You can learn from everybody
तुम इस दुनिया में हरेक से सीख सकते हो।You can learn from everybody in the world.
तुम्हें किसी व्यक्ति को हीनता की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। इस दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कुछ नहीं जानता और न ही कोई व्यक्ति ऐसा है, जो सब कुछ जानता है। प्रत्येक व्यक्ति कुछ ऐसा जानता है, जो तुम नहीं जानते। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति से तुम कुछ सीखने व जानने की कोशिश करो।
अनमोल गुरु
बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में आर्यन नाम का एक बहुत ही विद्वान व्यक्ति रहता था। उसे अपनी विद्या और ज्ञान पर बहुत अहंकार था। उसे लगता था कि दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो वह नहीं जानता।
एक दिन उसने सुना कि पास के जंगल में एक महात्मा आए हैं, जो बहुत पहुंचे हुए हैं। आर्यन ने सोचा, “मैं इतना ज्ञानी हूँ, मुझे उस महात्मा से क्या सीखना होगा? लेकिन फिर भी, चलो चलकर देखता हूँ कि वे क्या सिखाते हैं।“
आर्यन महात्मा के पास पहुंचा। महात्मा एक पेड़ के नीचे शांत बैठे थे। उसने महात्मा से पूछा, “महाराज! मैंने वेद-पुराण, शास्त्र, सब पढ़ लिए हैं। क्या आप मुझे कुछ ऐसा सिखा सकते हैं, जो मैं नहीं जानता?“
महात्मा मुस्कुराए और उन्होंने कुछ नहीं कहा। वे उठे और झोपड़ी के पीछे एक छोटी-सी पगडंडी पर चलने लगे। आर्यन भी उनके पीछे-पीछे चलने लगा। चलते-चलते, महात्मा ने एक छोटी सी चींटी को देखा, जो अपने से दुगना बड़ा चावल का दाना लेकर एक दीवार पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी। दाना बार-बार नीचे गिरता, लेकिन चींटी हार नहीं मानती और फिर से कोशिश करती। अंत में, वह सफल हो गई।
महात्मा ने आर्यन की ओर देखा और कहा, “सीख नंबर एकः निरंतर प्रयास (persistence)।”
थोड़ी दूर आगे, महात्मा ने देखा कि एक बच्चा मिट्टी के घर बना रहा था। थोड़ी ही देर में बारिश शुरू हो गई और उसका घर टूट गया। बच्चा रोया नहीं, बल्कि तुरंत दूसरा घर बनाने में जुट गया। महात्मा ने कहा, “सीख नंबर दोः असफलता से निराश न होकर फिर से शुरुआत करना।”
फिर महात्मा एक सूखे पेड़ के पास रुके और कहा, “सीख नंबर तीनः यह पेड़ सबको फल-छाया देता था, आज सूख गया है, लेकिन लकड़ी के रूप में अभी भी काम आ रहा है। यानी, जीवन के अंत तक उपयोगी बने रहना।”
आर्यन का अहंकार धीरे-धीरे कम हो रहा था। उसे समझ आ गया था कि ज्ञान सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि जीवन के हर छोटे अनुभव में है।
महात्मा ने अंत में कहा, “पुत्र, ज्ञान का कोई अंत नहीं है। जब तक तुम्हारे अंदर सीखने की जिज्ञासा है, तब तक तुम दुनिया में हर इंसान, हर छोटी-बड़ी वस्तु, और प्रकृति से कुछ न कुछ सीख सकते हो। जिस दिन तुमने मान लिया कि तुम सब जानते हो, उसी दिन तुम्हारा विकास रुक जाता है।”
आर्यन ने महात्मा के पैर छुए और समझ गया कि सच्चा ज्ञानी वह नहीं जो सब जानता है, बल्कि वह है जो हर पल सीखने के लिए तैयार रहता है।
सीखः
“तुम दुनिया में हर किसी से, हर हाल में, कुछ न कुछ सीख सकते हो, बशर्ते तुम्हारा मन सीखने के लिए खुला हो।”
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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