past and future
भूतकाल के प्रति खिन्न या भविष्य के प्रति चिन्तित न हों। Brooding over past and worring for future
कई लोग इन्हीं दोनों कामों में अपनी सारी ज़िन्दगी बेकार गंवा देते हैं। यह निश्चित है कि जो कुछ तुम्हें भूतकाल में करना चाहिए था, उसको सुधारने के लिए अब तुम कुछ नहीं कर सकोगे, लेकिन उसके लिए वर्तमान को बिगाड़ना भी तो बुद्धिमानी नहीं है। इसी प्रकार भविष्य, जिसे हम पहले से नहीं जानते, उस के लिए चिंता करके भी अपने वर्तमान को बिगाड़ना बुद्धिमानी नहीं है। वास्तव में इन सब चिंताओं में लीन हो कर न केवल अपने वर्तमान को बल्कि हम जानबूझ कर अपने भविष्य को भी बिगाड़ रहे हैं।
एक गाँव में रामू नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह हमेशा दो चिंताओं में घिरा रहता था - एक, ‘जो हो गया’ उसका अफसोस और दूसरा, ‘आगे क्या होगा’ उसकी घबराहट। वह अक्सर अपनी पुरानी गलतियों पर पछताता और भविष्य की अनिश्चितताओं से डरता।
एक दिन, वह एक बूढ़े साधु के पास पहुँचा, जो नदी किनारे ध्यान कर रहे थे। रामू ने उनसे अपनी समस्या बताई। साधु मुस्कुराए और बोले, “रामू, तुम समय के पहिये में फंसे हो। अतीत एक बीता हुआ पन्ना है, जिसे बदला नहीं जा सकता, और भविष्य एक कोरा कागज़ है, जिसे अभी लिखा जाना है। तुम्हारा सारा जीवन इस ‘अभी’ (वर्तमान) में है।”
साधु ने आगे कहा, “जब तुम अतीत की चिंता करते हो, तो तुम उस पन्ने को फाड़ने की कोशिश करते हो; जब तुम भविष्य की फिक्र करते हो, तो तुम उस कोरे पन्ने पर कुछ भी लिखने से पहले ही डर जाते हो। असली खुशी और शांति वर्तमान में जीने में है।”
“आज तुम जो करोगे, वही तुम्हारा कल बनेगा। अपने वर्तमान को सुंदर बनाओ, कर्म करो, और ईश्वर का स्मरण करो। यही तुम्हारी चिंता का एकमात्र उपाय है।”
रामू को बात समझ आ गई। उसने तय किया कि वह बीते कल से सीखेगा और आज अच्छा कर्म करेगा। उसने वर्तमान में जीना शुरू किया, अपने काम पर ध्यान दिया और शांत रहने लगा। जल्द ही, उसे महसूस हुआ कि उसका मन हल्का हो गया है और जीवन में सुकून आ गया है। वह समझ गया कि चिंता छोड़कर वर्तमान में जीने से ही भूत सुधरता है और भविष्य संवरता है।
कृपया याद रखें कि तुम्हारे जीवन में वर्तमान के पल सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। इस समय तुम्हारे लिए और इस दुनिया के लिए इस बात का अधिक महत्त्व है कि तुम वर्तमान में क्या हो, न कि तुम क्या थे और क्या होंगे। उन्हें केवल इस में रुचि है कि तुम अब क्या हो। इसलिए अपने वर्तमान पर पूरा नियंत्रण रखो। वर्तमान पर नियंत्रण करके हम अपने भविष्य की नींव को सुदृढ़ करते हैं और काफ़ी हद तक पिछले कर्मों के प्रभाव को भी कम कर सकते हैं।
भूतकाल को उससे केवल कुछ ‘सीख’ लेने के लिए प्रयोग किया जा सकता है ताकि वे ग़लतियां फिर से न दोहराई जायं। इसके अतिरिक्त भूतकाल का कोई महत्त्व नहीं है। इसे केवल पीछे देखी गई पुरानी फ़िल्मों की तरह भूल जाएं। तुम्हारे लिए जीवन में उन्नति के अवसरों का कोई अभाव नहीं है। यदि तुमने भूतकाल में कुछ अवसरों को खो भी दिया है तो तुम अभी भी गाड़ी पकड़ सकते हो। हर प्रकार के अवसर तुम्हारे सामने हमेशा आते रहेंगे। केवल तुम्हारे अन्दर उनको कस कर पकड़ने की चाहना होनी चाहिए।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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