चमत्कारी डण्डा

👼👼💧💧👼💧💧👼👼

चमत्कारी डण्डा

Image by robert102 from Pixabay

कभी-कभी कमियाँ देखने वाला डण्डा अपनी ओर भी कर लेना चाहिए।

एक महात्मा बहुत ज्ञानी थे। वे अपनी ही साधना में लीन रहते थे। एक बार एक लड़का उनके पास आया। उसने उनसे अपना चेला बना लेने की पुरजोर प्रार्थना की। महात्मा जी ने सोचा - बुढ़ापा आ रहा है। एक चेला पास में होगा, तो सहारा बनेगा। यह सोचकर उन्होंने उसे चेला बना लिया।

चेला बहुत चंचल प्रकृति का था। ज्ञान-ध्यान में उसका मन नहीं लगता था। दिन-भर आने-जाने वालों से बातें करने और मस्ती करने में उसका समय व्यतीत होता। गुरु ने कई बार उसे समझाने की चेष्टा की, पर सफलता नहीं मिली।

एक दिन चेला महात्मा जी से बोला - गुरुदेव! मुझे कोई चमत्कार सिखा दें। गुरु ने कहा - वत्स! चमत्कार कोई काम की वस्तु नहीं है। उससे एक बार भले ही व्यक्ति प्रसिद्धि पा ले, लेकिन अंततोगत्वा उसका परिणाम अच्छा नहीं होता। पर चेला अपनी बात पर अड़ा रहा।

बालहठ के सामने गुरु जी को झुकना पड़ा। उन्होंने अपने झोले में से एक पारदर्शी डण्डा निकाला और चेले के हाथ में उसे थमाते हुए कहा - यह लो चमत्कार। इस डंडे को तुम जिस किसी के सीने के सामने करोगे, उसके दोष इसमें प्रकट हो जाएंगे। चेला डंडे को पाकर बहुत प्रसन्न हुआ।

गुरु ने चेले के हाथ में डण्डा क्या थमाया, मानो बंदर के हाथ में तलवार थमा दी। कोई भी व्यक्ति आश्रम में आता, चेला हर आगंतुक के सीने के सामने उस डंडे को घुमा देता। फलतः उसकी कमजोरियाँ उसमें प्रकट हो जाती और चेला उनका दुष्प्रचार शुरू कर देता।

गुरु जी सारी बात समझ गए। एक दिन उन्होंने चेले से कहा - एक बार डण्डा अपनी ओर भी घुमाकर देख लो, इससे स्वयं का परीक्षण हो जाएगा कि आश्रम में आ कर अपनी साधना से तुमने कितनी प्रगति की है।

चेले को बात जंची। उसने फौरन डण्डा अपनी ओर किया, लेकिन देखा कि उसके भीतर तो दोषों का अंबार लगा है। शर्म से उसका चेहरा लटक गया। वह तत्काल गुरु के चरणों में गिर पड़ा और अपनी भूल की क्षमा मांगते हुए बोला - गुरु जी! आज से मैं दूसरों के दोष देखने की भूल नहीं करूँगा।

--

 सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद।

Comments

Popular posts from this blog

मुसाफ़िरखाना (शब्दचित्र)

जीवन संगिनी की मधुर स्मृति में स्मरणांजलि

ए खुदा

Y for Yourself

Install good photos and pictures.

Avoid suspicius, doubts; have faith.

Go close to nature whenever you find the opportunity.

Remain above diseases of the body.

त्याग की बात

Regulate your diet