Be flexible

  नए बदलाव को व विकास को स्वीकारने में लचीलापन दिखाओ। 
Be flexible for adopting new changes and improvments

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। विश्व की परिभाषा यही है कि यह विश्व परिवर्तनशील है। इसमें प्रति क्षण बदलाव घटित हो रहा है। जो हम एक घंटा पहले थे, अब हम वे नहीं हैं। अतः जीवन में परिवर्तन का विरोध न करो। इस परिवर्तन को आगे बढ़ने और कुछ सीखने के अवसरों की तरह प्रयोग करो। यह परिवर्तन का दर्शन शास्त्र है। यदि जीवन में परिवर्तन नहीं होंगे तो हम स्थिर और नीरस हो जाएंगे। अतः परिवर्तनों का आदर करना सीख़ो और परेशान होने के स्थान पर अपने लिए लाभदायक बनाने के लिए उपयोग करो।

उदाहरण के लिए, मान लो तुम्हारा तबादला एक स्थान से दूसरे स्थान पर हो जाता है। अपने नए स्थान या नए काम के बारे में किसी प्रकार के शक, डर और नकारात्मक सोच को शुरू न कर दो। तुम वास्तव में पाओगे कि ये सब डर तुम्हारी कल्पना मात्र थे। वास्तविक स्थिति उस से अलग थी।

एक राजा ने किसी पहुँचे हुए संत से विपत्ति से बचाने वाला सूत्र देने का आग्रह किया। संत ने एक ताबीज में एक मंत्र बांधकर दिया और कहा कि जब तुम बहुत बड़ी विपत्ति में फंस जाओ तभी इसे खोल कर पढ़ना, बीच में मत खोलना। 

एक बार दुश्मन की सेना राजा का पीछा करने लगी। सामने का रास्ता भी बंद मिला। राजा दुविधा में पड़ गया। उसे डर के कारण अपनी मृत्यु निश्चित दिखाई देने लगी। तभी उसे ताबीज़ का ध्यान आया जो उसके हाथ में बंधा हुआ था। राजा ने उसे खोल कर पढ़ा। उसमें लिखा था- ‘यह भी बीत जायगा।’ उसका डर कुछ कम होने लगा। अचानक घोड़ों की टापों की आवाज़ धीमी पड़ गईं। दुश्मन की सेना ने अपना रास्ता बदल लिया था। राजा किसी प्रकार सुरक्षित अपने राज्य में पहुँच गया तथा उसने फिर से सेना इकट्ठी करके दुश्मन का मुकाबला किया और अपना राज्य फिर से जीत लिया। समय व परिस्थिति के बदलते ही राजा का भाग्य भी बदल गया।

इसलिए हमेशा नए विचारों और सुझावों का स्वागत करो।

अपने मन के दरवाज़े पर सख़्ती से निश्चित किए गए कुछ विचारों, कुछ वहमों और रुचियों का ताला न लगाओ। याद रखो कि आगे सुधार लाने का अवसर हमेशा होता है, चाहे तुम कितनी भी विषम परिस्थिति में क्यों न हों?

प्रेषिका- सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद। 


Comments

  1. अति उतम समय के साथ चलें परन्तु मूल से जुड़े रहे।

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

मित्र की परिभाषा

बेटे व बेटी में अन्तर

ज़िन्दगी का अर्थ

बेटियां एक अहसास हैं

मुझे राम दे दो

माता-पिता

गीता सार

पतन से बचें

inferiority complex

क्षणिकाएँ