Don’t compare
तुलना मत करो। Don’t compare.
कुछ लोगों की आदत होती है, दूसरों के साथ तुलना करना और हमेशा हताश रहना। ऐसे लोगों को महसूस करना चाहिए कि इस बड़ी दुनिया में तुलना का कोई अन्त नहीं है।
अनूठा कौवा
एक जंगल में एक कौवा रहता था। वह अपने काले रंग से बहुत दुःखी था। उसने एक संत से हंस जैसा सफेद और सुंदर बनाने की विनती की।
संत ने कहा, “हंस से पूछो, क्या वह सुखी है?“
कौवा हंस के पास गया। हंस ने कहा, “मैं गोरा तो हूं, लेकिन मैं तालाब में कैद रहता हूँ। मुझे कोई खाना नहीं देता। मैं स्वयं को बेकार समझता हूं। तुम्हारे पास तो आजादी है, तुम कहीं भी जा सकते हो।“
कौवा समझ गया कि गोरा होना ख़ुशी का कारण नहीं है, उसकी आकाश में उड़ने की स्वतंत्रता ही उसकी असली ताकत है। उसने किसी से अपनी तुलना करना बंद कर दिया और अपनी जिंदगी में खुश रहने लगा।
शिक्षाः अपनी तुलना कभी किसी से मत करें। जो आपके पास है, वह सबसे अनमोल है। तुम किसी भी पद पर पहुँच जाओ, लेकिन हमेशा कुछ ऐसे लोग होंगे, जो तुमसे ऊपर होंगे और कुछ ऐसे भी लोग होंगे, जो तुमसे नीचे होंगे। यह दुनिया की प्रकृति (स्वभाव) है।
इसी प्रकार चाहे कितनी भी सुंदर और मूल्यवान वस्तुएं तुम खरीद लो, लेकिन फिर भी कुछ चीज़ें ऐसी होंगी जो उनसे भी अच्छी होंगी। यदि वे आज नहीं हैं, तो कल उपस्थित हो जाएंगी। इसलिए इस पागल दौड़ में अपने आप को शामिल मत करो। जो तुम्हें थोड़ा बहुत मिला है, उसी में सन्तुष्ट रहने का प्रयत्न करो और हमेशा अपने दिमाग़ में यह बात रखो - इस परिवर्तनशील दुनिया में ऐसी चीज़ें अवश्य होंगी जो उनसे भी अधिक अच्छी होंगी जो तुम्हारे पास हैं। तुम तो स्वयं को अच्छा बनाने का प्रयत्न करो।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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