माता-पिता
माता-पिता की परिभाषा, महत्त्व व गुणवेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से
पिता
पिता एक प्यार ए, ताज ए
पिता एक दुलार ए, समाज ए
पिता एक कवच ए, दयालु ए
पिता एक रक्षक ए, कृपालु ए
पिता एक कर्म ए, महान ए
पिता एक श्रम ए, भगवान ए
पिता एक आकाश ए, विकास ए
पिता एक प्रयास ए, किरदार ए
पिता एक व्यवहार ए, सरदार ए
पिता एक सदाचार ए, संस्कार ए
पिता एक अनुभूति ए, विभूति ए
पिता एक पथ ए, रथ ए
पिता एक शक्ति ए, भक्ति ए
पिता एक आदर्श ए, संघर्ष ए
पिता एक विधि ए, विधान ए
पिता एक शान ए, निशान ए
पिता एक मान ए, सम्मान ए
पिता एक कुल ए, अतुल ए
पितृ-भक्ति को निभाया राम-कृष्ण-श्रवण-गोविन्द ने,
पिता सृष्टि-समाज की रचना का आधार ए
पिता के आदर्श पर जो चला,
उसका यहाँ भी बेड़ा पार है और वहाँ भी बेड़ा पार है।।
माता
म - ममता है, मौन है, मर्यादा है, माधुर्य की मिसाल है माता
आ - आन है, स्वमान है, अरमान है, अनुष्ठान है, आसमान है माता
त - त्याग है, तपस्या है, तत्त्व है, तम का निदान है माता
आ - आस है, आरती है, अरदास है, आरोग्य का विधान है माता
माता प्रभु की अद्भुत कृति है
माता ममता की प्रतिमूर्ति है
माता सृष्टि की रचना का मूल है
माता ही पालनहार कन्दमूल है
माता चमकता प्रकाश का पुंज है
माता ज्ञान, स्नेह का कुंज है
माता जगत का दृढ़ विश्वास है
माता द्वारा ही सृष्टि का विकास है
माता जैसा सम्बन्ध और हो नहीं सकता
माता का विकल्प और हो नहीं सकता
माता को न समझे, वह नादान है
स्वयं को सब कुछ समझना अज्ञान है
माता जप, तप, पूजा, संयम का विधान है
माता ही अरदास, प्रार्थना, आरती का प्रावधान है
मातृ-सेवा से कष्ट-क्लेश मिट जाते हैं
मातृ-सेवा से ही सुख, शान्ति, समृद्धि आती है
माता समाज व संसार का अद्भुत व्यवहार है
माता ही 84 लाख प्राणियों का उपहार है
माता ईश्वर का सर्वश्रेष्ठ वरदान है
माता ही स्वयं ईश्वर की पहिचान है
ईश्वर के बाद यदि कोई है, तो माता है
सृष्टि की भाग्य विधाता है, तो माता है
माता का मान, सम्मान, अभिनन्दन, वन्दन कीजिए
अपने आप को मातृ-पितृ-गुरु-समाज व देश-दुनिया के ऋण से उऋण कीजिए
प्रेषिका- सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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