गीता सार

गीता सार
वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से

व्यर्थ  चिन्तित हो रहे हो

व्यर्थ डर कर रो रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो

(1)

जो हुआ अच्छा हुआ

जो हो रहा है अच्छा ही है

होगा जो अच्छा ही होगा

ये नियम सच्चा ही है

गर भुला दो बोझ कल का

आज तुम जो ढो रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो ........

(2)

जिस को तुम मृत्यु समझते

है वही जीवन तुम्हारा

है नियम जग का बदलना

क्या पराया क्या तुम्हारा

एक क्षण में कंगाल हो

क्षण भर में धन से मोह रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो.......

(3)

है किराए का मकान

न हो तुम इस के, न ये तुम्हारा

पँच तत्त्वों का बना घर

यह देह है कुछ दिन का सहारा

इस मकान में हो मुसाफ़िर

किस कदर यूँ सो रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो........

(4)

क्या गया तुम रो पड़े हो

तुम लाए क्या थे जो खो दिया

व्यर्थ ग्लानि से भरा मन

आँसुओं से जो धो रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो........

(5)

हुई भूलों का फिर आज पश्चाताप क्यों

कल क्या होगा अनिश्चित

आज फिर संताप क्यों

जुट पड़ो कर्त्तव्य में तुम

बाट किस की जोह रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो........

(6)

ले के खाली हाथ आए

जो लिया यहीं से लिया

जो लिया नसीब से उसको

जो दिया यहीं पर दिया

जान कर दस्तूर जग का

क्यों परेशां हो रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो........

(7)

जो तुम्हारा आज है

कल वो ही था किसी और का

होगा परसों जाने किसका

यह नियम सरकार का

मगन हो अपना समझना

दुःखों को संजो रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो........

(8)

मेरा तेरा छोटा बड़ा

भेद ये मन से हटा दो

सब तुम्हारे तुम सभी के

फासले मन से हटा दो

कितने जन्मों तक करोगे

पाप जो तुम कर रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो........

(9)

जो करो जो भी करो

अर्पण करो भगवान को

सदा कर दो समर्पण

त्याग कर अभिमान को

मुक्ति का आनन्द अनुभव

सर्वदा क्यों खो रहे हो 

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो........

(10)

उठो अपने आप को

भगवान के अर्पण करो

अपनी चिन्ता शोक और भय

सब उसे अर्पित करो

है वही उत्तम सहारा

क्यों सहारा खो रहे हो

अजन्मा है अमर आत्मा

भय में जीवन खो रहे हो ..

सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।  

Comments

  1. Beautiful Thought

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  2. अति उत्तम विचार और उनका विस्तृत विवरण

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