सुख की Key अपने हाथ
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दुःख को सुख में बदलने की कला
सुख की Key अपने हाथ (प्रेरणात्मक लेख)
Image by Pezibear from Pixabay
एक आदमी की हवेली में तहखाना बना था। बुज़ुर्गों से सुना था कि उसमें एक बड़ा खज़ाना ताले में बंद रखा है। पर उसकी चाबी का पता नहीं चल रहा है। वह आदमी भिखारी जैसा दयनीय जीवन जी रहा था। उसने गाँव के अनुभवी लोगों को अपनी व्यथा-कथा सुनाई और उनसे पूछा कि क्या आपको मालूम है उस खज़ाने की चाबी के बारे में? मैं इतने बड़े खज़ाने का स्वामी होकर भी भीख माँगता फिर रहा हूँ।
एक अनुभवी व्यक्ति ने कहा कि मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। मेरे पास चार चाबियाँ हैं। कोई-न-कोई चाबी तो उस ताले को खोल ही देगी। वह अनुभवी व्यक्ति के साथ तहखाने में पहुँचा तो उसकी पहली ही चाबी से ताला खुल गया। उसने शेष तीनों चाबियाँ भी खज़ाने के स्वामी को दे दी और कहा कि कभी एक चाबी खो जाए तो दूसरी चाबी से खोल लेना। देखो तो सही! इस खज़ाने में क्या है?
खोलकर देखा तो आँखें खुली की खुली रह गई। ओह! मैं इतने बड़े भण्डार का स्वामी था। जब तक ताला खुला नहीं था, तब तक फटेहाल था और जब खुल गया तो निहाल हो गया। क्या आप को मालूम है कि यह खज़ाना हम सब के पास है और चाबी भी है, पर हम चाबी को उल्टी दिशा में घुमा रहे हैं। ताला खोलने के लिए चाबी को सही दिशा में घुमाना पड़ता है।
वह खज़ाना है सुख का और उस पर अज्ञान का ताला लगा हुआ है। उसे खोलने की चार Keys हैं।
Acceptance, Understanding, Ignore और Tolerance.
1. Acceptance -
चाहते तो सब हैं कि I want peace.. लेकिन एक Single piece भी नहीं है शांति का तुम्हारे जीवन में।
I अर्थात् ‘मैं’ का अहंकार हटा दो, Want अर्थात् इच्छाओं की भीड़ भगा दो तो रह जाएगा केवल Peace अर्थात् शांति।
Simple सा Formula है - हम सोचते हैं कि सुख-दुःख बाहरी परिस्थितियों का परिणाम है, पर यह हमारी भूल है। हम आई हुई परिस्थिति को स्वीकार नहीं कर पा रहे, इसलिए हम दुःखी हो जाते हैं। हमारी Emotions ही हमें सुखी-दुःखी बनाती हैं।
एक आदमी की घड़ी खो गई। उसने नौकर को कहा कि देखो! शायद कहीं मिल जाए। नौकर उसे मालिक की घड़ी मान कर, अपना कर्त्तव्य समझ कर खोज रहा है। उसे घड़ी खोने का कोई दुःख नहीं है। तभी मालिक ने कहा कि घड़ी को भी आज ही खोना था। आज तो मैं तुम्हें वह घड़ी ईनाम में देने वाला था। बस! नौकर की भावनाएं उस घड़ी के साथ जुड़ गई और वह उसके न मिलने से दुःखी होने लगा।
एक व्यक्ति ने अखबार में अपनी लॉटरी की टिकट का नंबर मिलाया तो देखा कि उसके नंबर पर एक करोड़ की लॉटरी का ईनाम निकला है। उसने सब को सूचित कर दिया कि I am Lucky. मेरा एक करोड़ की लॉटरी का ईनाम निकला है। चारों ओर से बधाई के संदेश आने लगे। दोस्तों ने बड़े होटल में एक लाख की दावत भी उडा़ ली। अगले दिन तक सरकारी सूचना की प्रतीक्षा की और जब अगले दिन का अखबार पढ़ा तो उसमें ‘भूल-सुधार’ के Column में लिखा था कि कल जिस नंबर पर एक करोड़ की लॉटरी का ईनाम निकला था, उसमें पहले अंक 9 के स्थान पर 8 पढ़ें।
