अवसर के अनुकूल बात करो

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वाणी बने वीणा (5)

अवसर के अनुकूल बात करो

यदि हम वाणी का विवेक से प्रयोग करते हैं तो वहाँ न उद्वेग होगा, न अतिरेक होगा और न ही उद्रेक होगा। हमें सदा अवसर के अनुकूल ही बोलना चाहिए। अवसर के प्रतिकूल बोली गई अच्छी बात भी किसी को अच्छी नहीं लगती। तभी तो भोजन के समय मौन रहने को कहा जाता है ताकि इस बात का विवेक रहे कि कितना खाना है और क्या खाना है।

ठीक इसी प्रकार बोलते समय भी इस बात का विवेक रखना चाहिए कि हमें कितना बोलना है और क्या बोलना है।

बोलने से पहले हर शब्द को Watch करो।

W: Watch Your Words.

A: Watch Your Action.

T: Watch Your Thoughts.

C: Watch Your Character.

H: Watch Your Habits.

यह है जीवन की सफलता का मूल मंत्र। वाणी हमारे दिमाग में उत्पन्न विचारों को सम्प्रेषित करने का केवल माध्यम है। यदि हम सबके प्रति अच्छा सोचने की आदत बना लें तो हम अपनी जुबान से हमेशा मधुर वचन ही निःस्सृत करेंगे। 

हमारा दिमाग विचारों के Tank के समान है, जिसमें अलग-अलग तरह के विचार भरे हुए हैं। हमारा मुख एक टोंटी के समान है। जब हम बोलने के लिए अपना मुख खोलते हैं, तो वे विचार ही भाषा बन कर निकलते हैं।

एक गांव का आदमी शहर में आया। उसने एक स्थान पर टोंटी लगी हुई देखी और देखा कि एक आदमी उसे घुमा-घुमा कर उससे पानी निकाल कर पी रहा था। उससे पहले गांव के आदमी ने इस प्रकार पानी निकलता हुआ नहीं देखा था। उसने उस आदमी से पूछा कि 'यह क्या है?'

उस आदमी ने बताया कि 'यह पानी की टोंटी है। इसे घुमाने से पानी निकलता है।' 

'अरे वाह! यह तो बहुत काम की चीज है। यह कहाँ मिलती है?'

'यह टोंटी बेचने वालों की दुकान पर मिलती है।'

वह बाजार में गया और पूछताछ कर के अपने घर के लिये 10 टोंटी खरीद लाया कि मुझे पानी वाली टोंटी चाहिए। घर आकर उसने टोंटी घुमाई पर उसमें से तो पानी निकला ही नहीं। अगले दिन वह फिर शहर में उसी दुकानदार के पास गया और बोला कि तुमने कैसी टोंटी दे दी, उसमें से तो पानी निकलता ही नहीं। दुकानदार ने पूछा कि तुमने टोंटी जिस Tank से जोड़ी थी, उसमें पानी था या नहीं।

अरे! यह तो तुमने बताया ही नहीं कि उसे किसी Tank के साथ भी जोड़नी है। मैंने तो किसी Tank के साथ नहीं जोड़ी।

इसी प्रकार वाणी की टोंटी विचारों के Tank से जुड़ी होती है। उसमें जैसे विचार भरे होंगे वैसे ही वाणी से शब्द निकलेंगे। अतः हित-मित और प्रिय वचन बोलने के लिए अपने मस्तिष्क के Tank को हमेशा अच्छे विचारों से ही भरना चाहिए।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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