मुसाफ़िरखाना (शब्दचित्र)
मुसाफ़िरखाना (शब्दचित्र)
(22-03-2026)
प्रेरणा स्रोत - कल 21-3-2026 को मंदिर जी में मुनिश्री निश्चिन्त सागर महाराज ने कहा कि कल मुझे हिसार से विहार करना है, तो मेरे मन में विचार आया कि हमें भी तो एक दिन दुनिया से विहार करना है। बस! उसी विचार ने इस कविता को जन्म दिया।
दुनिया क्या है, एक मुसाफ़िरखाना है,
सब आते हैं, इक दिन सबको जाना है।
1.
सामानों की गठरी, लेकर बैठे हैं,
ट्रेन की सीटी सुन, सामान उठाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
2.
आसपास के सब, अपने से लगते हैं,
सिग्नल होते ही, सब को छोड़ के जाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
3.
ट्रेन के आते ही सब के दिल, लगे धड़कने,
जल्दी-जल्दी कदम को, आगे बढ़ाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
4.
एक स्थान पर सभी, इकट्ठे हो गए हैं,
भीड़ से बच कर, आगे बढ़ते जाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
5.
प्लेटफार्म पर भगदड़, मचने लगी है अब,
अपना डिब्बा, खुद ने ही पहिचाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
6.
माल असबाब उठाया, लेकिन छूट गया,
भार बहुत था, यहीं छोड़ कर जाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
7.
चलने से पहले सोचा, पानी तो पी लूं,
पर खत्म हुआ अब, अपना पानी-दाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
8.
संगी-साथी सभी, यहीं पर रह गए,
खुद डिब्बे में चढ़, मंज़िल को पाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
9.
ट्रेन ने चलने की, सीटी को बजा दिया,
अपनी मंज़िल को हम, हुए रवाना हैं।
दुनिया क्या है, एक...........।
10.
ट्रेन हवा से करने लगी है, अब बातें,
मुझको उसने मंज़िल तक, पहुँचाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
11.
अब न याद करो, मुझको मेरे साथी,
मरघट पर ही अंतिम, बना ठिकाना है।
दुनिया क्या है, एक...........।
12.
मुझको अपनी मंज़िल तक, जाने दो अब,
मोक्ष महल ही, मेरा नया ठिकाना है।
दुनिया क्या है, एक मुसाफ़िरखाना है,
सब आते हैं, इक दिन सबको जाना है।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद।

Very nice👌🏻
ReplyDelete