पतन से बचें

 पतन से बचें

वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से 

           भोगों का चिन्तन करने से आसक्ति होती है।          

आसक्ति से कामना पैदा होती है।

कामना पूरी न होने पर क्रोध आता है।

क्रोध आने से मोह पैदा होता है।

मोह होने पर मूढ़ता आती है।

मूढ़ता से स्मृति नष्ट होती है।

स्मृति नष्ट होने पर विचार-शक्ति नष्ट होती है।

विचार-शक्ति नष्ट होने से विवेक नष्ट होता है।

विवेक नष्ट होने से आदमी का पतन होता है।

आदमी का पतन होने से उसका जीवन ही नष्ट हो जाता है।

इसलिए विषयों का चिन्तन नहीं करना चाहिए।

सावधान रहें।

हम क्या कर रहे हैं?

हम अज्ञान खा रहे हैं।

डर पी रहे हैं।

अन्याय ढो (ओढ़) रहे हैं। 

असन्तोष पहिन रहे हैं।

अन्धकार में भटक रहे हैं।

विकारों में जी रहे हैं।

व्यर्थ की कामना कर रहे हैं।

अविश्वास से भर रहे हैं।

व्यर्थ चिन्तन कर रहे हैं।

कर्मकाण्ड में समय नष्ट कर रहे हैं।

आत्म-ज्ञान की मशाल के प्रकाश से इन सब बुराइयों से छुटकारा पाया जा सकता है।

अतः सावधान रहें। व्यर्थ के विचारों का त्याग करें।

प्रेषिका- सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

Comments

  1. Absolutely True Marvellous and Beautiful Thought

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