Don’t accept less than the best.
- कोई भी ऐसा काम न तो करो और न स्वीकार करो, जो सबसे अच्छे से कम हो।Don’t do or accept anything which is less than the best.
भगवान की दैवीय सन्तान होने के कारण तुम वह प्रत्येक वस्तु ग्रहण करने के हकदार हो, जो सबसे अच्छा है। ऐसा कोई कारण नहीं है, जिसकी वजह से तुम्हें दुःखों, बन्धनों और दासता का जीवन जीना पड़े।
ये सब दुःख तुम्हारे अपने बनाए हुए हैं। लेकिन यह महान कृपा पाने के योग्य बनने के लिए तुम्हारे कन्धों पर एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है कि हर क्षेत्र में, जिनका तुमसे संबंध है, तुम्हें इस दुनिया को अच्छे से अच्छा देना है।
सर्वोत्तम का चयन
राजू एक पेंटर था, जो बहुत ही साधारण कलाकृति बनाता था। उसकी कला में बारीकी तो थी, लेकिन उसमें कोई जोश या नयापन नहीं था। लोग अक्सर उसकी कलाकृति को देखकर उसे ’ठीक-ठाक’ कहकर आगे बढ़ जाते थे। राजू इसी ’ठीक-ठाक’ में खुश था, क्योंकि उसे लगता था कि उसने मेहनत तो की ही है।
एक दिन, शहर में एक प्रसिद्ध चित्रकार, मास्टरजी, आए। राजू अपनी सबसे अच्छी पेंटिंग लेकर उनके पास गया। पेंटिंग देखकर मास्टरजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “राजू! पेंटिंग अच्छी है। लेकिन क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम इससे भी बेहतर कर सकते थे?”
राजू हैरान हो गया, “सर! मैंने इसमें बहुत मेहनत की है।”
मास्टरजी ने कहा, “मेहनत की है, यह ठीक है। लेकिन तुम ’अच्छे’ के साथ समझौता कर रहे हो। जब तक तुम ’सर्वोत्तम’ (best) के लिए समझौता नहीं करोगे, तब तक तुम कभी अपनी कला के शिखर पर नहीं पहुँच पाओगे। ’अच्छा’ हमेशा ’सर्वोत्तम’ का दुश्मन होता है।”
राजू ने मास्टरजी की बात पर विचार किया। उसने अगली पेंटिंग पर अधिक समय लिया, नई तकनीकें सीखीं और हर छोटी-बड़ी बारीकी पर ध्यान दिया। जब उसने अपनी दूसरी पेंटिंग मास्टरजी को दिखाई, तो मास्टरजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “बिल्कुल! अब यह हुई न बात! यह पेंटिंग ’अच्छी’ नहीं, बल्कि ’सर्वोत्तम’ है।”
राजू ने उस दिन यह सबक सीखा कि, “अच्छे से कम कुछ भी स्वीकार करने में समझौता न करो। हमेशा खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करो, क्योंकि तुम इससे भी बेहतर कर सकते हो।”
सीखः
अपने जीवन में, चाहे वह काम हो, रिश्ते हों या फिर आपका अपना व्यक्तित्व, 'अच्छे' (good) पर न रुकें। हमेशा 'सर्वोत्तम' (best) का लक्ष्य रखें। समझौता करने से आप अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग कभी नहीं कर पाएंगे।
अतः अच्छे से कुछ भी कम करने या स्वीकार करने में समझौता न करो। इस का अभ्यास करने के लिए प्रत्येक दिन अपने काम को पिछले दिन किये गये काम से भी अधिक अच्छा करने की कोशिश करो।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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