दूध की नदी


 दूध की नदी     

 आजकल बहुत लोग सोचते है कि अगर कोई बूढ़ा इंसान है तो उसका कोई महत्त्व नहीं है। लेकिन आज आप लोगों को एक कहानी के माध्यम से बताना चाहता हूँ कि बुजुर्गों का महत्त्व  क्या है। तो चलिए दोस्तों! शुरू करते हैं आज की कहानी "दूध की नदी"।  

एक बार की बात है, एक लड़का था, जिसका नाम “रवि“ था और वह एक शहर में नौकरी करता था। उसके साथ एक लड़की भी काम करती थी, जिसका नाम “कोमल“ था। काम करते-करते ये दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और विवाह करने की सोची। 

फिर इन दोनों ने अपने-अपने घर में यह बात बताई। लड़के के घर वाले बहुत खुले विचारों के थे, तो वे बहुत जल्दी मान गए। लेकिन लड़की के पिता को यह पसन्द नहीं था और जब लड़के के घरवाले लड़की के घर लड़की का हाथ मांगने पहुँचे, तो कोमल के पिता ने एक शर्त रख दी कि बारात में कोई भी बुजुर्ग व्यक्ति नहीं आएगा, बच्चों को अपने आप ही सब काम करने दो,,,.....तो सबने बिना विचारे उनकी वह शर्त मान ली और दोनों परिवार विवाह की तैयारी करने लगे।

सब बहुत प्रसन्न थे क्योंकि आज वह दिन था, जब रवि और कोमल का विवाह होना था। सब तैयार थे। अब बारात निकलने का समय आया, तभी रवि के दादा ने ज़िद पकड़ ली कि वे तो बारात में जायेंगे। सब लोगों ने मना किया लेकिन वे अपनी जिद्द पर अडिग ही रहे। उन्होंने कहा - “भले ही मुझे कार की डिग्गी में डाल कर ले जाओ, लेकिन मैं तो अवश्य जाऊंगा।“ सब लोगो को उनकी बात माननी पड़ी, उन्हें कार की डिग्गी में डाल दिया गया और बारात निकल पड़ी। 

सब नाचते-गाते जा रहे थे। कोमल के घर से थोड़ी दूर पर एक नदी थी, जिसे पार करने के बाद एक पहाड़ आता था, उसके बाद कोमल का घर। जब बारात पुल पार करने वाली थी, तो उन्होंने देखा कि लड़की के मामा वहाँ खड़े हैं। बारात रुक गई, रवि के दोस्त ने कोमल के मामा से पूछा - “क्या हुआ? आप यहाँ क्या कर रहे है?“ 

कोमल के मामा ने कहा - “मैं यहाँ बस तुम लोगों को यह बताने के लिए आया हूँ कि अगर तुम लोग अपनी बारात हमारे गाँव में लाना चाहते हो और ये विवाह करना चाहते हो तो हम लोगों की एक और शर्त है और वो यह है कि ये जो नदी है, इसमें तुम्हें पानी की जगह दूध बहाना होगा।“ इतना बोलने के बाद वे वहाँ से चले गए।  

तब रवि के दोस्तों ने कहा कि ये असंभव है। इतना दूध कहाँ से लाएंगे? अब ये विवाह नहीं हो सकता और बारात वापस जाने लगी और दूर से कोमल के मामा और पिता ये देख के हँसने लगे। 

बारात वापिस हो रही थी, तभी एक दोस्त ने कहा - विवाह तो होना नहीं, तो दादा जी को भी डिग्गी से बाहर निकाल लो। उनका भी क्यों दम घोटना? 

डिग्गी खोली तो दादा जी ने पूछा, “क्या हुआ? हम लोग वापस क्यों जा रहे है?“ रवि ने उत्तर दिया - “क्योंकि दादाजी उन्होंने विवाह की एक और शर्त रखी है। वे लोग चाहते है कि इस नदी में पानी के जगह दूध बहाया जाए, जो हमारे लिए असंभव है।“ 

“बस इतनी सी बात है!“ दादा जी ने कहा। सब उनकी ये बातें सुन कर सोचने लगे कि क्या ये इतनी सी बात है? 

फिर बुजुर्ग दादा ने कहा, “जाओ और कोमल के मामा को बोलो- हमने दूध की व्यवस्था कर ली है, अब तुम लोग इस नदी के पानी को खाली करो, जिससे हम इसमें दूध बहा सकें।“ जब ये बात कोमल के पिता को पता लगी, उन्होंने कहा - अवश्य उनके साथ कोई न कोई बुजुर्ग व्यक्ति ज़रूर है, जिसने ये समाधान निकाला है।

उसके बाद कोमल के पिता बिना शर्तो के विवाह के लिए मान गए, क्योंकि जिनके ऊपर बुजुर्गों के अनुभव की छत्र छाया होती है वे हर समस्या को बड़ी आसानी से पार कर जाते हैं,,,इसके बाद रवि और कोमल की एक अच्छे भविष्य की शुरूआत होती है। 

कहानी का नैतिक पक्ष - ’आप कितना भी कुछ बन जाएं या कितना भी बड़े हो जायें, जो बुजुर्गों के पास जिंदगी के अनुभव है, वह आपके पास नहीं। उनका और उनकी हर बात का आदर करें।’

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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