inferiority complex
कभी हीन भावना न रखो। जो काम अन्य कर सकते हैं, वह तुम भी कर सकते हो।
Don't have inferiority complex. What others can do, you can also do.
कई लोगों में हीन भावना होती है कि वे कुछ विशेष कार्य नहीं कर सकते जो एक सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है। सबकी सक्षमता और योग्यता वास्तव में एक समान है। कोई भी हमसे अच्छा या बुरा नहीं है। शर्त यह है कि हम अपने मन की शक्ति को ध्यान (Meditation) और आत्मा की चेतना के द्वारा खोज सकें। कारण यह है कि सभी आत्माओं में, जहाँ तक उनके मौलिक विशिष्ट गुणों का संबंध है, निश्चित रूप से एक समानता है। उनमें रंच मात्र भी अंतर नहीं है। अतः कभी भी दूसरों से तुलना मत करो और न ही हीन भावना का अनुभव करो।
हिना और पंख
एक छोटे से गाँव में हिना नाम की एक लड़की रहती थी। वह बहुत दयालु और मेहनती थी, पर हमेशा खुद को दूसरों से कम समझती थी। उसके छोटे कद और पतली आवाज़ के कारण, उसे लगता था कि वह किसी काम की नहीं है। स्कूल में जब सब दोस्त हंसते या खेलते, तो हिना कोने में खड़ी होकर उन्हें देखती, क्योंकि उसे लगता था कि उसकी आवाज़ और कद किसी मज़ाक से कम नहीं।
एक दिन, गाँव में एक बड़ा मेला लगा। सभी बच्चे मेले में जा रहे थे, पर हिना उदास थी। उसे डर था कि लोग उसे देखकर हँसेंगे। तभी, एक बूढ़ी औरत ने उसे देखा और पूछा, “क्यों उदास हो, बेटी?“
हिना ने हिचकिचाते हुए बताया, “मैं... मैं किसी के साथ नहीं खेल सकती, दादी! मैं इतनी छोटी और कमज़ोर हूँ, सब मेरा मज़ाक उड़ाते हैं।“
दादी मुस्कुराईं और बोलीं, “बेटा, हर किसी के पास एक गुणों की ख़ूबसूरती होती है, जो दूसरों से अलग होती है। तुम्हारे पास जो दया और मेहनत है, वह किसी और के पास नहीं और सुनो, इस दुनिया में कोई भी ’कम’ नहीं होता, बस हर किसी का ’पंख’ अलग होता है।“
दादी ने हिना को एक छोटा-सा कागज़ का पंख दिया और कहा, “इसे अपने पास रखो। जब भी तुम्हें लगे कि तुम कमज़ोर हो, इस पंख को देखना। यह तुम्हें बताएगा कि तुम कितनी ऊँची उड़ान भर सकती हो।“
हिना ने पंख लिया। अगले दिन मेले में, जब एक छोटा बच्चा रो रहा था और उसकी माँ परेशान थी, हिना ने आगे बढ़कर बच्चे को शांत किया और उसकी खोई हुई गुड़िया ढूंढ निकाली। बच्चा और उसकी माँ प्रसन्न हो गए। सबने हिना की तारीफ़ की।
उस दिन हिना को समझ आया कि उसके पास भी एक ’पंख’ है - उसका अच्छा दिल और दूसरों की मदद करने की इच्छा। उसने अपनी तुलना दूसरों से करना छोड़ दिया और खुद को ’कम’ समझने की हीन भावना को पीछे छोड़कर, अपने ’पंखों’ पर उड़ना सीख लिया।
हर व्यक्ति अनोखा होता है और हर किसी में कोई न कोई ख़ास खूबी होती है। अपनी तुलना दूसरों से करना छोड़कर, अपनी शक्तियों को पहचानना चाहिए।
यह आत्मविश्वास दृढ़ रखो कि जो काम दूसरे लोग कर सकते हैं,
वह तुम भी कर सकते हो। यहाँ प्रश्न केवल तुम्हारी सुप्त मानसिक योग्यता को जगाने का है। वास्तव में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे हम अपने मन-मस्तिष्क को उन्नत कर के हल नहीं कर सकते और यदि हम अपने उन्नत मस्तिष्क को भगवान के साथ मिला कर चलें, तब हम भगवान के द्वारा प्रदान की गई इस महान शक्ति को और अधिक बढ़ा सकते हैं।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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