Don't react immediately
जब मन व्याकुल हो तो उसी समय प्रतिक्रिया मत करो।Don't react immediately when disturbed.
किसी अचानक आई हुई समस्या के कारण या किसी के द्वारा की गई आलोचना या कोई असंगत टिप्पणी किये जाने के कारण यदि तुम व्याकुलता और बेचैनी महसूस करते हो तो उसी समय प्रतिक्रिया करने को टाल दो, बल्कि उस स्थान से दूर चले जाओ और अपने आप को शांत करो। अपने दिमाग़ को विश्राम दो और सभी बातों पर ठंडे दिमाग़ से सोच विचार करो। तुम अपने दिमाग़ से वास्तविकता को बेहतर ढंग से समझो।
एक बार एक औरत ने अपने घर में एक नेवला पाल रखा था, उस औरत का एक छोटा-सा बालक भी था। औरत जब भी बाहर जाती, तो बालक को घर पर ही छोड़ जाती। उसे विश्वास था कि नेवला उसके बालक का बहुत ध्यान रखता है।
एक दिन औरत जब बाज़ार से वापस आ रही थी, तो उसने देखा की नेवला बाहर था और उसके मुहँ पर बहुत सारा खून लगा था। औरत बहुत डर गई और उसे लगा कि नेवला उसके बालक को खा गया और उसने बिना सोचे नेवले को मार दिया। बाद में पता चला है कि नेवले ने साँप को मारकर उसके बालक की जान बचाई। बाद में औरत को बहुत पछतावा हुआ।
इसलिए बिना विचारे,कोई कार्य नहीं करना चाहिए। आवेश में दिमाग़ की युक्तिपूर्वक विचार करने की शक्ति नष्ट हो जाती है।
जब किसी विषय में पूछा जाए, तब सज्जनता से अपना स्पष्टीकरण दो। ओरांं पर अपनी निर्दोषता को सिद्ध करने के लिए अपने तर्कों पर दबाव न डालो।
जवाब में आपकी आवाज़ हमेशा विनम्र, आदर से युक्त और नियंत्रित होनी चाहिए। तुम्हें कभी भी अनियंत्रित तरीके से व्यवहार नहीं करना चाहिए और उत्तर देते समय ऊँची आवाज़ में नहीं बोलना चाहिए।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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