How to remain ever happy?

 How to remain ever happy?
जीवन का आनन्द प्राप्त करने के लिए ‘हर पल मुस्कुराइए’


Life is full of choices....and I choose happiness.

इस महत्वपूर्ण मनोरंजक विषय पर विस्तृत विचार विनिमय प्रारम्भ करने से पहले, हमें इस वास्तविकता को समझना होगा कि खुशी और उदासी मूल रूप से हमारे मन व मस्तिष्क पर निर्भर है। यह मन-मस्तिष्क की वह अवस्था है जो बाहरी परिस्थितियों और घटनाओं पर आवश्यक रूप से निर्भर नहीं है। अन्य शब्दों में - यह हमारे भीतर से आती है, बाहर से नहीं।

दो व्यक्ति एक ही परिस्थिति पर अलग-अलग प्रतिक्रिया कर सकते हैं। जहां एक व्यक्ति अत्यधिक तनावग्रस्त व बैचेन हो सकता है, दूसरा उस परिस्थिति के प्रति शांति व खुशी की स्थिति को बनाए रख सकता है। अतः हमारी खुशी या उदासी को निश्चित करने वाली बाहरी परिस्थितियां नहीं हैं, अपितु उन परिस्थितियों के प्रति हमारा रुख व मानसिक रूप से प्रतिक्रिया है। यदि हम कहें कि जीवन में मानसिक स्थिति ही सब कुछ है तो यह एक अतिशयोक्ति नहीं होगी।

व्यक्ति को जीवन जीने की कला आनी चाहिए। जीने का अर्थ दिन काटना नहीं है। किसी को यह मत समझाओ कि क्रोध मत करो, बल्कि यह सिखाओ कि इसे प्रेम व खुशी में कैसे बदला जाए। सदा खुश रहने के लिये हमें केवल अपनी मानसिक स्थिति को पुनः व्यवस्थित करना है। यही एक सुदृढ़ कवच है। हमारी मानसिक स्थिति को पुनः व्यवस्थित करने के लिए हमें अपने मन की ताकत व इच्छा-शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता है।

दुनियादारी की चाबियों से सुख और शांति के ताले नहीं खुलते। भीतर के तालों को खोलने के लिए भीतर की ही चाबियां काम आयेंगी। अपना बोध जगा लो तो आप खुद ही बुद्ध हो जाओगे। चित्त में उठने वाले प्रत्येक संवेग के प्रति जागरूक रहने से जीवन सृजनात्मक, अमृतमय व आनंदमय हो जाएगा। कुएँ का मेंढक बाहर निकलेगा, तभी सागर की यात्रा कर सकेगा। 

अपनी मानसिक स्थिति को बदलने और अपने मन की ताकत व इच्छा-शक्ति को बढ़ाने के लिए कुछ संकेत दिए गए हैं, जिन्हें यदि आप अपने दैनिक जीवन में समाविष्ट करें तो ये मन की स्थिरता, शांति और आंतरिक खुशी का नेतृत्व कर सकेंगे।

मैंने बहुत ही व्यावहारिक मार्ग और सामान्य व्यक्ति की शब्दावली व भाषा को चुना है, ताकि आप दिमाग को भ्रमित कर देने वाली शब्दावली व दार्शनिकता के धोखे में फंसे बिना इन बिन्दुओं को आत्मसात कर सकें।

कृपया ध्यान दें कि ये महज एक सैद्धान्तिक वाक्य नहीं हैं। यह असंख्य व्यक्तियों के द्वारा भूतकाल में अनुभूत प्रयोगों द्वारा परीक्षित किया गया है, जिन्हें अनन्त खुशी की चाबी प्राप्त हुई है। आपको सलाह दी जाती है कि इसे बार-बार पढ़ें और इससे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए और मन में इन बिन्दुओं को सही रूप से जमाने के लिए पढ़ने के बाद प्रत्येक बिन्दु पर चिन्तन अवश्य करें।

शेष अगले प्रकरण में .............(cont....)

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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