कल तक जो खुशी का पैगाम था, आज वह मातम का पैगाम लेकर आया और सारे सुख को दुःख में बदल गया। पैसा तो न उसे कल मिला था और न आज। भावनाएं ही सुख को दुःखरूप में बदल गई।
एक सुख का Switch on हुआ तो Light जल गई और Off हुआ तो light बुझ गई। हर परिस्थिति को सहज भाव से स्वीकार कर लोगे तो सुख-शांति मिल जाएगी, वरना सुख के खज़ाने पर अज्ञान का ताला तो लगा ही हुआ है।
2. Understanding -
हर परिस्थिति के पीछे दुःख मिलने का कोई कारण छिपा होता है। उसे समझने का प्रयास करो। हम समझ नहीं पाते या आधी-अधूरी समझते हैं, इसीलिए Negative प्रतिक्रिया करते हैं और दुःखी होते हैं।
दो दोस्त बहुत दिनों के बाद एक-दूसरे से मिले। उसी शहर में रहने वाला दोस्त दूसरे दोस्त को अपने घर लेकर आया और अच्छी आवभगत की। चलते समय दूसरे दोस्त ने भी उसे अपने घर दिल्ली आने का निमंत्रण दिया कि आने से पहले मुझे सूचना दे देना। मैं स्वयं गाड़ी लेकर स्टेशन पर पहुँच जाऊँगा।
नियत समय पर जब वह दिल्ली पहुँचा तो दिल्ली वाला दोस्त नदारद। बहुत बुरा लगा कि बातें तो इतनी बड़ी-बड़ी करता था, काम का समय आया तो परवाह भी नहीं की। भुनभुनाता हुआ Taxi Stand की ओर बढ़ा। एक Hotel के सामने पहुँचा। उसके सामने एक Hospital था और जैसे ही उसकी नज़र सामने की ओर गई तो उसने देखा कि वही मित्र अपने पिता को सहारा देकर गाड़ी से उतार कर Hospital की ओर जा रहा था। वह भी उसके पास गया तो पता चला कि Station आने के लिए गाड़ी निकाली ही थी कि पिताजी को Heart Attack आ गया और उन्हें तुरन्त Hospital लाना पड़ा। तुम्हें सूचना भी नहीं दे पाया।
अब क्षमा मांगने की बारी पहले मित्र की थी - No, No. I understand your situation. सामने वाले की स्थिति समझ लो तो सुख और न समझो तो दुःख। क्यों न बाद में समझने के स्थान पर पहले ही Positive Attitude रखो।
3. Ignore -
मन को बाधित करने वाले प्रसंगों को नज़र अन्दाज़ करो। सड़क पर चलते हुए कोई पागल तुम्हें गालियाँ दे तो उसे भी तो पागल कह कर छोड़ देते हो। यदि तुम अपने सुख को खंडित नहीं करना चाहते तो किसी परिचित ने तुम्हें कोई अपशब्द कह दिया तो उसे भी असंतुलित मन वाला समझ कर Ignore कर दो।
4. Tolerance -
चौथी Key है सहनशीलता की। जिसे सहना आ गया, उसे रहना आ गया। एक व्यक्ति धन के व्यापार में तो सहन कर लेता है और जीवन के व्यापार में असहिष्णु बन जाता है। एक इत्र का व्यापारी अपनी फैक्टरी में टीन के शेड के नीचे छोटे से Cooler के आगे 6-8 घंटे तक बैठ सकता है क्योंकि उसे पता है कि इत्र का भाव 4 लाख रुपए किलो है। किसी ने थोड़ा-सा भी इत्र चुरा लिया तो उसका व्यापार बैठ जाएगा। वही आदमी अपने घर पहुँच कर 6 मिनट भी A.C. के बिना नहीं बैठ सकता। क्रिकेट के मैच का आनन्द लेने के लिए 7-8 घंटे तेज़ धूप में बैठ सकते हो और जीवन का आनन्द लेने के लिए थोड़ा-सा दुःख सहन करना आ जाए तो जीवन सज़ा नहीं मज़ा बन जाएगी।
परम सुख का खज़ाना इन चारों चाबियों से खुल सकता है। अतः इन्हें सदा अपनी ज़ेब में सम्भाल कर रखना।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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