Regulate your diet

 अपने मन को पुष्ट करने के लिए तन को अच्छा पोषण दो।
Regulate your diet for your mental well being.

तुम्हारी ख़ुराक तुम्हारे मन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालती है। खाद्यपदार्थ जैसे चाय, कॉफी, एल्कोहल, नशे की दवाइयाँ, सिगरेट, कोको, भुने-तले पदार्थ, मिर्च-मसाले, मिठाइयां, ज्यादा गर्म या ज्यादा ठंडी चीजें दिमाग़ व मन को उत्तेजित करने व निष्क्रिय करने का काम करती हैं और मन-मस्तिष्क का संतुलन बिगाड़ देती हैं। इसी प्रकार अधिक खाना, कम खाना या विभिन्न अन्तरालों पर खाते रहना भी अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का परिचायक नहीं है। अच्छे स्वास्थ्य के रहस्यों में से एक है- हमेशा कुछ भूखे रहना। अधिक मात्रा में पानी, सब्जियां और फल लेने से तुम्हारा शरीर साफ़ और मन पवित्र रहता है। समय-समय पर उपवास करना तुम्हारे स्वास्थ्य और मानसिक नियंत्रण को बढ़ाने में सहायक होता है। 

असली ताकत

एक समय की बात है, आर्यभट्ट नाम का एक युवक था जो बहुत बुद्धिमान था। वह हमेशा किताबों में डूबा रहता और घंटों चिंतन करता था। उसे लगता था कि जीवन का सार केवल मानसिक विकास (ज्ञान) में है। नतीजा यह हुआ कि वह शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो गया। उसे बात-बात पर थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन रहने लगा। उसका मन अब पढ़ाई में भी नहीं लगता था।

हताश होकर वह अपने गुरु के पास गया और अपनी समस्या बताई, ‘गुरुदेव, मैं ज्ञान तो बढ़ाना चाहता हूँ, लेकिन मन थक गया है। कोई उपाय बताइए।’

गुरुजी मुस्कुराए और बोले, ‘कल सुबह मेरे साथ घूमने चलना।’

अगले दिन, गुरुजी उसे एक ऊँचे पहाड़ पर ले गए। आर्यभट्ट जल्दी थक गया और हाँफने लगा। गुरुजी ने उसे वहीं एक झरने के किनारे बैठकर योग और प्राणायाम सिखाया, फिर थोड़ी देर दौड़ने को कहा। यह दिनचर्या हफ़्तों तक चली।

धीरे-धीरे आर्यभट्ट का शरीर सुगठित और मजबूत होने लगा। जैसे-जैसे उसका तन (शरीर) पुष्ट हुआ, उसका मन शांत और एकाग्र हो गया। अब वह ज्यादा ऊर्जा के साथ पढ़ाई कर सकता था।

गुरुजी ने उसे समझाया, ‘पुत्र, स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है (स्वस्थ तन, स्वस्थ मन)। यदि मन का महल बनाना है, तो शरीर की नींव मजबूत होनी चाहिए। मन को पुष्ट करने के लिए तन को पुष्ट करना आवश्यक है।’

आर्यभट्ट समझ गया कि शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक ऊर्जा का आधार है।

सीख- तन और मन एक-दूसरे के पूरक हैं। तन को पुष्ट करने से ही मन पुष्ट होता है। अन्त में, खाना कभी भी जल्दी में या तनाव में मत लो। ऐसी अवस्था या मानसिकता में भोजन अच्छी तरह नहीं पचता, बल्कि ज़हर बन जाता है। इसलिए हमेशा शांत चित्त होकर भोजन करो। यदि ऐसा संभव न हो, तो भोजन को टाल दो।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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