External circumstances & stress.

 बाह्य परिस्थितियां अपने आप में तनाव उत्पन्न नहीं कर सकती।
External circumstances, on their own, can't create stress.


कुछ लोगों की यह ग़लत धारणा है कि कुछ बाह्य कारण या कोई अन्य व्यक्ति उनके तनाव का ज़िम्मेदार है और जब तक ये बाह्य परिस्थितियां नहीं बदलती, वे ख़ुश नहीं रह सकते। लेकिन ये तनाव के कारणों के नियम के बारे में ग़लत धारणा है। प्रायः तुम्हारे चारों ओर के लोगों और परिस्थितियों को तुम नहीं बदल सकते, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि तुम जीवन भर तनावग्रस्त रहोगे। जैसा पहले बताया गया है, यह बाह्य परिस्थितियां नहीं, बल्कि उनके प्रति तुम्हारी प्रतिक्रिया है जो तनाव का कारण है। तुम अपनी प्रतिक्रियाओं को इस प्रकार नियंत्रित कर सकते हो, जैसे जो कुछ बाहरी दुनिया में घटित हो रहा है, वह तुम्हें भावनात्मक रूप से कभी प्रभावित नहीं कर सकता, चाहे कुछ भी हो जाए।
यह नियंत्रण तुम्हारे मन को बाहरी परिस्थितियों के प्रभाव से मुक्त करने के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करेगा। इस परिस्थिति में मन एक स्वामी की तरह और बाह्य परिस्थितियां एक दास की तरह व्यवहार करेंगी, ताकि मन बाह्य परिस्थितियों पर नियंत्रण कर सके, बजाय कि उनके द्वारा नियंत्रित हो जाए।
बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उन्हें देखने का हमारा नजरिया तनाव पैदा करता है:

ग्लास और पानी (लघुकथा)

एक मनोवैज्ञानिक कक्षा ले रहे थे। उन्होंने पानी से भरा एक गिलास उठाया और पूछा, "आपके अनुसार इस गिलास का वजन कितना होगा?"

छात्रों ने अलग-अलग उत्तर दिए- "100 ग्राम", "200 ग्राम", "300 ग्राम"।

मनोवैज्ञानिक ने मुस्कुराते हुए कहा, "वास्तविक वजन मायने नहीं रखता। महत्व इस बात का है कि आप इसे कितनी देर तक उठाकर रखते हैं।"

"अगर मैं इसे एक मिनट के लिए उठाऊं, तो यह बहुत हल्का है। अगर मैं इसे एक घंटे के लिए उठाऊं, तो मेरे हाथ में दर्द होने लगेगा। और अगर मैं इसे पूरे दिन उठाऊं, तो मेरा हाथ सुन्न हो जाएगा और लकवाग्रस्त महसूस करेगा।"

छात्र ध्यान से सुन रहे थे। उन्होंने आगे कहा, "हर मामले में गिलास का वजन समान था, लेकिन मैं इसे जितनी देर तक पकड़े रहता हूं, यह उतना ही भारी होता जाता है।"

कक्षा में सन्नाटा छा गया। छात्र समझ गए कि तनाव और चिंता भी बिल्कुल इसी गिलास की तरह हैं।

निष्कर्ष:

थोड़ी देर तक तनाव के बारे में सोचो, कुछ नहीं होगा। थोड़ी देर और सोचो, तो दर्द होने लगेगा। और अगर पूरे दिन इसके बारे में सोचते रहोगे, तो आप पंगु हो जाओगे- कुछ भी करने में असमर्थ।

शिक्षा: जीवन की बाहरी परिस्थितियाँ हमारे वश में नहीं हो सकतीं, लेकिन उन परिस्थितियों के 'गिलास' को कितनी देर तक दिमाग में 'पकड़कर' रखना है, यह पूरी तरह हमारे वश में है। तनाव मुक्त रहने के लिए, तनाव को जल्दी छोड़ना सीखें।

बाह्य परिस्थितियां तनाव को बढ़ाने में आवश्यक सामग्री प्रदान करती हैं और ईंधन का काम करती हैं, पर वे स्वयं तनाव का कारण नहीं हैं। वे केवल तभी मन में तनाव व पीड़ा उत्पन्न करती हैं, जब यह ईंधन मन की माचिस से सुलगता है। अतः तनाव का पहला कारण मन है। बाह्य परिस्थितियां दूसरे कारण का काम करती हैं। मन के समर्थन के बिना कोई अवस्था या परिस्थिति तनाव देने का काम नहीं कर सकती, तो भी इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी को अपने बाह्य वातावरण या परिस्थिति को अच्छा बनाने के लिए उन्हें बदलने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए। जिस सीमा तक तुम अपने वातावरण को अच्छा बनाने के लिए बदल सकते हो, तुम्हें अवश्य बदलना चाहिए। एक सकारात्मक वातावरण निश्चय ही तनाव को हटाने के लिए सहारा देने का काम करेगा।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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