Self-satisfaction
दूसरों को सन्तुष्ट करने से पहले अपने आप को सन्तुष्ट करें।Self-satisfaction before satisfaction of others.
भगवान की बात सुनकर उनमें से एक किसान बड़े गुस्से से बोला - हे भगवान! आपने इस जन्म में मुझे बहुत कष्टमय ज़िन्दगी दी थी। आपने कुछ भी नहीं दिया था मुझे। पूरी ज़िन्दगी मैंने बैल की तरह खेतों में काम किया है। जो कुछ भी कमाया, वह बस पेट भरने में लगा दिया। न ही मैं कभी अच्छे कपड़े पहन पाया और न ही कभी अपने परिवार को अच्छा खाना खिला पाया। जो भी पैसे कमाता था, कोई आकर मुझसे लेकर चला जाता था और मेरे हाथ में कुछ भी नहीं आया। देखो! कैसी जानवरों जैसी ज़िन्दगी जी है मैंने!
उसकी बात सुनकर भगवान कुछ समय मौन रहे और पुनः उस किसान से पूछा - तो अब क्या चाहते हो तुम इस जन्म में? मैं तुम्हें क्या बनाऊँ?
भगवान का प्रश्न सुनकर वह किसान पुनः बोला - भगवन्! आप कुछ ऐसा कर दीजिये कि मुझे कभी किसी को कुछ भी देना न पड़े। मुझे तो केवल चारों तरफ से पैसा ही पैसा मिले!
अपनी बात कहकर वह किसान चुप हो गया। भगवान से उसकी बात सुनी और कहा - तथास्तु! तुम अब जा सकते हो। मैं तुम्हें ऐसा ही जीवन दूँगा, जैसा तुमने मुझसे माँगा है।
उसके जाने पर भगवान ने पुनः दूसरे किसान से पूछा, ‘तुम बताओ! तुम्हें क्या बनना है? तुम्हारे जीवन में क्या कमी थी, तुम क्या चाहते हो?’
उस किसान ने भगवान के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा - ‘हे भगवन्! आपने मुझे सब कुछ दिया है। मैं आपसे क्या मांगूं? आपने मुझे एक अच्छा परिवार दिया, मुझे कुछ जमीन दी, जिस पर मेहनत से काम करके मैंने अपने परिवार को एक अच्छा जीवन दिया। खाने के लिए आपने मुझे और मेरे परिवार को भरपेट खाना दिया। मैं और मेरा परिवार कभी भूखे पेट नहीं सोया। बस एक ही कमी थी मेरे जीवन में, जिसका मुझे अपनी पूरी ज़िन्दगी अफ़सोस रहा और आज भी है। मेरे दरवाज़े पर कभी कुछ भूखे और प्यासे लोग आते थे भोजन माँगने के लिए, परन्तु कभी-कभी मैं भोजन न होने के कारण उन्हें खाना नहीं दे पाता था और वे मेरे द्वार से भूखे ही लौट जाते थे।’ ऐसा कहकर वह चुप हो गया।
‘प्रभुजी! इतना दीजिये जा में कुटुम्ब समाय!
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु भी भूखा न जाये!’
भगवान ने उसकी बात सुनकर उससे पूछा - ‘तो अब क्या चाहते हो तुम, इस जन्म में? मैं तुम्हें क्या बनाऊँ?’
किसान ने भगवान से हाथ जोड़ते हुए विनती करते हुए कहा - ‘हे प्रभु! आप कुछ ऐसा कर दो कि मेरे द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा न जाए।’
भगवान ने कहा - ‘तथास्तु! तुम जाओ। तुम्हारे द्वार से कभी कोई भूखा-प्यासा नहीं जाएगा।’
अब दोनों का पुनः उसी गाँव में एक साथ जन्म हुआ। दोनों बड़े हुए। पहला व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे चारों तरफ़ से केवल धन मिले और मुझे कभी किसी को कुछ देना न पड़े, वह व्यक्ति उस गाँव का सबसे बड़ा भिख़ारी बना। अब उसे किसी को कुछ देना नहीं पड़ता था और जो कोई भी आता, उसकी झोली में पैसे डाल कर ही जाता था। दूसरा व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे कुछ नहीं चाहिए। केवल इतना हो जाए कि उसके द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा न जाए, वह उस गाँव का सबसे अमीर आदमी बना।
मित्रों! ईश्वर ने जो भी दिया है, उसी में संतुष्ट होना बहुत ज़रूरी हैं। अक्सर देखा जाता है कि सभी लोगों को हमेशा दूसरे की चीज़ें ज्यादा पसंद आती हैं और इसके चक्कर में वे अपना जीवन भी अच्छे से नहीं जी पाते।
मित्रों! हर बात के दो पहलू होते हैं - सकारात्मक और नकारात्मक। अब यह आपकी सोच पर निर्भर करता है कि आप चीज़ों को नकारात्मक रूप से देखते हैं या सकारात्मक रूप से।
अच्छा जीवन जीना है तो अपनी सोच को अच्छा बनाइये, चीज़ों में कमियाँ मत निकालिये बल्कि जो भगवान ने दिया है, उसका आनंद लीजिए और हमेशा दूसरों के प्रति सेवा भाव रखिए।
मित्रों! सब कुछ इकट्ठा भी उन्हीं के पास होता है, जो बाँटना जानते हैं। वह चाहे भोजन हो, धन हो या मान-सम्मान हो!!
हम बदलेंगे, युग बदलेगा। बहुत से लोग जीवन का ऐसा ढंग अपनाते हैं, जिनका प्रथम उद्देश्य दूसरों को प्रभावित करने और सन्तुष्ट करने का होता है। वे इस बात को अधिक महत्त्वपूर्ण समझते हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। यह जीवन के प्रति हमारी निराशा के कारणों में से एक है।
कृपया नोट करें कि यह तुम्हारे लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है कि तुम अपने बारे में क्या सोचते हो न कि और लोग क्या सोचते हैं तुम्हारे बारे में।
तुम्हारा अपने बारे में आत्म-विश्लेषण अधिक महत्त्वपूर्ण है। दूसरों की राय या निर्णय पर ध्यान न दो, चाहे वह प्रशंसा हो या आलोचना। जो तुम्हें उचित लगता है, उसे ही मानो। यह आवश्यक नहीं कि तुम्हारे लिए अन्य लोगों द्वारा दिया गया निर्णय सही हो, क्योंकि वह उनके मानसिक रुझान के अनुसार होता है। केवल एक जागृत व्यक्ति जो तुम्हारे अत्यधिक निकट रहता हो और निष्पक्ष हो, वही तुम्हारे बारे में सही निर्णय दे सकता है।
जहां तक अन्य लोगों का संबंध है, उन्हें बनावटी तरीके से प्रभावित करने की कोशिश न करो। हमेशा एक साधारण और सुंदर जीवन शैली के साथ अपनी प्राकृतिक अवस्था में रहो। अन्य व्यक्ति तुम्हारे बारे में क्या सोचते हैं, इससे निरपेक्ष रहो।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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धन्यवाद।
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सादगी ही जीवन भी है और फैशन भी इस से जीवन सहज सरल समृध्द होता है अति उतम
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