बेटे व बेटी में अन्तर

  बेटे व बेटी में अन्तर

वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से

बेटा वारिस है, बेटी पारस है

बेटा वंश है, बेटी अंश है

बेटा आन है, बेटी शान है

बेटा तन है, बेटी मन है

बेटा मान है, बेटी गुमान है

बेटा संस्कार है, बेटी संस्कृति है

बेटा राग है, बेटी बाग है

बेटा दवा है, बेटी दुआ है

बेटा भाग्य है, बेटी विधाता है

बेटा शब्द है, बेटी अर्थ है

बेटा गीत है, बेटी संगीत है

बेटा प्रेम है, बेटी पूजा है

बेटा महान है, बेटी वरदान है

बेटी को पूजो, साधो, मान-सम्मान करो

बेटी को शृंगारो नहीं, भोगो नहीं, मारो नहीं

बेटी से ही रचा जाता जहान है

अगर गहराई से विचार करें और परखें

तो बेटी ही साक्षात् देवी, शिवशक्ति और भगवान है।

प्रेषिका- सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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