Eliminate ego

  अहंकार और कर्त्तापन के भाव से बचो।

Eliminate ego and doership feeling.

जो भी काम या बातें तुम करते हो, उनमें यह भावना रखो कि यह भगवान का काम है और तुम उसके प्रतिनिधि के रूप में उसके निर्देशन में काम कर रहे हो। वह ही असली कर्त्ता है। तुम भगवान के हाथों में एक उपकरण या केवल एक माध्यम हो। वह काम समाप्त होने के बाद श्रद्धा और मानवीयता के साथ भगवान को समर्पित कर दो। कभी भी अभिमान या अहंकार न बढ़ाओ कि ये तुम ही हो, जो यह काम कर सकते हो और इस के लिए अब तुम प्रशंसा और इनाम पाने की भी उम्मीद रखते हो।

एक गांव में एक मूर्तिकार रहता था, जो इतनी जीवंत मूर्तियाँ बनाता था कि देखने वाले दंग रह जाते थे। धीरे-धीरे उसके मन में यह अहंकार बैठ गया कि “मैं” ही श्रेष्ठ कलाकार हूँ।

एक रात उसे सपना आया कि अगले सात दिनों में उसकी मृत्यु निश्चित है। यमदूतों को चकमा देने के लिए उसने अपनी ही जैसी दस हूबहू मूर्तियाँ बनाईं और खुद उनके बीच जाकर बैठ गया। जब यमदूत आए, तो वे ग्यारह एक जैसे चेहरों को देखकर चकित रह गए। वे पहचान ही नहीं पा रहे थे कि असली कलाकार कौन है।

यमदूत वापस लौट गए और यमराज को सब बताया। यमराज मुस्कुराए और बोले, “कर्ताभाव (अहंकार) को तोड़ना बहुत आसान है।”

यमदूत फिर पृथ्वी पर आए और मूर्तियों के सामने खड़े होकर बोले, “वाह! क्या अद्भुत कला है। लेकिन अफ़सोस, इन मूर्तियों में एक बहुत बड़ी त्रुटि रह गई है।”

यह सुनते ही कलाकार का ‘अहंकार’ जाग उठा। वह तुरंत बोल पड़ा, “असंभव! मेरी बनाई मूर्तियों में कोई गलती नहीं हो सकती। कहाँ है त्रुटि?”

यमदूत ने उसे पकड़ लिया और कहा, “बस, यही त्रुटि है - तुम्हारा ‘मैं’। यदि तुम ‘कर्ता’ न बनते, तो आज बच जाते।”

सीख - जब हम यह सोचने लगते हैं कि “मैंने किया” या “मैं कर रहा हूँ”, तो हम अपने ही अहंकार के जाल में फंस जाते हैं। कर्ताभाव का त्याग ही वास्तविक शांति है। नाम, प्रसिद्धि, सम्पत्ति, धन, परिवार आदि की अहं भावना को नष्ट कर दो क्योंकि ये सब वस्तुएं क्षणिक हैं और एक दिन अदृश्य हो जाएंगी। ये तुम्हें भगवान की दया से अस्थाई तौर पर मिली हैंं। अहंकार या अहं भाव एक परदा है जो तुम्हें भगवान के निकट आने की अनुमति नहीं देता। जैसे ही अहं भाव घुल जाएगा, तुम भगवान के समीप आ जाओगे।

प्रेषिका- सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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