Do you feel lonely.

क्या आप अकेलापन और ऊब अनुभव कर रहे हो?
Do you feel lonely & bored.

आध्यात्मिक भाषा में अकेला आदमी वह है जो अपने आप कोनहीं जानता और वास्तव में अपना सामना नहीं कर सकता। केवल ऐसा व्यक्ति ही अपने मन को व्यस्त रखने के लिए अन्य वस्तुओं और व्यक्तियों के पीछे भागता है। जब उसे कोई वस्तु या व्यक्ति अपने दिमाग़ को व्यस्त रखने के लिए नहीं मिलता तो वह ऊब जाता है। ऊबाऊपन किसी वस्तु को चाहने, लेकिन उसे न पाने पर होता है। वह यह नहीं जानता कि अपने अन्तर्मन की ओर ध्यान मोड़ कर किसी बाहरी वस्तु के बिना भी आनन्द अनुभव किया जा सकता है। वह आन्तरिक आनन्द और शान्ति को अनुभव करने में असफल रहता है जो प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर उसकी आत्मा में या मन में गहरे गुप्त स्थान पर विद्यमान रहती है।  

लेकिन अपनी सन्तुष्टि के लिए अन्य वस्तुओं और व्यक्तियों पर निर्भर रहना अत्यन्त मायावी (छलने वाला) है क्योंकि इस दुनिया में कुछ भी स्थाई रूप से तुम्हारे साथ रहने वाला नहीं है। प्रत्येक वस्तु या व्यक्ति तुम्हें एक दिन छोड़ जाएगा और तब चाहे इच्छा से या बलपूर्वक तुम्हें केवल अपने साथ ही रहना होगा। यहां तक कि तुम्हारे सामान्य दैनिक व्यस्त जीवन में भी, कुछ ऐसे पल आते हैं, जब तुम अकेले और केवल अपने साथ ही होते हो।

यदि तुम अकेले नहीं रह सकते तो इसका अर्थ यह है कि तुम अपने साथ शान्ति में नहीं हो। जैसे ही तुम अकेले होते हो तुम्हारे अन्दर जो बहुत से विरोधाभास और बेचैनियां हैं, वे तुम्हें सताने लगती हैं। इसलिए उसे दूर करने के लिए तुम वस्तु या व्यक्ति के रूप में हमेशा बाह्य अवलम्बन लेना चाहते हो ताकि तुम्हारा मन तुम्हारीआन्तरिक बेचैनी की बजाय बाहरी वस्तुओं में लीन हो जाए। लेकिन यह वास्तविक समस्याओं से अपने आप को मोड़ने और उनसे भागने के समान हैं। ये ठहरे हुए प्रबन्धन-अंतराल तुम्हें शाश्वत शान्ति और सन्तुष्टि नहीं दे सकते, जिसे तुम अपने मन की गहराई से मांग रहे हो। ये तो भूल-भूलैया की तरह हैं। तुम जिस शान्ति की याचना कर रहे हो, उसके लिए जल्दी या देर से तुम्हें अपने स्वयं के साथ तो व्यवस्थित होना ही पड़ेगा। अपने आप से भागना शान्ति प्राप्त करने का रास्ता कभी नहीं हो सकता। यह शान्ति प्राप्त करने में केवल विलम्ब ही कराता है। इस कठिन पहेली को सुलझाना है, तो तुम्हें ख़ुद को पसन्द करना, अपने साथ रहना सीखना होगा। 

लघुकथा: मौन की आवाज़

पुराने शहर के एक छोटे से घर में 70 वर्षीय रामलाल अकेले रहते थे। बच्चे विदेश में थे और पत्नी दुनिया छोड़ चुकी थी। घर में सन्नाटा इतना था कि घड़ी की टिक-टिक भी हथौड़े की तरह लगती थी। शाम को जब आस-पास के घरों से हंसी-मजाक की आवाजें आतीं, तो रामलाल अपनी बालकनी में बैठ कर चाय पीते और खुद से ही बातें करते।

एक दिन, उनके पास के मकान में एक नया युवा परिवार रहने आया। उनकी 5 साल की बेटी 'मिनी' अक्सर रामलाल की बालकनी में आकर बैठ जाती। रामलाल उसे अपनी पुरानी कहानियां सुनाते। मिनी की किलकारियों ने उस घर के सन्नाटे को तोड़ दिया।

रामलाल समझ गए कि अकेलापन इंसान की परिस्थिति नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है। जब तक आप दूसरों की अपेक्षाओं में उलझे हैं, तब तक आप अकेले हैं, लेकिन जब आप खुद के साथ सहज हो जाते हैं और दूसरों के साथ जुड़ते हैं, तो वह अकेलापन 'एकांत' (Solitude) बन जाता है। 

उस दिन के बाद, रामलाल ने बालकनी में बैठकर अकेलेपन से डरने के बजाय, उसे अपना दोस्त बना लिया।

सीख: अकेलेपन का सामना करने के लिए खुद के साथ दोस्ती करना और निस्वार्थ जुड़ाव खोजना ही एकमात्र उपाय है।

यदि तुम्हारे मन को व्याकुल करने के कोई कारण हैं, तो उन्हें हल करने की कोशिश करो, न कि उनसे दूर भागने की। याद रखो कि यह केवल तुम स्वयं ही हो जो तुम्हारे साथ रहेगा, इस दुनिया में अन्य कोई नहीं। उच्च अवस्था में तुम अपने मन को इस प्रकार विकसित कर सकते हो कि जब तुम भीड़ में हों, तब भी अपने आप को अकेले महसूस करो और जब अकेले हों, तब भी व्यक्तियों के बीच में महसूस करो। 

हमने भीड़ में रहने की आदत बना ली है। हम अकेले होने से डरते हैं, हालांकि वास्तविकता यह है कि हमारा अकेलापन ही हमारी सच्चाई है। हम इस दुनिया में अकेले आते हैं, अकेले रहते हैं और अकेले ही विदा हो जायंगे। क्या यह सच नहीं है कि एक व्यक्ति हमेशा अकेला होता है, चाहे सैंकड़ों या लाखों लोगों से घिरा हुआ हो? अपने अकेलेपन को पहचानो, जानो और महसूस करो।

प्रतिदिन कुछ समय के लिए ऐसे रहो जैसे तुम इस दुनिया में अकेले हो। उस समय तुम न एक पति हो, न एक पत्नी, न एक पिता, न एक माँ, न एक पुत्र, न एक अध्यापक, न एक विद्यार्थी, न एक पुरुष, न एक स्त्री। तुम केवल तुम हो। अपने आप के साथ मुलाकात करो और जीवन के पल-पल का आनंद लो। जीवन को ऐसे जीओ जैसे कीचड़ में कमल, कांटों में गुलाब। कोई साथ दे तो अच्छा है, वरना हम स्वयं दीप बन कर जलें, स्वयं रोशन रहें व रोशनी का विस्तार करें।

 द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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