मंगल आशीर्वाद

 मंगल आशीर्वाद

13 अप्रैल 2026 को श्रीमती अमृत मनोचा एवं श्री नरेंद्र मनोचा के वैवाहिक महोत्सव की ५०वीं स्वर्ण वर्षगांठ की मंगल शुभकामना और आशीर्वाद

वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से

दीप शिखाओं की तरह, जीवन हो रोशन आपका, अच्छा बीता है भूत, वर्तमान; चमकता रहे भविष्य भी आपका।

अभिनन्दन है कर रहा, यह जनसमूह विशाल, मनोचा कुल के चिराग हो, हो उम्र हज़ारों साल।

नरेंद्र जी संग अमृत जी ने बांधी जीवन डोर, कर रहे परिवार का दोनों, जग में ऊँचा भाल।।

आपके चेहरे पर कुदरत का नूर नज़र आता है, आपका दामन ख़ुशियों से भरपूर नज़र आता है।

वैवाहिक जीवन के किए पूरे बेमिसाल पचास साल, आपका भविष्य भी आनन्द से सराबोर नज़र आता है।। 

सनातन वैवाहिक परम्परा में जीवन कमाल है, गृहस्थी में दो आत्माओं का मिलन बेमिसाल है।

यह बंधन 100-50 सालों का नहीं, सात जन्मों का विधान है,

इसलिए इस में सर्वश्रेष्ठ रिश्तों का प्रावधान है।।

गृहस्थाश्रम केवल एक भूमिका नहीं, यह बड़ा परिवार है, इस परिवार में होता, अनेक रिश्तों का विस्तार है।।

सुखी परिवार ही जीवन, समाज व राष्ट्र का आधार है, यह सृष्टि की रचना का भी सशक्त सूत्रधार है।।

गृहस्थी मानव के प्रशिक्षण की कर्मशाला है, समाज के रीति रिवाज़ों व नियमों की प्रयोगशाला है।।

प्यार, सुरक्षा, आचरण, व्यवहार का आगार है, सुख, शांति, संतोष व समृद्धि का भण्डार है।।

हर प्रकार के सुख-दुःख का बड़ा भागीदार है, परिवार से जुड़ा व्यक्ति नहीं, होता कभी लाचार है।।

यह हमारी जीवन शैली व संस्कृति का आधार है, मिलते हैं जहाँ विरासत में, सभी गुण और संस्कार हैं।।

इस में ऊँच-नीच, कमज़ोर-सशक्त, सभी भेद भाव छिप जाते हैं,

परिवार एक जुट रहने से, दिन बुरे कभी नहीं आते हैं।। 

यह उपवन विभिन्न प्रकार के, फूलों का है गुलदस्ता, हर सदस्य के पुष्पित व पल्लवित होने का है रास्ता।।

नरेंद्र जी और अमृत जी भी हैं,  इस गृहस्थ जीवन का हिस्सा,

जीवन की कैमिस्ट्री और गणित, मिलाने का सुन्दर किस्सा।।

सद्गृहस्थों को आप का अनुसरण करना चाहिए, अपने जीवन को सरल, सुन्दर बनाना चाहिए।।

13 अप्रैल 76 में आप दोनों बंधे इस बंधन में,  लगने लगा कि जैसे सबके ख्वाब थे पूरे हुए।।

बीते 50 वर्षों में गम भी थे, और ख़ुशियां भी, पतझड़ भी, संघर्ष भी, अपकर्ष भी, उत्कर्ष भी।।

रूठना मनाना भी था, रोना और हंसाना भी था, एक दूसरे के साथ, घर को बसाना भी था।।

बिना रुके, बिना थके, चलते रहे, चलते रहे, आज जीवन के सफ़र में, अपनी मंज़िल पा गए।।

आप के उज्ज्वल भविष्य की, मैं मंगल कामना करता हूँ, भविष्य आपका रोशन हो, मैं यही भावना करता हूँ।।

आप सदा स्वस्थ रहें, चढ़दियां कलां, आयुष्मान भव!!!

आपके सारे परिवार, बेटे व बेटी को भी इस मंगल बेला पर बधाई हो!!

इसी शुभाशीर्वाद के साथ यह शब्दांजलि स्वीकार करें!!

द्वाराः गगन नेहा मनोचा (पुत्र-पुत्रवधु)

राविया, अनायरा (पोतियां)


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