
खेती किसान है इसकी जान, और वीर है बाँका मस्ताना,
साहस .....................।
पानीपत और अम्बाला में, उद्योग ने पाँव पसारे हैं,
फरीदाबाद व गुरुग्राम ने कर दिए वारे न्यारे हैं,
अनन्त काल तक बनी रहे, ये हरियाणा की शान,
दिल और जान के बलिदानी हम, ये है भारत की पहचान,
शुभ संदेश है नेक इरादा, सरस्वती को प्रगटाना,
साहस .........................।
अंतरिक्ष में चमका तारा, कल्पना चावला नाम है,
समता का पैगाम सुनाता, ये अग्रोहा धाम है,
दुष्ट चढ़े हैं पाप बढ़े हैं, मेरे पड़ोसी देश में,
अब तो आजा कष्ट मिटा जा, पीताम्बर के वेश में,
'छात्र मित्र' के मुख से लगता, गान है जाना पहचाना,
साहस .............................।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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