Regulate your diet
अपने मन को पुष्ट करने के लिए तन को अच्छा पोषण दो।Regulate your diet for your mental well being.
असली ताकत
एक समय की बात है, आर्यभट्ट नाम का एक युवक था जो बहुत बुद्धिमान था। वह हमेशा किताबों में डूबा रहता और घंटों चिंतन करता था। उसे लगता था कि जीवन का सार केवल मानसिक विकास (ज्ञान) में है। नतीजा यह हुआ कि वह शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो गया। उसे बात-बात पर थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन रहने लगा। उसका मन अब पढ़ाई में भी नहीं लगता था।
हताश होकर वह अपने गुरु के पास गया और अपनी समस्या बताई, ‘गुरुदेव, मैं ज्ञान तो बढ़ाना चाहता हूँ, लेकिन मन थक गया है। कोई उपाय बताइए।’
गुरुजी मुस्कुराए और बोले, ‘कल सुबह मेरे साथ घूमने चलना।’
अगले दिन, गुरुजी उसे एक ऊँचे पहाड़ पर ले गए। आर्यभट्ट जल्दी थक गया और हाँफने लगा। गुरुजी ने उसे वहीं एक झरने के किनारे बैठकर योग और प्राणायाम सिखाया, फिर थोड़ी देर दौड़ने को कहा। यह दिनचर्या हफ़्तों तक चली।
धीरे-धीरे आर्यभट्ट का शरीर सुगठित और मजबूत होने लगा। जैसे-जैसे उसका तन (शरीर) पुष्ट हुआ, उसका मन शांत और एकाग्र हो गया। अब वह ज्यादा ऊर्जा के साथ पढ़ाई कर सकता था।
गुरुजी ने उसे समझाया, ‘पुत्र, स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है (स्वस्थ तन, स्वस्थ मन)। यदि मन का महल बनाना है, तो शरीर की नींव मजबूत होनी चाहिए। मन को पुष्ट करने के लिए तन को पुष्ट करना आवश्यक है।’
आर्यभट्ट समझ गया कि शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक ऊर्जा का आधार है।
सीख- तन और मन एक-दूसरे के पूरक हैं। तन को पुष्ट करने से ही मन पुष्ट होता है। अन्त में, खाना कभी भी जल्दी में या तनाव में मत लो। ऐसी अवस्था या मानसिकता में भोजन अच्छी तरह नहीं पचता, बल्कि ज़हर बन जाता है। इसलिए हमेशा शांत चित्त होकर भोजन करो। यदि ऐसा संभव न हो, तो भोजन को टाल दो।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद।
Comments
Post a Comment