Accept your weaknesses.

  अपनी कमियों को स्वीकार करो और पहचानो।
Accept  and  recognise your weaknesses.

एक बार तुम अपनी कमियों को पहचान लेते हो तो समझो तुमने पहले ही उन्हें दूर करने का पहला कदम उठा लिएा है। औरों के सामने अपनी कमज़ोरियों को स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए और वास्तविकता को छिपाने की कोशिश भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति में स्वाभाविक रूप से कोई न कोई कमी होती है और उसे स्वीकार भी किया जाना चाहिए। 

एक जंगल में एक गधा रहता था, जो हमेशा शेर की तरह दहाड़ने की कोशिश करता रहता था। वह चाहता था कि सब उससे डरें और उसकी ताकत का लोहा मानें, लेकिन जब भी वह दहाड़ता, उसके मुख से सिर्फ़ गधों जैसी ही आवाज़ निकलती और सब जानवर उस पर हँसते थे। गधा बहुत दुःखी होता और रोने लगता।

एक दिन एक संत वहाँ से गुज़रे। उन्होंने गधे को उदास देखा और पूछा,"क्या बात है, तुम इतने दुखी क्यों हो?"

गधे ने रोते हुए कहा, "संत जी! मैं शेर की तरह दहाड़ना चाहता हूँ, लेकिन मेरी आवाज़ इतनी कमज़ोर है कि सब मेरा मज़ाक उड़ाते हैं। मैं अपनी इस कमी से बहुत परेशान हूँ।"

संत मुस्कुराए और बोले,"मेरे मित्र! तुम गधे हो, गधे की आवाज़ गधे जैसी ही होगी। तुम शेर बनने की कोशिश क्यों करते हो? तुम जैसे हो, वैसे ही बहुत अच्छे हो। अपनी इस कमी को स्वीकार करो। जब तुम गधे के रूप में अपनी पहचान स्वीकार कर लोगे, तब तुम्हें किसी और की नकल करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और तुम खुद को बेहतर बना पाओगे।"

संत की बात सुनकर गधे को अपनी ग़लती का एहसास हुआ। उसने शेर बनने का ख़्वाब छोड़ दिया और गधे के रूप में ही ख़ुश रहना सीख लिया। वह अपनी कमज़ोर आवाज़ के साथ ही दूसरे काम करने लगा और धीरे-धीरे उसे अपनी असली खूबियाँ मिल गईं।

इस कथा से यह सीख मिलती है कि हमें अपनी कमियों को स्वीकार करना चाहिए। अपनी कमियों को स्वीकार करना, उन्हें छुपाने या उनसे भागने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है,  क्योंकि यही आत्म-जागरूकता और सुधार का पहला कदम है, जो हमें अपनी ताकत बनने का मौका देता है। याद रखो-जो हम वास्तव में हैं, उससे कम ही अपने आप को आंको और इस प्रकार तुम्हारे मन पर अपने आप को अच्छा सिद्ध करने का हर समय दबाव नहीं रहेगा। 

संक्षेप में- जैसे अन्दर हो वैसे ही बाहर से बनो।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 


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